उत्तराखंड

उत्तराखंड में बनेंगी 8 नई भूकंप वेधशालाएं

Ashish verma
11 Oct 2026 8:14 PM IST
उत्तराखंड में बनेंगी 8 नई भूकंप वेधशालाएं
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देहरादून। भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में धरती के भीतर होने वाली हलचलों पर नजर रखने के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। केंद्र सरकार देशभर में भूकंप की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने के उद्देश्य से 100 नई भूकंप विज्ञान वेधशालाएं स्थापित करने जा रही है। इनमें से आठ वेधशालाएं उत्तराखंड में बनाई जाएंगी। इनकी स्थापना से प्रदेश में आने वाले कम तीव्रता के भूकंपों का भी पता लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
उत्तराखंड हिमालयी क्षेत्र में स्थित है, जहां भूगर्भीय हलचलें लगातार होती रहती हैं। इस कारण प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में समय-समय पर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। कम तीव्रता वाले भूकंपों की निगरानी और उनकी गतिविधियों का रिकॉर्ड तैयार करना आपदा प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। नई वेधशालाएं स्थापित होने से प्रदेश में भूकंप संबंधी गतिविधियों पर नजर रखने की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
प्रदेश में आठ स्थानों का किया गया चयन
उत्तराखंड में प्रस्तावित आठ भूकंप विज्ञान वेधशालाओं की स्थापना के लिए राज्य की ओर से आठ स्थलों का चयन किया गया है। इन स्थलों से संबंधित प्रस्ताव राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र को भेज दिया गया है। अब इन प्रस्तावों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
नई वेधशालाओं की स्थापना से प्रदेश में भूकंप की गतिविधियों को दर्ज करने के लिए निगरानी नेटवर्क का विस्तार होगा। इससे धरती के भीतर होने वाली हलचलों से संबंधित आंकड़े जुटाने में सहायता मिल सकती है।हालांकि, फिलहाल चयनित आठ स्थलों के नाम, वेधशालाओं के निर्माण की समयसीमा और इन्हें स्थापित करने की विस्तृत कार्ययोजना की जानकारी सामने नहीं आई है। इनका निर्माण कब शुरू होगा और कब तक सभी वेधशालाएं काम करना शुरू करेंगी, इस संबंध में भी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
कम तीव्रता वाले भूकंपों पर रहेगी नजर
भूकंप विज्ञान वेधशालाएं धरती में होने वाली हलचलों को दर्ज करने और भूकंप की गतिविधियों का अध्ययन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके माध्यम से भूकंप के झटकों की तीव्रता और उनसे संबंधित आंकड़े एकत्र किए जा सकते हैं।
उत्तराखंड जैसे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में कम तीव्रता वाले भूकंपों की निगरानी भी महत्वपूर्ण है। कई बार कम तीव्रता के झटके महसूस नहीं होते, लेकिन वैज्ञानिक उपकरणों के माध्यम से उन्हें दर्ज किया जा सकता है।
प्रदेश में आठ नई वेधशालाएं स्थापित होने से भूकंप संबंधी गतिविधियों को रिकॉर्ड करने के लिए निगरानी व्यवस्था का दायरा बढ़ेगा। इससे वैज्ञानिकों को क्षेत्र में होने वाली भूगर्भीय हलचलों के अध्ययन के लिए अतिरिक्त आंकड़े उपलब्ध हो सकते हैं।
हालांकि, भूकंप विज्ञान वेधशालाओं का मुख्य काम भूकंप की गतिविधियों को दर्ज करना और उनका अध्ययन करना है। इनकी स्थापना से भूकंप आने की सटीक तारीख और समय की भविष्यवाणी संभव होने का दावा नहीं किया जा सकता।
पिछले एक साल में 55 बार डोली धरती
उत्तराखंड में पिछले वर्ष 14 अक्टूबर से अब तक 55 बार भूकंप के झटके दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन भूकंपों की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2.2 से 4.9 के बीच रही।ये आंकड़े प्रदेश में होने वाली भूगर्भीय गतिविधियों की निगरानी की जरूरत को रेखांकित करते हैं। हिमालयी क्षेत्र में भूकंप की गतिविधियों पर लगातार नजर रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां की भौगोलिक परिस्थितियां और भूगर्भीय संरचना इसे भूकंप के लिहाज से संवेदनशील बनाती हैं।कम तीव्रता से लेकर अपेक्षाकृत अधिक तीव्रता वाले भूकंपों का रिकॉर्ड तैयार करने से वैज्ञानिकों को क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों को समझने में मदद मिलती है। ऐसे आंकड़े आपदा प्रबंधन से जुड़ी तैयारियों और जोखिम के आकलन के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं।
आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मिलेगा सहयोग
भूकंप के दौरान जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए निगरानी, समय पर सूचना और प्रभावी आपदा प्रबंधन व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। उत्तराखंड में नई वेधशालाओं की स्थापना से भूकंप संबंधी आंकड़ों को दर्ज करने की क्षमता बढ़ सकती है।भूकंप की गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध होने से संबंधित संस्थानों को क्षेत्र में होने वाली हलचलों का अध्ययन करने और जोखिम का आकलन करने में सहायता मिल सकती है। इसके साथ ही आपदा प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं को तैयार करने के लिए भी वैज्ञानिक आंकड़ों का उपयोग किया जा सकता है।
उत्तराखंड में भूकंप के खतरे को देखते हुए निगरानी तंत्र का विस्तार महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, भूकंप से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए निगरानी व्यवस्था के साथ भवनों की सुरक्षा, जनजागरूकता और आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया की तैयारी भी आवश्यक होती है।
देशभर में स्थापित होंगी 100 नई वेधशालाएं
केंद्र सरकार की योजना के तहत देशभर में 100 नई भूकंप विज्ञान वेधशालाएं स्थापित की जाएंगी। इस योजना में उत्तराखंड को आठ वेधशालाएं मिलने का प्रस्ताव है। इससे प्रदेश में भूकंप निगरानी नेटवर्क को विस्तार देने का अवसर मिलेगा।
राज्य की ओर से आठ स्थानों का चयन कर प्रस्ताव राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र को भेजा जाना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब आगे की प्रक्रिया और स्थापना संबंधी निर्णयों के बाद इन वेधशालाओं के निर्माण की स्थिति स्पष्ट होगी।उत्तराखंड में लगातार दर्ज हो रही भूकंपीय गतिविधियों के बीच नई वेधशालाओं की स्थापना से निगरानी व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है। इनके माध्यम से कम तीव्रता वाले भूकंपों सहित विभिन्न भूगर्भीय हलचलों को दर्ज करने में मदद मिल सकती है। इससे प्रदेश में भूकंप संबंधी अध्ययन और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को सहयोग मिलने की संभावना है।
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