उत्तराखंड

खटीमा छात्रसंघ चुनाव में ABVP की जीत, धामी की कर्मभूमि में भाजपा खेमे को मिली नई बढ़त

Kavita2
30 Sept 2026 1:50 PM IST
खटीमा छात्रसंघ चुनाव में ABVP की जीत, धामी की कर्मभूमि में भाजपा खेमे को मिली नई बढ़त
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खटीमा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कर्मभूमि खटीमा में छात्रसंघ चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है। हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के धीरज सिंह कन्याल ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। उपलब्ध परिणामों के अनुसार उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 398 मतों के अंतर से हराया।

खटीमा में 29 सितंबर को छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान हुआ था। अध्यक्ष पद पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और एनएसयूआई के प्रत्याशियों के बीच सीधा मुकाबला था। चुनाव से पहले कॉलेज में विभिन्न पदों के लिए 51 नामांकन पत्र खरीदे गए थे, जिससे छात्र राजनीति में सक्रियता साफ दिखाई दी।

मतदान के दौरान कॉलेज परिसर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी की गई थी। छात्रसंघ चुनाव में करीब 46 प्रतिशत मतदान दर्ज होने की जानकारी सामने आई। अध्यक्ष पद के लिए एबीवीपी और एनएसयूआई के बीच मुकाबले को सबसे अधिक चर्चा मिली।

खटीमा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का गृह नगर है और उनकी राजनीतिक पहचान भी लंबे समय से इस क्षेत्र से जुड़ी रही है। मुख्यमंत्री की आधिकारिक प्रोफाइल में भी उनका गृह नगर खटीमा, ऊधम सिंह नगर दर्ज है।

छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी की जीत को भाजपा समर्थक खेमे के लिए उत्साह बढ़ाने वाले नतीजे के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि छात्रसंघ चुनाव स्थानीय निकाय, विधानसभा या लोकसभा चुनाव से अलग प्रकृति के होते हैं और इसके नतीजों को सीधे किसी बड़े चुनाव का संकेत मानना उचित नहीं होगा।

फिर भी खटीमा में हुए इस चुनाव का राजनीतिक महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि पिछले कुछ समय से नगर निकाय, सहकारिता और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के नतीजों को भी स्थानीय राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जाता रहा है। अब छात्रसंघ अध्यक्ष पद पर एबीवीपी की जीत ने क्षेत्र में भाजपा समर्थक संगठनों को एक और राजनीतिक उपलब्धि दी है।

मुख्यमंत्री धामी लगातार खटीमा के विकास से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय रहे हैं। पिछले महीने उन्होंने खटीमा में छात्र-छात्राओं के साथ ‘युवा समकालिक संवाद’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया था, जिसमें 18 विद्यालयों के करीब 360 विद्यार्थियों से संवाद किया गया।

धामी की सरकार की ओर से खटीमा और आसपास के क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर भी लगातार जोर दिया जाता रहा है। स्थानीय स्तर पर भाजपा इन विकास कार्यों को अपने राजनीतिक संदेश का हिस्सा बनाती रही है।

छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी की जीत को लेकर संगठन के कार्यकर्ताओं में उत्साह है। चुनाव परिणाम आने के बाद समर्थकों ने इसे छात्रों के बीच संगठन के काम और सक्रियता का परिणाम बताया।

वहीं इस चुनाव में एनएसयूआई ने भी मजबूत मुकाबला किया। अध्यक्ष पद पर दोनों प्रमुख छात्र संगठनों के बीच सीधी टक्कर ने साफ किया कि खटीमा की छात्र राजनीति में मुकाबला अभी भी प्रतिस्पर्धी बना हुआ है।

प्रदेश स्तर पर भी छात्रसंघ चुनावों की तस्वीर एकतरफा नहीं रही। उत्तराखंड के अलग-अलग कॉलेजों में कहीं एबीवीपी, कहीं एनएसयूआई और कहीं निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। कई कॉलेजों में एबीवीपी को सफलता मिली, जबकि कुछ परिसरों में एनएसयूआई ने अध्यक्ष समेत महत्वपूर्ण पदों पर जीत हासिल की।

इस लिहाज से खटीमा में एबीवीपी की जीत को स्थानीय नतीजे के तौर पर देखना अधिक उचित होगा। इसका राजनीतिक महत्व जरूर है, लेकिन प्रदेश की पूरी छात्र राजनीति का रुझान केवल इस नतीजे से तय नहीं किया जा सकता।

खटीमा में मुख्यमंत्री धामी की राजनीतिक सक्रियता पहले से ही अधिक रही है। वह यहां लगातार सामाजिक, शैक्षणिक और विकास कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उनकी मौजूदगी भाजपा संगठन के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

पिछले कुछ वर्षों में भाजपा ने खटीमा में अपने संगठन को मजबूत करने के लिए बूथ और वार्ड स्तर पर गतिविधियां बढ़ाई हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं का दावा है कि इसका असर अलग-अलग चुनावों में दिखाई दे रहा है। विपक्ष हालांकि इन नतीजों को स्थानीय परिस्थितियों और उम्मीदवारों के प्रभाव से जोड़ता है।

छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी की जीत के बाद अब कॉलेज में छात्र हित, शैक्षणिक सुविधाएं, पुस्तकालय, खेल, रोजगार मार्गदर्शन और परिसर से जुड़े मुद्दों पर नए पदाधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

एबीवीपी के विजयी अध्यक्ष धीरज सिंह कन्याल के सामने अब चुनावी वादों को जमीन पर उतारने की चुनौती होगी। छात्रसंघ का काम कॉलेज प्रशासन और छात्रों के बीच संवाद कायम रखना और विद्यार्थियों की समस्याओं को उठाना होता है।

खटीमा का यह चुनाव इसलिए भी दिलचस्प रहा क्योंकि यहां अध्यक्ष पद पर मुकाबला सीधे एबीवीपी और एनएसयूआई के बीच रहा। इसने छात्र राजनीति को व्यापक राजनीतिक चर्चा से भी जोड़ दिया।

फिलहाल छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी की जीत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कर्मभूमि खटीमा में भाजपा समर्थक खेमे को एक और राजनीतिक उपलब्धि दी है। हालांकि इसका वास्तविक असर और महत्व आने वाले स्थानीय तथा बड़े चुनावों के परिणामों से ही बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।

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