उत्तराखंड

केदारताल में बर्फ के बीच फंसे 8 ट्रेकर्स, रेस्क्यू के लिए उतरी SDRF

Ratna Netam
1 Nov 2026 3:00 PM IST
केदारताल में बर्फ के बीच फंसे 8 ट्रेकर्स, रेस्क्यू के लिए उतरी SDRF
x
उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में मौसम की मार और हिमस्खलन के कारण केदारताल ट्रेक पर फंसे आठ लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), वन विभाग और ट्रेकिंग एजेंसी की टीमें संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्र में भारी बर्फबारी, खराब मौसम और रास्ते में हिमस्खलन के कारण बचाव दल को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने फंसे लोगों तक जल्द पहुंचने के लिए अतिरिक्त टीमें लगाई हैं। साथ ही मौसम अनुकूल होने पर हेलिकॉप्टर की मदद से हवाई रेस्क्यू करने की तैयारी भी की जा रही है।यह घटना गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के केदारताल ट्रेक की है। यहां 27 अक्टूबर को सात ट्रेकर्स और छह सहायक कर्मचारियों समेत कुल 13 लोगों का दल गंगोत्री से रवाना हुआ था। दल को 29 अक्टूबर तक वापस लौटना था, लेकिन अचानक मौसम बिगड़ने, भारी बर्फबारी और ग्लेशियर क्षेत्र में रास्ता बाधित होने के कारण सभी सदस्य तय समय पर वापस नहीं पहुंच सके। बाद में संपर्क होने पर पता चला कि दल के आठ सदस्य भोजखड़क से आगे फंसे हुए हैं।
चार लोगों को सुरक्षित निकाला गया
जिला प्रशासन के मुताबिक, ट्रेकिंग दल के फंसे होने की सूचना मिलने के बाद बचाव अभियान शुरू किया गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, दल में सात ट्रेकर्स और छह सपोर्ट स्टाफ शामिल थे। इनमें से एक कुक पहले ही गंगोत्री लौट आया था। इसके बाद बाकी सदस्यों की तलाश के लिए ट्रेकिंग एजेंसी ने अपने गाइड और पोर्टरों को भेजा।30 अक्टूबर को ट्रेकिंग एजेंसी के माध्यम से फोन पर दल से संपर्क स्थापित हुआ। फंसे लोगों ने बताया कि वे कच्ची ढांग के आसपास सुरक्षित हैं और उन्हें बाहर निकालने के लिए मदद की आवश्यकता है। इसके बाद स्थानीय स्तर पर रास्ता खोलने और बचाव दल को आगे बढ़ाने का प्रयास शुरू हुआ।इस दौरान कच्ची ढांग के आसपास तीन पोर्टर और एक कुक सहित चार लोगों को सुरक्षित खोज लिया गया। SDRF के जवानों, गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के कर्मचारियों और स्थानीय पोर्टरों की मदद से उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया। हालांकि, शेष आठ लोग भोजखड़क से आगे हिमस्खलन के कारण रास्ता बंद होने से फंसे हुए हैं।
SDRF और NDRF की टीमें दुर्गम रास्तों पर जुटीं
बचाव अभियान को गति देने के लिए प्रशासन ने अलग-अलग एजेंसियों की टीमें तैनात की हैं। शनिवार सुबह उत्तरकाशी से 10 सदस्यीय NDRF टीम को गंगोत्री के लिए रवाना किया गया। इसके अलावा SDRF के छह जवान, वन विभाग के दो कर्मचारी और ट्रेकिंग एजेंसी के सात सदस्य भी बचाव अभियान में शामिल हुए।ट्रेकिंग एजेंसी की ओर से भेजी गई गाइड और पोर्टरों की टीम ने शुक्रवार को करीब छह किलोमीटर तक रास्ता साफ करने और आगे बढ़ने का प्रयास किया था। हालांकि, बर्फ की मोटी परत और हिमस्खलन से बाधित रास्ते के कारण टीम को वापस लौटना पड़ा। अब SDRF और अन्य बचाव दल फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों के अनुसार, भोजखड़क से आगे हिमस्खलन के कारण रास्ता पूरी तरह प्रभावित हुआ है। ऐसे में बचावकर्मियों को सुरक्षित मार्ग तलाशने के साथ-साथ बर्फ हटाने और संभावित हिमस्खलन के खतरे का भी ध्यान रखना पड़ रहा है।
