
देहरादून। तेज आवाज वाले प्रेशर हॉर्न लगाकर सड़कों पर वाहन चलाने वालों के खिलाफ परिवहन विभाग अब सख्ती बढ़ाने की तैयारी में है। युवाओं और अन्य वाहन चालकों के बीच वाहनों को अलग अंदाज देने और सड़क पर अपनी मौजूदगी का अहसास कराने के लिए प्रेशर हॉर्न लगाने का चलन बढ़ रहा है। बाजारों, भीड़भाड़ वाले इलाकों और आबादी के बीच इनका इस्तेमाल लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। इसे देखते हुए परिवहन विभाग ने कार्रवाई कड़ी करने का निर्णय लिया है।
नई व्यवस्था के तहत प्रेशर हॉर्न लगा वाहन पहली बार पकड़े जाने पर वाहन चालक या स्वामी को चेतावनी दी जाएगी। इसके बावजूद दोबारा उसी वाहन में प्रेशर हॉर्न पाया गया तो 10 हजार रुपये का चालान किया जाएगा। अभी ऐसे मामलों में दो हजार रुपये के चालान का प्रावधान है।
दूसरी बार गलती पर 10 हजार का चालान
परिवहन विभाग का उद्देश्य केवल चालान करना नहीं, बल्कि वाहन चालकों को प्रेशर हॉर्न के इस्तेमाल से रोकना है। इसी वजह से पहली बार पकड़े जाने पर चेतावनी देने की व्यवस्था रखी गई है।
पहली कार्रवाई के बाद भी यदि वाहन चालक नियमों की अनदेखी करता है और दोबारा प्रेशर हॉर्न के साथ पकड़ा जाता है तो उसे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। दूसरी बार पकड़े जाने पर सीधे 10 हजार रुपये का चालान किया जाएगा।
इससे स्पष्ट है कि बार-बार नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के प्रति विभाग अब नरमी बरतने के मूड में नहीं है।
अभी दो हजार रुपये का प्रावधान
वर्तमान व्यवस्था में प्रेशर हॉर्न के इस्तेमाल पर दो हजार रुपये के चालान का प्रावधान है। इसके बावजूद सड़कों पर ऐसे हॉर्न का इस्तेमाल पूरी तरह बंद नहीं हो पाया है।
कई वाहन चालक चालान के बाद भी प्रेशर हॉर्न नहीं हटाते या कुछ समय बाद दोबारा लगवा लेते हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए जुर्माने की राशि बढ़ाकर 10 हजार रुपये करने की तैयारी की गई है।
युवाओं में बढ़ रहा प्रेशर हॉर्न का चलन
वाहनों को मॉडिफाई कराने के साथ तेज आवाज वाले हॉर्न लगवाने का चलन विशेष रूप से युवाओं में देखने को मिल रहा है। कुछ वाहन चालक इसे वाहन की अलग पहचान या स्टाइल का हिस्सा मानते हैं।
सड़क पर चलते समय अचानक तेज हॉर्न बजाकर लोगों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश भी की जाती है। समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब इन हॉर्न का इस्तेमाल बाजार, स्कूल, अस्पताल और घनी आबादी वाले इलाकों में किया जाता है।
ध्वनि प्रदूषण की बड़ी वजह
प्रेशर हॉर्न सामान्य वाहन हॉर्न की तुलना में काफी तेज आवाज पैदा कर सकते हैं। इनका अनावश्यक इस्तेमाल ध्वनि प्रदूषण को बढ़ाता है।
भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में पहले ही वाहनों की आवाज, ट्रैफिक और सामान्य हॉर्न के कारण शोर अधिक रहता है। ऐसे में प्रेशर हॉर्न अतिरिक्त परेशानी पैदा करते हैं।
लगातार तेज आवाज के संपर्क में रहना लोगों के लिए असुविधाजनक हो सकता है। इसी कारण परिवहन विभाग ऐसे उपकरणों के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावी बनाने पर जोर दे रहा है।
बुजुर्गों और मरीजों को ज्यादा परेशानी
अचानक बजने वाला तेज प्रेशर हॉर्न राहगीरों को चौंका सकता है। बुजुर्गों, छोटे बच्चों और बीमार लोगों के लिए ऐसी तेज आवाज विशेष रूप से परेशानी का कारण बनती है।
