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बंदरों से बचने के चक्कर में छत से गिरा युवक, अस्पताल में मौत

कैंट। क्षेत्र के भौआपुर गांव में सोमवार शाम बंदरों के झुंड को भगाने छत पर गए एक युवक की नीचे गिरने से मौत हो गई। हादसे में युवक के सिर में गंभीर चोट आई थी। परिजन उसे उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां सोमवार रात उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और घटना की जानकारी ली।
मृतक की पहचान धर्मपाल के रूप में हुई है। उनके बेटे सुभाष ने बताया कि सोमवार शाम घर में अचानक बंदरों का झुंड घुस आया था। बंदरों के कारण परिवार के लोग परेशान हो गए। इन्हें भगाने के लिए धर्मपाल छत पर पहुंचे।
बताया गया कि धर्मपाल जैसे ही बंदरों को भगाने लगे, तभी बंदरों ने उनकी ओर दौड़ लगा दी। अचानक हुए हमले से बचने के लिए धर्मपाल ने खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वह छत से नीचे गिर पड़े।
ऊंचाई से गिरने के कारण धर्मपाल के सिर में गंभीर चोट आई। हादसे के बाद घर में मौजूद परिवार के लोग तुरंत उनके पास पहुंचे। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया।
धर्मपाल की हालत गंभीर बनी हुई थी। सिर में लगी चोट के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका और सोमवार रात उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया।
घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने परिजनों और आसपास के लोगों से घटना के संबंध में जानकारी ली। शुरुआती जानकारी में सामने आया कि धर्मपाल बंदरों को भगाने के लिए छत पर गए थे और इसी दौरान गिरने से घायल हो गए थे।
धर्मपाल के परिवार में पत्नी कमला देवी और चार बच्चे हैं। परिवार की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर थी। उनकी अचानक मौत से पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।
भौआपुर गांव में हुई इस घटना के बाद इलाके में बंदरों के आतंक को लेकर फिर से चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों के झुंड आए दिन घरों में घुस जाते हैं और लोगों को परेशान करते हैं।
कई बार बंदर खाने-पीने का सामान उठा ले जाते हैं तो कई बार लोगों पर हमला करने के लिए दौड़ पड़ते हैं। ऐसे में घरों की छत और खुले स्थानों पर जाना भी लोगों के लिए जोखिम भरा हो जाता है।
धर्मपाल की मौत ने इस समस्या की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। परिवार का कहना है कि वह केवल घर में घुसे बंदरों को भगाने गए थे, लेकिन हादसे में उनकी जान चली गई।
स्थानीय लोगों के अनुसार बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। खासकर शाम के समय कई झुंड गांव और आसपास के आवासीय इलाकों में घूमते दिखाई देते हैं।
बंदर अक्सर घरों की छतों, बालकनी और खुले आंगनों में पहुंच जाते हैं। उन्हें भगाने की कोशिश करने पर कई बार वे आक्रामक हो जाते हैं।
ऐसे मामलों में सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों, बच्चों और ऊंची छतों पर रहने वाले लोगों को रहता है। बंदरों से बचने के चक्कर में संतुलन बिगड़ने और गिरने जैसी दुर्घटनाएं भी हो सकती हैं।
भौआपुर गांव के इस हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। धर्मपाल ने बंदरों को भगाने की कोशिश की, लेकिन बंदरों के पीछे दौड़ने के कारण वह घबरा गए और बचते-बचाते छत से नीचे जा गिरे।
परिजनों ने बताया कि हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को उन्हें संभालने का मौका नहीं मिला। परिवार के लोग तुरंत नीचे पहुंचे और उन्हें अस्पताल ले गए।
अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए इलाज शुरू किया, लेकिन सिर पर लगी चोट जानलेवा साबित हुई। सोमवार रात उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है। पड़ोसी और परिचित परिवार को सांत्वना देने के लिए घर पहुंच रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों के आतंक से निपटने के लिए संबंधित विभाग को ठोस कदम उठाने चाहिए। आवासीय क्षेत्रों में घूमने वाले बंदरों को नियंत्रित करने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भेजने की व्यवस्था की जरूरत बताई जा रही है।
इसके साथ ही लोगों को भी बंदरों को सीधे भगाने या उनके करीब जाने से बचने की सलाह दी जा रही है। खासकर छत और ऊंचे स्थानों पर बंदरों का पीछा करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।
धर्मपाल की मौत से परिवार के सामने अब आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह की कठिनाइयां खड़ी हो गई हैं। पत्नी कमला देवी और चार बच्चों की जिम्मेदारी अब परिवार के अन्य सदस्यों पर आ गई है।
घटना ने गांव में सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों के अलावा आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं।
स्थानीय स्तर पर लोग लंबे समय से बंदरों और आवारा जानवरों से राहत की मांग कर रहे हैं। लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने के कारण ऐसी घटनाओं का खतरा बना रहता है।
पुलिस ने घटना के संबंध में आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। परिजनों के बयान भी दर्ज किए गए हैं और पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई गई है।
फिलहाल घटना को हादसा माना जा रहा है। धर्मपाल बंदरों से बचने के दौरान छत से नीचे गिरे और सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौत हो गई।
भौआपुर गांव की यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि बंदरों का बढ़ता आतंक केवल परेशानी ही नहीं, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकता है। अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग बंदरों की समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाता है।





