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उत्तर प्रदेश
युवा न्यायिक अधिकारी जागृति नहीं रहीं, एम्स में उपचार के दौरान निधन
nidhi
17 Oct 2026 10:15 AM IST

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देवरिया: जिले में तैनात युवा न्यायिक अधिकारी जागृति का निधन हो गया है। वह 30 वर्ष की थीं। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें एम्स गोरखपुर में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की जानकारी से न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और परिचितों में शोक है। सहयोगियों ने उनके असामयिक निधन पर संवेदना व्यक्त करते हुए परिवार के प्रति सहानुभूति जताई है।
जागृति देवरिया में सिविल जज जूनियर डिवीजन के पद पर कार्यरत थीं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की आधिकारिक अधिकारी प्रोफाइल में उनका नाम ‘सुश्री जागृति-द्वितीय’ दर्ज है। रिकॉर्ड के अनुसार, उनका जन्म 30 मार्च, 1996 को हुआ था और उनका गृह जिला बलिया था। उन्होंने 24 अगस्त, 2024 को न्यायिक सेवा में नियुक्ति प्राप्त की थी। इस तरह न्यायिक सेवा में उनका सफर अभी शुरुआती वर्षों में ही था।
तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में कराया गया था भर्ती
स्थानीय रिपोर्ट में बताया गया है कि स्वास्थ्य बिगड़ने पर जागृति को उपचार के लिए गोरखपुर ले जाया गया था। उनके निधन को लेकर अस्पताल का विस्तृत आधिकारिक चिकित्सा बुलेटिन उपलब्ध नहीं है। इसलिए मृत्यु के चिकित्सकीय कारण को स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं किया जा सका है। बीमारी की प्रकृति और उपचार की अवधि को लेकर भी स्पष्ट आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।
उनके निधन पर अधिवक्ता समुदाय ने दुख व्यक्त किया है। श्रद्धांजलि देने वालों में सुधीर कुमार पाठक, राजीव श्रीवास्तव, अरुण राव, नसीम लारी, अशोक कुमार मिश्र, धनेश श्रीवास्तव और अरविंद कुमार गिरी सहित अन्य अधिवक्ता शामिल रहे। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को दुख सहने की शक्ति मिलने की प्रार्थना की।
2024 में मिली थी पहली तैनाती
आधिकारिक सेवा विवरण के मुताबिक, जागृति की पहली तैनाती देवरिया में अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन के रूप में हुई थी। इसके बाद जनवरी, 2026 में उनकी पदस्थापना सिविल जज जूनियर डिवीजन, एफटीसी के पद पर दर्ज है। उन्होंने न्यायिक प्रशिक्षण के विभिन्न चरण भी पूरे किए थे। हाईकोर्ट की प्रोफाइल में उनकी शैक्षणिक योग्यताओं में बीकॉम, एलएलबी और एलएलएम दर्ज हैं।
एक युवा अधिकारी का इस तरह असमय निधन उनके परिवार और साथ काम करने वाले लोगों के लिए दुखद है। न्यायिक सेवा में नियुक्ति के लगभग दो वर्ष बाद उनके निधन की खबर ने सहयोगियों को स्तब्ध किया है। फिलहाल अंतिम संस्कार, पारिवारिक विवरण और किसी औपचारिक न्यायालयीय शोकसभा के कार्यक्रम की पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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