
हल्द्वानी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सैनिक कभी ‘पूर्व’ या ‘भूतपूर्व’ नहीं होता, बल्कि वह जीवनभर सैनिक रहता है। वर्दी उतरने के बाद भी उसके भीतर देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना उसी तरह जीवंत रहती है। सैनिकों के सम्मान और उनके परिवारों के कल्याण को सरकार का परम कर्तव्य बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के जवानों ने अपना आज राष्ट्र के सुरक्षित भविष्य के लिए समर्पित किया है। उनके त्याग और बलिदान का ऋण कोई सरकार नहीं चुका सकती, लेकिन सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी निभाना सरकार का दायित्व है।
मुख्यमंत्री बुधवार को हल्द्वानी में आयोजित गौरव सेनानी मिलन समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में उन्होंने पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के योगदान को याद करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा में सैनिकों की भूमिका केवल सीमा पर तैनाती तक सीमित नहीं है। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनके अनुभव, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहते हैं।
उत्तराखंड देवभूमि के साथ वीरभूमि भी
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड को आमतौर पर देवभूमि के नाम से जाना जाता है, लेकिन यह प्रदेश वीरभूमि भी है। राज्य की धरती ने देश को ऐसे वीर सपूत दिए हैं, जिन्होंने सैन्य सेवा और राष्ट्ररक्षा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने दरबान सिंह नेगी, गबर सिंह नेगी, जनरल बीसी जोशी और जनरल बिपिन रावत जैसे वीरों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महान सैनिकों की वीरता और राष्ट्रसेवा उत्तराखंड की गौरवशाली सैन्य परंपरा का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों के लिए सेना केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा और गौरव से जुड़ा विषय है। राज्य के अनेक परिवारों की पीढ़ियां सेना और अन्य सुरक्षा बलों में सेवा देती रही हैं।
हर दूसरे परिवार का सेना से जुड़ाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में लगभग हर दूसरे परिवार का सेना, पुलिस या सशस्त्र बलों से किसी न किसी रूप में जुड़ाव है। प्रदेश के युवाओं में सैन्य सेवा के प्रति विशेष आकर्षण और राष्ट्रसेवा की भावना दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि सैनिकों के साथ राज्य के सामाजिक संबंध इतने गहरे हैं कि किसी एक जवान की सेवा और बलिदान का प्रभाव पूरे परिवार और समुदाय तक पहुंचता है। यही कारण है कि सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याण की जिम्मेदारी उत्तराखंड सरकार के लिए और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों के परिवारों ने भी देश की सुरक्षा में अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी भूमिका निभाई है। जब कोई जवान लंबे समय तक सीमा पर तैनात रहता है, तो उसके परिवार को कई तरह की जिम्मेदारियां स्वयं निभानी पड़ती हैं। इसलिए सैनिकों के साथ उनके परिवारों का सम्मान और सहयोग भी जरूरी है।
त्याग और बलिदान को किया नमन
गौरव सेनानी मिलन समारोह में मुख्यमंत्री ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले जवानों के त्याग और बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि सैनिकों ने अपने वर्तमान को देश के सुरक्षित भविष्य के लिए समर्पित किया है।
उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा केवल हथियारों और सैन्य शक्ति से सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि उसके पीछे सैनिकों का साहस, अनुशासन, समर्पण और बलिदान होता है। देश के नागरिक सुरक्षित जीवन जी सकें, इसके लिए जवान कठिन परिस्थितियों में सीमा पर डटे रहते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों के बलिदान का कोई आर्थिक मूल्य निर्धारित नहीं किया जा सकता। सरकार उनके प्रति सम्मान व्यक्त कर सकती है और उनके परिवारों के हित में काम कर सकती है, लेकिन उनके त्याग की वास्तविक कीमत चुकाना संभव नहीं है।
पूर्व सैनिकों के अनुभव समाज के लिए महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री ने कहा कि सेना से सेवानिवृत्ति के बाद सैनिक का जीवन समाप्त नहीं होता। वर्दी उतरने के बाद भी उसके भीतर अनुशासन, कर्तव्यबोध और राष्ट्रसेवा की भावना बनी रहती है।
पूर्व सैनिकों के पास प्रशासन, आपदा प्रबंधन, अनुशासन, नेतृत्व और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने का व्यापक अनुभव होता है। इन अनुभवों का उपयोग समाज और राज्य के विकास में किया जा सकता है।
उन्होंने गौरव सेनानियों से युवाओं को प्रेरित करने और नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सैनिकों की जीवन यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।
सैनिक परिवारों के कल्याण पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य को लेकर प्रतिबद्ध है। सैनिक परिवारों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ समझना और उनका समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि सैनिकों के परिवारों को यह भरोसा होना चाहिए कि देश और राज्य उनके साथ खड़ा है। किसी सैनिक के बलिदान के बाद उसके परिवार की जिम्मेदारी केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज और सरकार की भी है।
सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाने की जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की सैन्य परंपरा सदियों से गौरवशाली रही है। प्रदेश के युवाओं ने देश की सीमाओं की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं को देशसेवा के लिए प्रेरित करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सैनिकों के सम्मान के कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजन नहीं होने चाहिए, बल्कि इनके माध्यम से नई पीढ़ी को सेना और राष्ट्रसेवा के महत्व की जानकारी भी मिलनी चाहिए।
सैनिक सम्मान समाज की जिम्मेदारी
गौरव सेनानी मिलन समारोह में मुख्यमंत्री का संदेश स्पष्ट रहा कि सैनिक का सम्मान केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। सैनिक अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा देश की सुरक्षा में लगा देता है और उसके परिवार को भी इस सेवा की कीमत चुकानी पड़ती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान देवभूमि के साथ वीरभूमि के रूप में भी है और राज्य के वीर सैनिकों की परंपरा पर प्रत्येक उत्तराखंडी को गर्व है।
उन्होंने सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को सम्मान देते हुए कहा कि देश की सुरक्षा में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। सैनिक के लिए वर्दी भले ही उतर जाए, लेकिन राष्ट्र के प्रति उसका कर्तव्य और देशभक्ति जीवनभर कायम रहती है। यही भावना सैनिक को समाज में भी एक प्रेरणास्रोत बनाती है।





