
देहरादून। उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने 153 साल पुराने ब्रिटिशकालीन नहर कानून को समाप्त कर राज्य की मौजूदा जरूरतों के अनुरूप नया कानून लाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में रविवार को चंपावत जिले के बनबसा में हुई कैबिनेट बैठक में ‘उत्तराखंड सिंचाई एवं जल निकासी विधेयक-2026’ को विधानसभा के पटल पर रखने की मंजूरी दी गई। इसी बैठक में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के मानकों में बदलाव और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीनियर व जूनियर रेजिडेंट समेत चिकित्सा कार्मिकों के वेतन-मानदेय के पुनर्निर्धारण को भी स्वीकृति दी गई।
चंपावत जिले में पहली बार राज्य कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई। बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में हुई बैठक में कुल 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें सिंचाई, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि, रोजगार, प्रशासन और बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रस्ताव शामिल रहे। मुख्यमंत्री धामी ने बैठक के बाद कहा कि कैबिनेट बैठकों को केवल देहरादून तक सीमित न रखते हुए दूसरे जिलों में भी आयोजित किया जाएगा, ताकि स्थानीय मुद्दों और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को सरकार के सामने सीधे रखा जा सके।
कैबिनेट का प्रमुख फैसला ब्रिटिश शासन के दौरान बने ‘उत्तरी भारत नहर एवं जल निकास अधिनियम-1873’ को समाप्त करने से जुड़ा है। यह कानून करीब 153 वर्ष पुराना है। राज्य सरकार का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में यह कानून उत्तराखंड की भौगोलिक और जल संबंधी जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं रह गया है। इसी कारण इसके स्थान पर नया ‘उत्तराखंड सिंचाई एवं जल निकासी विधेयक-2026’ लाने का निर्णय लिया गया है।
नए विधेयक को अब विधानसभा में पेश किया जाएगा। प्रस्तावित कानून में उत्तराखंड की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सिंचाई और जल निकासी से जुड़े कानूनी ढांचे को राज्य के अनुरूप बनाने पर जोर रहेगा। उत्तराखंड में पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों की भौगोलिक स्थितियां अलग-अलग हैं। ऐसे में सरकार पुराने ब्रिटिशकालीन कानून के स्थान पर मौजूदा आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवस्था तैयार करना चाहती है।
कैबिनेट ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए निर्धारित निर्माण मानकों में संशोधन को मंजूरी दी गई है। नई व्यवस्था के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में निजी विश्वविद्यालय के लिए न्यूनतम 2,500 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र जरूरी होगा, जबकि मैदानी क्षेत्रों में न्यूनतम 20 हजार वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र की आवश्यकता होगी।
सरकार ने निजी विश्वविद्यालय खोलने के प्रस्तावों में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अलग मूल्यांकन मानक तैयार करने का भी निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्माण संबंधी नियमों में बदलाव के साथ शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित न हो। पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों और जमीन की उपलब्धता को देखते हुए वहां के लिए अलग निर्माण मानक निर्धारित किए गए हैं।
स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी कैबिनेट ने बड़ा फैसला किया है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट, जूनियर रेजिडेंट और डेमोंस्ट्रेटर की कमी को देखते हुए उनके वेतन और मानदेय के पुनर्निर्धारण को मंजूरी दी गई। सरकार को उम्मीद है कि मानदेय में सुधार से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इन पदों पर चिकित्सा कर्मियों को आकर्षित करने और उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
मैदानी क्षेत्रों में कार्यरत सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का वेतन 84 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.05 लाख रुपये प्रतिमाह किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में कार्यरत सीनियर रेजिडेंट का वेतन 90 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.10 लाख रुपये प्रतिमाह किया गया है। मुख्यमंत्री धामी ने भी बैठक के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों के मानदेय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की जानकारी दी।
कैबिनेट बैठक में इसके अलावा उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों को रोजगारपरक कौशल देने के लिए ‘मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना-2026’ को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत राज्य के सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों तथा संबद्ध कॉलेजों में पढ़ने वाले करीब 1.19 लाख विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। योजना पर पांच वर्षों में लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव है।
भूमि से संबंधित मामलों में भी सरकार ने फैसले लिए हैं। पात्र वर्ग-तीन और वर्ग-चार भूमि के पट्टेदारों और कब्जाधारकों को निर्धारित व्यवस्था के तहत भूमिधरी अधिकार देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा भूमि के नियमितीकरण और इससे संबंधित नियमों में बदलाव के प्रस्तावों पर भी कैबिनेट ने मुहर लगाई।
राज्य की वित्तीय व्यवस्था से जुड़े ‘उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन संशोधन विधेयक-2026’ को भी मंजूरी मिली है। इसके तहत एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 की अवधि में वार्षिक राजकोषीय घाटे की सीमा राज्य के सकल घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत तक और कुल बकाया ऋण की सीमा 30 प्रतिशत तक रखने का प्रावधान किया गया है। आपदा और सुरक्षा जैसी विशेष परिस्थितियों में इसमें छूट का प्रावधान भी रखा गया है।
इसके अलावा पंतनगर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के विस्तार से जुड़े कार्यों के लिए उत्तराखंड सिडकुल और तराई विकास निगम को हस्तांतरित परिसंपत्तियों के एवज में 66.29 करोड़ रुपये जारी करने की मंजूरी दी गई। वन भूमि हस्तांतरण के मामलों के तकनीकी परीक्षण के लिए परियोजना प्रबंधन इकाई बनाने और इसके लिए छह पद स्वीकृत करने का फैसला भी लिया गया।
बनबसा में आयोजित कैबिनेट बैठक इसलिए भी खास रही क्योंकि चंपावत में पहली बार मंत्रिमंडल की बैठक हुई। मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि अलग-अलग क्षेत्रों में कैबिनेट बैठक आयोजित करने से स्थानीय विकास की संभावनाओं और समस्याओं को सरकार के स्तर पर बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलेगा।
कुल मिलाकर धामी कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसलों में पुराने कानून को बदलने से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बदलाव तक कई विषय शामिल रहे। इनमें 153 साल पुराने नहर एवं जल निकास कानून को समाप्त कर नया राज्य कानून बनाने का निर्णय प्रमुख है। अब ‘उत्तराखंड सिंचाई एवं जल निकासी विधेयक-2026’ को विधानसभा में पेश किए जाने के बाद आगे की विधायी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।





