उत्तराखंड

जनता के बजाय सरकार की छवि चमकाने के लिए बजट : यशपाल आर्य

Admindelhi1
28 Oct 2026 4:53 PM IST
जनता के बजाय सरकार की छवि चमकाने के लिए बजट : यशपाल आर्य
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चुनावी फायदे के लिए लाया गया अनुपूरक बजट : यशपाल आर्य

देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मंगलवार को सदन में पेश 7,844 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट को चुनावी बजट करार देते हुए आरोप लगाया कि सरकार जनता की जरूरतों के बजाय अपना प्रचार करने और चुनावी साल में अपनी छवि चमकाने पर ध्यान दे रही है।

आर्य ने कहा कि राज्य आपदा, पलायन और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन सरकार की प्राथमिकताओं में मुख्यमंत्री की घोषणाएं और युवाओं को आकर्षित करने वाली योजनाएं शामिल हैं। उन्होंने अनुपूरक बजट में विभिन्न मदों के लिए किए गए प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आपदा सुरक्षा, रोजगार और जनकल्याण के कार्यों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी गई है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सूचना विभाग को विज्ञापन के लिए 125 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए जा रहे हैं। इससे विभाग का बजट 549.68 करोड़ रुपये से बढ़कर 675.13 करोड़ रुपये हो जाएगा। उन्होंने दावा किया कि धामी सरकार पिछले पांच वर्षों में विज्ञापनों पर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुकी है और वित्त वर्ष 2024-25 में ही 290 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उन्होंने मीडिया सलाहकार समिति के गठन के लिए 45 लाख रुपये के अतिरिक्त प्रावधान पर भी सवाल उठाए।

आर्य ने आरोप लगाया कि चुनावी वर्ष में सरकारी धन का इस्तेमाल सरकार की छवि चमकाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने पिछले पांच वर्षों के विज्ञापन खर्च का ब्योरा सार्वजनिक करने के लिए श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। इसमें विभिन्न मीडिया माध्यमों को दिए गए विज्ञापनों की राशि का विवरण शामिल करने को कहा।

आर्य ने माध्यमिक और उच्च शिक्षा में डिजिटल लर्निंग के तहत टैबलेट के लिए 200 करोड़ रुपये के प्रावधान पर कहा कि सरकार युवाओं की वास्तविक समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों तथा बेरोजगारी के खिलाफ युवाओं के आंदोलनों के बाद सरकार चुनाव से पहले टैबलेट बांटने की योजना ला रही है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और स्थायी रोजगार चाहता है, न कि केवल टैबलेट। आर्य ने यह भी कहा कि इसी अनुपूरक बजट में राजकीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए केवल 5.76 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने सरकार से पिछले पांच वर्षों में ई-लर्निंग पर खर्च की गई राशि और उसके परिणामों का ब्योरा देने की मांग की।

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री की घोषणाओं के लिए 100 करोड़ रुपये के एकमुश्त अनुदान के अतिरिक्त प्रावधान पर सवाल उठाते हुए कहा कि मूल बजट में भी इस मद के लिए 100 करोड़ रुपये रखे गए थे। इस तरह सात महीने के भीतर कुल 200 करोड़ रुपये का प्रावधान हो गया है, लेकिन इसमें किसी जिले, कार्य या परियोजना का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।

उन्होंने दावा किया कि इस मद से 25 करोड़ रुपये आकस्मिकता निधि से पहले ही निकाले जा चुके हैं। आर्य ने कहा कि सरकार ने आकस्मिकता निधि से करीब 190 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद अब सदन से मंजूरी मांगी है। उन्होंने इसे विधायी परंपराओं के विपरीत बताते हुए मुख्यमंत्री की घोषणाओं के लिए रखे गए 200 करोड़ रुपये की जिलेवार और कार्यवार सूची सदन के पटल पर रखने की मांग की।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश में आपदा और अन्य संकटों के बीच बजट में मानसून के दौरान बाढ़ सुरक्षा के लिए केवल 10 करोड़ रुपये तथा वनाग्नि की रोकथाम के लिए 7.07 करोड़ रुपये रखे गए हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित लोगों को मुआवजा देने के लिए भी केवल 3.20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं के लिए रखी गई राशि बाढ़ सुरक्षा, वनाग्नि रोकथाम, मानव-वन्यजीव संघर्ष, भोजन माताओं, विधवा पेंशन, किसान पेंशन और पुलों सहित सात मदों के कुल 84.27 करोड़ रुपये से भी अधिक है। उन्होंने सवाल किया कि जब राज्य को आपदा सुरक्षा और प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए अधिक संसाधनों की जरूरत है, तब प्रचार और घोषणाओं पर इतनी राशि क्यों खर्च की जा रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि से संबंधित व्यय में पर्यटन के नाम पर 75 करोड़ रुपये रखे जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि आपदा पीड़ितों के लिए उपलब्ध धनराशि का इस्तेमाल पर्यटन के लिए क्यों किया जा रहा है।

आर्य ने सरकार से प्रचार पर होने वाले खर्च में कटौती कर बाढ़ सुरक्षा, वनाग्नि रोकथाम और मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए अधिक धनराशि उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य के माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्यों और शिक्षकों की कमी है, लेकिन सरकार की प्राथमिकताएं कुछ और दिखाई दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार को विज्ञापन खर्च, ई-लर्निंग पर किए गए व्यय और मुख्यमंत्री की घोषणाओं के तहत प्रस्तावित कार्यों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सरकारी धन का उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।

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