एक ट्रेकर के सिर में चोट, हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू की तैयारी
इस घटना में एक फंसे हुए व्यक्ति के सिर में चोट लगने की सूचना भी सामने आई है। ऐसे में प्रशासन की प्राथमिकता सभी लोगों तक पहुंचकर उनकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करना और जरूरत पड़ने पर तत्काल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराना है।प्रशासन ने हवाई बचाव अभियान की संभावना को देखते हुए हेलिकॉप्टर उपलब्ध कराने के लिए संबंधित विभागों और अधिकारियों से संपर्क किया है। प्रभावित क्षेत्र का हेलिकॉप्टर से हवाई निरीक्षण भी कराया गया है। फंसे हुए लोगों की ओर से भी हेलिकॉप्टर के जरिए बाहर निकालने का अनुरोध किया गया है।जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बचाव अभियान में शामिल सभी एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ काम करें। मौसम की स्थिति अनुकूल होने पर रविवार को हवाई रेस्क्यू का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, खराब मौसम और दृश्यता की स्थिति हेलिकॉप्टर संचालन में बड़ी बाधा बन सकती है। यदि हवाई बचाव संभव नहीं हुआ तो जमीन के रास्ते अभियान जारी रखा जाएगा।
भारी बर्फबारी बनी सबसे बड़ी चुनौती
केदारताल उत्तराखंड के लोकप्रिय लेकिन कठिन उच्च हिमालयी ट्रेकिंग स्थलों में शामिल है। यहां तक पहुंचने के लिए दुर्गम पहाड़ी रास्तों, खड़ी चढ़ाई और ग्लेशियर क्षेत्र से होकर गुजरना पड़ता है। समुद्र तल से लगभग 4,750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस क्षेत्र में मौसम तेजी से बदलता है। नवंबर की शुरुआत में बर्फबारी और कम तापमान के कारण ट्रेकिंग की परिस्थितियां और चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं।हिमस्खलन के बाद रास्ते पर बर्फ जमा होने से सामान्य आवाजाही प्रभावित हो गई है। बचाव दल के लिए यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि जिस रास्ते से वे आगे बढ़ें, वहां दोबारा हिमस्खलन का खतरा न हो। खराब मौसम के कारण बचावकर्मियों की सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई है।ऐसी परिस्थितियों में प्रशासन को जमीनी और हवाई दोनों विकल्पों पर काम करना पड़ रहा है। फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ उनके स्वास्थ्य और भोजन-पानी की उपलब्धता का आकलन भी किया जा रहा है।
प्रशासन की नजर, सुरक्षित वापसी पर टिकी उम्मीदें
उत्तरकाशी जिला प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को बचाव कार्य में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने और लगातार संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। वन विभाग, SDRF, NDRF और ट्रेकिंग एजेंसी के बीच समन्वय स्थापित कर अभियान चलाया जा रहा है।फिलहाल आठ लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना बचाव दल के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। चार लोगों को सुरक्षित निकाले जाने से अभियान में एक सफलता मिली है, लेकिन शेष लोगों तक पहुंचने के लिए मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों से जूझना पड़ रहा है।प्रशासन की कोशिश है कि मौसम में सुधार होते ही हेलिकॉप्टर की मदद से फंसे लोगों को निकाला जाए। वहीं, जमीनी टीमें भी रास्ता खोलकर उन तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। पूरे क्षेत्र में जारी बचाव अभियान के बीच सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आठों लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
Next Story