
Uttarakhand उत्तराखंड : सहारनपुर में पाकिस्तान के गैंगस्टर के संपर्क में रहने वाले ढंडेरा निवासी मुशर्रफ की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर वर्ष 2016 की पुरानी आतंकी साजिश से जुड़ी घटनाएं चर्चा में आ गई हैं। हालिया गिरफ्तारी ने उस दौर की यादें ताजा कर दी हैं जब उत्तराखंड के हरिद्वार क्षेत्र में अर्धकुंभ के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की थी।
वर्ष 2016 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने लंढौरा क्षेत्र में छापा मारकर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उस समय आरोप था कि ये लोग प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हुए हैं और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल थे। कई दिनों तक रुड़की और आसपास के इलाकों में लगातार छापेमारी की गई थी, जिसके बाद यह गिरफ्तारी संभव हो सकी थी।
उस समय पकड़े गए आरोपियों की पहचान लंढौरा और जौरासी गांव के रहने वाले अखलाक, मेहराज, अजीम और ओसमा के रूप में हुई थी। जांच के दौरान पुलिस को इनकी गतिविधियों से जुड़े कई अहम सुराग मिले थे, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की गई थी।
Delhi Police Special Cell ने जांच के दौरान खुलासा किया था कि आरोपियों की निशानदेही पर जौरासी गांव के जंगल क्षेत्र में विस्फोटक सामग्री यानी बारूद बरामद किया गया था। यह बरामदगी मामले को और गंभीर बना देती है क्योंकि इससे यह संकेत मिला था कि वहां किसी तरह के विस्फोटक तैयार किए जा रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया था कि आरोपी एक ट्यूबवेल की छत पर बम बनाने जैसी गतिविधियों को अंजाम देते थे। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह स्थान इसलिए चुना गया था ताकि गतिविधियों पर आसानी से नजर न पड़े और उन्हें छिपाकर काम किया जा सके।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह था कि आरोपी जब ट्रेन गुजरती थी, उसी समय बम के परीक्षण का अभ्यास करते थे। उनका मानना था कि ट्रेन की तेज आवाज के कारण विस्फोट की आवाज दब जाएगी और किसी को शक नहीं होगा। यह तरीका सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी बेहद गंभीर और खतरनाक माना गया था।
वर्तमान में सहारनपुर में हुई गिरफ्तारी ने एक बार फिर इस पूरे नेटवर्क और पुराने मामलों की ओर ध्यान खींचा है। सुरक्षा एजेंसियां अब इन घटनाओं के बीच किसी संभावित संबंध की भी जांच कर रही हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी नए लिंक की पुष्टि नहीं की गई है।
स्थानीय स्तर पर भी इस गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में लगातार निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई की जाती है ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।
फिलहाल पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां दोनों मामलों की अलग-अलग जांच कर रही हैं, लेकिन 2016 की यह घटना एक बार फिर चर्चा में आ गई है और क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।





