चढ़ावे की चोरी मामले में आरोपी का कबूलनामा, फोरेंसिक जांच रिपोर्ट पर टिकी नजरें

गोपेश्वर: बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में जांच लगातार तेज होती जा रही है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) अब सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि फोरेंसिक जांच के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट से इस पूरे मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
जानकारी के मुताबिक, बदरीनाथ मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर को तकनीकी जांच के लिए देहरादून स्थित फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजा गया है। विशेषज्ञ डीवीआर की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कैमरों की रिकॉर्डिंग में किसी तरह की छेड़छाड़ की गई है या नहीं। इसके अलावा जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित चोरी की घटना के समय कौन-कौन लोग मंदिर परिसर और संबंधित स्थानों पर मौजूद थे।
एसआईटी अधिकारियों का मानना है कि सीसीटीवी फुटेज इस मामले में सबसे अहम सबूत साबित हो सकते हैं। डीवीआर रिपोर्ट मिलने के बाद जांच की दिशा और स्पष्ट होने की उम्मीद है। जांच टीम इससे जुड़े लोगों की गतिविधियों और घटनाक्रम की पूरी कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही है।
वहीं, गढ़वाल मंडल आयुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय जांच समिति भी मामले की पड़ताल कर रही है। समिति ने जांच को आगे बढ़ाते हुए बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के कर्मचारियों से पूछताछ की प्रक्रिया शुरू कर दी है। समिति ने बीकेटीसी के दो लेखाकर्मियों और तोसाखना (कोषागार) से जुड़े कर्मचारियों को देहरादून तलब किया है।
जांच समिति इन कर्मचारियों से चढ़ावे से संबंधित रिकॉर्ड, हिसाब-किताब और अन्य दस्तावेजों के बारे में जानकारी जुटाएगी। अधिकारियों का कहना है कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे की प्रक्रिया, उसके रखरखाव और रिकॉर्ड से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।
बदरीनाथ धाम देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर में आने वाला चढ़ावा और उससे जुड़ी व्यवस्थाएं बेहद संवेदनशील मानी जाती हैं। ऐसे में कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद प्रशासन और मंदिर समिति ने इसे गंभीरता से लिया है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या चढ़ावे की सुरक्षा व्यवस्था में कोई लापरवाही हुई थी या फिर किसी सुनियोजित तरीके से गड़बड़ी की गई। इसके लिए मंदिर समिति के रिकॉर्ड, कर्मचारियों की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मामले में कौन-कौन लोग शामिल हैं और घटना किस तरह अंजाम दी गई। फिलहाल एसआईटी और जांच समिति दोनों अपने-अपने स्तर पर साक्ष्य जुटाने में लगी हुई हैं। डीवीआर रिपोर्ट और कर्मचारियों से होने वाली पूछताछ को इस जांच में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके।





