उत्तराखंड

उत्तराखंड में SIR के बाद भी चलेगा विशेष मतदाता पुनरीक्षण अभियान

Kavita2
23 Oct 2026 9:52 AM IST
उत्तराखंड में SIR के बाद भी चलेगा विशेष मतदाता पुनरीक्षण अभियान
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देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी नए मतदाताओं को जोड़ने और छूटे हुए पात्र नागरिकों के नाम शामिल करने का अभियान जारी है। राज्य में 12 से 20 अक्टूबर तक चलाए गए विशेष अभियान के दौरान एक लाख से अधिक लोगों की ओर से मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही राज्य में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) अभियान चलाए जाने की भी चर्चा है। निर्वाचन विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाए। हालांकि, अक्टूबर के विशेष अभियान में प्राप्त आवेदनों की अंतिम आधिकारिक संख्या और अलग एसएसआर कार्यक्रम की तारीखों की पुष्टि होना बाकी है।

एसआईआर के बाद भी मतदाता सूची में जुड़ेंगे नए नाम

उत्तराखंड में भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया गया था। इस दौरान मतदाता सूची में दर्ज नामों का सत्यापन किया गया और अपात्र, स्थानांतरित तथा अन्य श्रेणियों के मतदाताओं की पहचान की गई।

तीन अक्टूबर 2026 को एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। इसमें राज्य में कुल 71 लाख 58 हजार 949 मतदाता दर्ज किए गए थे।

एसआईआर शुरू होने से पहले की तुलना में मतदाताओं की संख्या में करीब आठ लाख की कमी दर्ज की गई। इसी के बाद निर्वाचन विभाग ने ऐसे लोगों की पहचान करने का अभियान शुरू किया, जिनके नाम पहले की मतदाता सूची में थे, लेकिन नई सूची में शामिल नहीं हो पाए।

12 से 20 अक्टूबर तक चला घर-घर सत्यापन अभियान

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने छूटे हुए मतदाताओं की पहचान के लिए अक्टूबर में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया था।

इसके तहत आठ से दस अक्टूबर तक राज्य के 12,543 मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर आयोजित करने की व्यवस्था की गई। इन शिविरों में बूथ लेवल अधिकारियों और अन्य संबंधित कर्मचारियों को मतदाता सूची के सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई।

इसके बाद 12 से 20 अक्टूबर के बीच बूथ लेवल अधिकारियों को घर-घर जाकर पात्र नागरिकों की पहचान करने और आवश्यकतानुसार फॉर्म-6 भरवाने के निर्देश दिए गए।

इस अभियान में उन लोगों पर विशेष ध्यान दिया गया, जिनका नाम एसआईआर से पहले की मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन अंतिम सूची से गायब हो गया था।

एक लाख से ज्यादा लोगों ने मतदाता बनने के लिए किया आवेदन

विशेष अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 12 से 20 अक्टूबर के बीच एक लाख से अधिक लोगों ने फॉर्म-6 के माध्यम से मतदाता बनने की प्रक्रिया में भाग लिया।

इनमें ऐसे नागरिक शामिल हो सकते हैं, जिनके नाम एसआईआर के दौरान सूची से छूट गए थे। इसके अलावा पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं को भी अभियान में शामिल किया गया।

हालांकि, फॉर्म-6 भरने का अर्थ यह नहीं है कि सभी आवेदकों के नाम तत्काल मतदाता सूची में जुड़ जाएंगे। प्रत्येक आवेदन की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जांच और स्वीकृति आवश्यक होगी।

आठ लाख से अधिक मतदाताओं की पहचान बनी चुनौती

एसआईआर के दौरान उत्तराखंड में 8 लाख 26 हजार 977 मतदाताओं को एएसडीडी श्रेणी में चिह्नित किया गया था। इसमें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहराव जैसी परिस्थितियों से जुड़े मतदाता शामिल थे।

इनमें सबसे अधिक 1 लाख 86 हजार 8 मामले देहरादून जिले में सामने आए। इसके बाद ऊधम सिंह नगर में 1 लाख 77 हजार 673 और हरिद्वार में 1 लाख 30 हजार 203 मतदाता इस श्रेणी में दर्ज किए गए।

इसके अतिरिक्त अल्मोड़ा, पौड़ी गढ़वाल और टिहरी गढ़वाल में भी बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए।

निर्वाचन विभाग ने निर्देश दिया कि पुराने और नए मतदाता रिकॉर्ड का मिलान कर वास्तविक स्थिति की जांच की जाए, ताकि पात्र नागरिकों के नाम दोबारा शामिल किए जा सकें।

पहली बार वोट डालने वाले युवाओं पर विशेष ध्यान

राज्य में चलाए गए अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य नए मतदाताओं को जोड़ना भी है।

निर्वाचन विभाग ने उन युवाओं की पहचान करने के निर्देश दिए थे, जिन्होंने एक अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली थी और मतदाता बनने के पात्र हो गए थे।

ऐसे युवाओं को फॉर्म-6 भरने के लिए प्रेरित किया गया। बूथ लेवल अधिकारियों को आवेदन प्रक्रिया में सहायता देने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।

इससे पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलेगा।

राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की भी भागीदारी

मतदाता सूची के विशेष सत्यापन अभियान में राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों को भी शामिल करने की व्यवस्था की गई थी।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के अनुसार, बूथ लेवल अधिकारियों को पुरानी और नई मतदाता सूची का मिलान करने तथा छूटे हुए लोगों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए थे।

इस सूची को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों के साथ साझा करने की व्यवस्था भी की गई।

फॉर्म-6 प्राप्त होने के बाद बूथ लेवल अधिकारी अपनी सत्यापन रिपोर्ट के साथ आवेदन संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी को भेजेंगे।

इसके बाद नियमानुसार आवेदन पर निर्णय लिया जाएगा।

एसआईआर और एसएसआर में क्या है अंतर?

एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण में मतदाता सूची का व्यापक सत्यापन किया जाता है। इसके तहत मतदाताओं की पात्रता और सूची की शुद्धता की विस्तृत जांच होती है।

वहीं एसएसआर यानी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के दौरान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने, गलत प्रविष्टियों में सुधार और आवश्यकतानुसार नाम हटाने की प्रक्रिया संचालित की जाती है।

दोनों प्रक्रियाओं का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है।

विशेष अभियान में प्राप्त आवेदनों के निस्तारण के साथ अलग एसएसआर कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा होने पर उसके तहत आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी।

2027 विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण अभियान

उत्तराखंड में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र नागरिकों के नाम दर्ज होना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक दलों के लिए भी यह अभियान अहम है, क्योंकि मतदाता सूची में किसी पात्र नागरिक का नाम छूटने से वह चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।

निर्वाचन विभाग का प्रयास है कि मतदान से पहले मतदाता सूची में आवश्यक सुधार किए जा सकें।

अब विशेष अभियान के दौरान प्राप्त फॉर्म-6 के सत्यापन और स्वीकृति की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। इससे यह स्पष्ट होगा कि एक लाख से अधिक आवेदनों में से कितने लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाते हैं।

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