उत्तर प्रदेश

ड्रैगन फ्रूट की खेती से युवा किसान देवांश ने बदली तस्वीर

Kavita2
18 Sept 2026 1:44 PM IST
ड्रैगन फ्रूट की खेती से युवा किसान देवांश ने बदली तस्वीर
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बस्ती। परंपरागत खेती से अलग हटकर आधुनिक कृषि तकनीक और नए प्रयोगों को अपनाकर गौर ब्लॉक के कोठवा गांव के युवा किसान देवांश पांडेय सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने नौकरी तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि खेती को ही अपनी आय और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनाया।

देवांश ने करीब तीन वर्ष पहले ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की थी। कम समय में ही उन्होंने इस खेती में बेहतर परिणाम हासिल किए और अब इससे लाखों रुपये की आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। उनकी मेहनत और नवाचार आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

देवांश पांडेय ने एमिटी यूनिवर्सिटी, लखनऊ से एमकाम और बीएड की शिक्षा प्राप्त की है। पढ़ाई के दौरान ही उनकी रुचि खेती और कृषि से जुड़े नए तरीकों में बढ़ने लगी थी। उन्होंने महसूस किया कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।

शिक्षा पूरी करने के बाद जहां कई युवा नौकरी की तलाश में आगे बढ़ते हैं, वहीं देवांश ने खेती में संभावनाएं तलाशने का फैसला किया। उन्होंने पारंपरिक फसलों के बजाय व्यावसायिक खेती को अपनाने की योजना बनाई और ड्रैगन फ्रूट उत्पादन की शुरुआत की।

देवांश के पिता गौर ब्लॉक के एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे। करीब तीन वर्ष पहले उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ गईं, लेकिन देवांश ने परिस्थितियों से हार नहीं मानी। उन्होंने खेती को नई दिशा देने का संकल्प लिया और आधुनिक कृषि के जरिए आत्मनिर्भर बनने की राह चुनी।

ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करना उनके लिए आसान नहीं था। शुरुआत में उन्हें इसके उत्पादन, पौधों की देखभाल और बाजार की व्यवस्था को लेकर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने कृषि विशेषज्ञों से जानकारी ली और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए खेती को आगे बढ़ाया।

ड्रैगन फ्रूट एक ऐसी फसल है, जिसकी मांग बाजार में लगातार बढ़ रही है। कम पानी में भी इसकी खेती की जा सकती है और उचित देखभाल मिलने पर किसान इससे अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं। देवांश ने इसी संभावना को पहचाना और इसे अपनी खेती का हिस्सा बनाया।

उन्होंने खेत में वैज्ञानिक तरीके से पौधों की व्यवस्था की और बेहतर उत्पादन के लिए जरूरी तकनीकों को अपनाया। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई और फसल से अच्छी आमदनी मिलने लगी।

देवांश का कहना है कि खेती को केवल परंपरागत तरीके से करने के बजाय किसान यदि नई तकनीक, बाजार की मांग और वैज्ञानिक जानकारी को अपनाएं तो कृषि को लाभकारी बनाया जा सकता है।

उनकी सफलता को देखकर आसपास के कई किसान भी आधुनिक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। गांव के युवा भी अब खेती को केवल मजबूरी नहीं, बल्कि रोजगार और व्यवसाय के अवसर के रूप में देखने लगे हैं।

देवांश लगातार खेती में नए प्रयोग करने पर जोर दे रहे हैं। उनका उद्देश्य कृषि को आधुनिक बनाना और किसानों को बेहतर आय के रास्ते दिखाना है।

कृषि क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए देवांश जैसे किसानों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उच्च शिक्षा के बाद खेती को अपनाकर उन्होंने यह साबित किया है कि कृषि क्षेत्र में भी बेहतर करियर और आर्थिक सफलता के अवसर मौजूद हैं।

आज देवांश पांडेय की ड्रैगन फ्रूट खेती उनकी मेहनत, लगन और नई सोच का उदाहरण बन चुकी है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक और सही रणनीति के साथ खेती करें तो कृषि को एक मजबूत आय का साधन बनाया जा सकता है।

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