उत्तराखंड

देहरादून में कथित कैप्टागॉन फैक्ट्री विवाद, FDA ने कहा—यूनिट रिकॉर्ड में दर्ज नहीं

Kavita2
19 May 2026 11:15 AM IST
देहरादून में कथित कैप्टागॉन फैक्ट्री विवाद, FDA ने कहा—यूनिट रिकॉर्ड में दर्ज नहीं
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Uttarakhand उत्तराखंड : उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कथित तौर पर बैन सिंथेटिक ड्रग कैप्टागॉन के निर्माण से जुड़ी फैक्ट्री को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (FDA) ने सोमवार को स्पष्ट किया कि सहसपुर क्षेत्र में बताई जा रही ‘ग्रीन हर्बल’ नाम की फैक्ट्री उनके आधिकारिक रिकॉर्ड में पंजीकृत नहीं है। यह बयान उन रिपोर्टों के बाद आया है, जिनमें दावा किया गया था कि इस यूनिट में प्रतिबंधित ड्रग कैप्टागॉन का अवैध उत्पादन किया जा रहा था।

कैप्टागॉन को कई रिपोर्टों में “जिहादी ड्रग” के रूप में भी उल्लेखित किया जाता है, और इसके अवैध उत्पादन व तस्करी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जाती रही है। इस मामले के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच को तेज कर दिया है।

इस पूरे प्रकरण का खुलासा तब हुआ जब नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने “ऑपरेशन रेजपिल” के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली के नेब सराय इलाके से लगभग 182 करोड़ रुपये मूल्य की कैप्टागॉन ड्रग जब्त की। यह कार्रवाई मादक पदार्थों की तस्करी के एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करती है।

NCB की जांच के दौरान इस नेटवर्क से जुड़े कई सुराग मिले, जिनमें देहरादून की कथित फैक्ट्री का भी उल्लेख सामने आया। एजेंसी ने इस मामले में अलअब्रस अहमद नामक एक सीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर यह जानकारी दी कि दिल्ली से जब्त किए गए ड्रग का एक हिस्सा नवंबर 2025 में देहरादून स्थित इस फैक्ट्री में तैयार किया गया था।

हालांकि, FDA ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनके रिकॉर्ड में ऐसी किसी भी फैक्ट्री का आधिकारिक पंजीकरण नहीं है। इससे यह मामला और अधिक गंभीर हो गया है, क्योंकि अब यह जांच का विषय बन गया है कि यह यूनिट अवैध रूप से संचालित हो रही थी या नहीं।

NCB और अन्य एजेंसियां अब इस नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह मामला केवल स्थानीय स्तर का नहीं बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।

अधिकारियों का कहना है कि फैक्ट्री की वास्तविक स्थिति, इसके संचालन और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की विस्तृत जांच की जा रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस नेटवर्क के अन्य राज्यों या देशों से भी संबंध हैं।

इस मामले के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी और सख्त कर दी है और अवैध मादक पदार्थों के निर्माण और तस्करी पर रोक लगाने के लिए अभियान तेज कर दिया गया है।

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