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अंबेडकरनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को स्वदेशी आंदोलन और प्रदेश के हस्तशिल्पियों के योगदान को याद करते हुए कहा कि भारत की आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती में कारीगरों और हस्तशिल्पियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि देश के लाखों हस्तशिल्पियों ने अपनी कला और मेहनत से भारत को नई पहचान दिलाई है।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि उनका यहां आना सौभाग्य की बात है। उन्होंने मां सरयू और तमसा नदियों के बीच स्थित गोविंद साहब की पावन धरती को नमन किया और क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को रेखांकित किया।
गोविंद साहब की धरती को किया नमन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन की शुरुआत क्षेत्र की आस्था और परंपराओं को याद करते हुए की। उन्होंने कहा कि सरयू और तमसा के बीच स्थित यह क्षेत्र आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि ऐसी पावन धरती पर आकर उन्हें गर्व और आनंद की अनुभूति हो रही है। मुख्यमंत्री ने स्थानीय परंपराओं और समाज के योगदान की सराहना करते हुए क्षेत्र के लोगों को शुभकामनाएं दीं।
हस्तशिल्पियों के योगदान की सराहना
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के हस्तशिल्पियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि कारीगरों ने अपनी कला और कौशल के माध्यम से देश की पहचान को मजबूत किया है।
उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प केवल रोजगार का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लाखों कारीगर अपनी मेहनत से पारंपरिक कला को आगे बढ़ा रहे हैं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार हस्तशिल्पियों को प्रोत्साहित करने और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है।
स्वदेशी आंदोलन का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में 7 अगस्त 1905 की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसी दिन भारत के स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वदेशी का मंत्र दिया था।
उन्होंने कहा कि स्वदेशी आंदोलन ने देशवासियों में आत्मनिर्भरता, राष्ट्रप्रेम और स्थानीय उत्पादों के प्रति विश्वास की भावना को मजबूत किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वदेशी का विचार आज भी प्रासंगिक है और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को बढ़ावा देने से छोटे कारीगरों, उद्यमियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें और देश के कारीगरों की मेहनत को सम्मान दें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देशवासी अपने स्थानीय उत्पादों को अपनाते हैं तो इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं और आर्थिक विकास को गति मिलती है।
सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविध संस्कृति, परंपराओं और कला से है। हस्तशिल्प इसी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों तक इन परंपराओं को पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। इसके लिए कारीगरों को सहयोग और सम्मान मिलना जरूरी है।
सरकार की योजनाओं का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार कारीगरों और छोटे उद्यमियों के लिए कई योजनाएं चला रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उनके उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों के जरिए हस्तशिल्पियों को नए अवसर मिल रहे हैं।
आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी पूरा होगा जब देश के स्थानीय उत्पादों और मेहनतकश लोगों को आगे बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि स्वदेशी की भावना केवल आर्थिक नीति नहीं, बल्कि देश के प्रति जिम्मेदारी और गौरव का भाव है।
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े मूल्यों को याद करते हुए कहा कि देश की प्रगति में हर वर्ग का योगदान महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने हस्तशिल्पियों और स्थानीय लोगों के योगदान की सराहना की तथा स्वदेशी भावना को मजबूत करने का आह्वान किया।