अस्पतालों और आवासीय क्षेत्रों के आसपास अनावश्यक हॉर्न का इस्तेमाल स्थिति को और गंभीर बना देता है। इसलिए वाहन चालकों से अपेक्षा की जाती है कि वे जरूरत के अनुसार ही हॉर्न का प्रयोग करें और प्रतिबंधित या अत्यधिक तेज आवाज वाले उपकरण न लगाएं।
बाजारों में बढ़ती है समस्या
शहरों के व्यस्त बाजारों में पैदल चलने वालों के साथ दोपहिया, कार, ऑटो और अन्य वाहनों की संख्या अधिक होती है। ऐसे क्षेत्रों में प्रेशर हॉर्न बजाने से आसपास मौजूद लोग अचानक घबरा सकते हैं।
भीड़ के बीच तेज हॉर्न का लगातार इस्तेमाल केवल ध्वनि प्रदूषण ही नहीं बढ़ाता, बल्कि सड़क पर असहज स्थिति भी पैदा कर सकता है। विभाग की सख्ती का फोकस ऐसे ही मामलों पर रहने की संभावना है।
वाहन मालिक की भी तय होगी जिम्मेदारी
कार्रवाई में वाहन चलाने वाले व्यक्ति के साथ वाहन स्वामी की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण होगी। यदि वाहन में नियमों के विपरीत प्रेशर हॉर्न लगाया गया है तो वाहन मालिक को इसे हटवाना होगा।
पहली बार चेतावनी मिलने के बाद वाहन स्वामी को यह सुनिश्चित करना होगा कि वाहन से प्रेशर हॉर्न हटा दिया जाए। दोबारा पकड़े जाने की स्थिति में 10 हजार रुपये का चालान आर्थिक रूप से भारी पड़ सकता है।
पहली चेतावनी को गंभीरता से लेना होगा
नई व्यवस्था में पहली बार चेतावनी दिए जाने का उद्देश्य वाहन चालकों को गलती सुधारने का अवसर देना है। चालक उसी समय प्रेशर हॉर्न हटवा लेता है तो वह आगे की भारी कार्रवाई से बच सकता है।
लेकिन चेतावनी के बावजूद नियम तोड़ना जारी रखने पर जुर्माने में बड़ी बढ़ोतरी होगी। दो हजार रुपये की मौजूदा राशि की तुलना में 10 हजार रुपये का प्रस्तावित चालान पांच गुना अधिक है।
दुकानदारों पर भी रह सकती है नजर
प्रेशर हॉर्न वाहनों में लगाए जाने से पहले बाजार में आसानी से उपलब्ध होते हैं। इसलिए नियमों को प्रभावी बनाने के लिए केवल सड़क पर जांच पर्याप्त नहीं होती। ऐसे उपकरणों की बिक्री और फिटिंग से जुड़े नियमों का पालन भी जरूरी है।
वाहन मालिकों को भी किसी मॉडिफिकेशन से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह यातायात और परिवहन नियमों के अनुरूप हो।
सड़कों पर अनुशासन बढ़ाने की कोशिश
परिवहन विभाग की इस सख्ती को सड़क अनुशासन और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण से जोड़कर देखा जा रहा है। हॉर्न का उद्देश्य सड़क पर जरूरत पड़ने पर दूसरे वाहन या व्यक्ति को सतर्क करना है, न कि अनावश्यक रूप से तेज आवाज पैदा करना।
यदि वाहन चालक हॉर्न का सीमित और जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें तो शहरों में ध्वनि प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है।
चेतावनी के बाद नहीं मिलेगा दूसरा मौका
प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पहली बार पकड़े जाने पर मिलने वाली चेतावनी को हल्के में लेना अब महंगा पड़ सकता है।
पहली कार्रवाई के बाद वाहन से प्रेशर हॉर्न नहीं हटाया गया और वह दोबारा जांच में पकड़ा गया तो वाहन स्वामी को 10 हजार रुपये का चालान भुगतना पड़ेगा। परिवहन विभाग की इस सख्ती का उद्देश्य नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वालों पर अंकुश लगाना और आम लोगों को तेज हॉर्न से होने वाली परेशानी से राहत दिलाना है।





