उत्तर प्रदेश

अयोध्या विवाद पर योगी का पलटवार, कहा- साधु-संतों को बदनाम करने की साजिश

Ratna Netam
4 Aug 2026 8:47 PM IST
अयोध्या विवाद पर योगी का पलटवार, कहा- साधु-संतों को बदनाम करने की साजिश
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अयोध्या : उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा प्रकरण और विपक्ष के हंगामे को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जिन दलों ने अतीत में भगवान श्रीराम और सनातन आस्था का अपमान किया, वही आज अयोध्या और श्रीराम जन्मभूमि को लेकर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा प्रकरण की जांच में अब तक किसी भी साधु-संत की संलिप्तता सामने नहीं आई है, बावजूद इसके विपक्ष तथ्यों को तोड़-मरोड़कर मंदिर और सनातन पर सवाल खड़े करने का प्रयास कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि विपक्ष ने सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने का काम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अध्यक्ष की पीठ की अवमानना करना, प्लेकार्ड लहराकर कार्यवाही बाधित करना, मार्शलों से धक्का-मुक्की करना और संवैधानिक संस्थाओं का अनादर करना समाजवादी पार्टी की पुरानी कार्यशैली रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष जनहित के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय केवल राजनीतिक माहौल खराब करने और प्रदेश की सकारात्मक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे से जुड़े मामले को सरकार ने पूरी गंभीरता से लिया। उन्होंने बताया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 12 जून को उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का अनुरोध किया था। इसके बाद 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया और 23 जून को पहली अंतरिम रिपोर्ट सरकार को सौंपी गई। 25 जून को इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई और जांच के दौरान आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें छह लोगों पर चढ़ावे की धनराशि में अनियमितता करने तथा दो अन्य पर जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही के आरोप पाए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाद में यह मामला सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में चला गया और जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में किसी भी साधु-संत की संलिप्तता सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में एक हजार से अधिक कर्मचारी श्रद्धालुओं की सेवा में दिन-रात लगे रहते हैं। ऐसे में कुछ कर्मचारियों की कथित भूमिका के आधार पर पूरे मंदिर, संत समाज या अयोध्या धाम को बदनाम करना अनुचित और दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचती है।
विपक्ष पर हमला जारी रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को भगवान श्रीराम और सनातन पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने 1990 की अयोध्या घटना का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस समय रामभक्तों पर गोलियां चलवाई गई थीं। वहीं कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि रामसेतु मामले में सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे के जरिए भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के अस्तित्व पर सवाल उठाए गए थे। ऐसे दल आज आस्था की राजनीति कर रहे हैं, जो जनता भलीभांति समझती है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2024 में जब अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक समारोह आयोजित हुआ था, तब विपक्ष के कई नेताओं ने निमंत्रण मिलने के बावजूद उसमें भाग नहीं लिया। अब वही लोग श्रीराम जन्मभूमि और आस्था की बात कर रहे हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक अवसरवाद करार दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का उद्देश्य अयोध्या को विश्वस्तरीय धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करना है। प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं और लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ऐसे समय में मंदिर और अयोध्या की छवि धूमिल करने की कोशिश प्रदेश के हितों के खिलाफ है।
उन्होंने अंत में कहा कि सरकार कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच करा रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। किसी भी निर्दोष व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाएगा, लेकिन दोषी चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वह सदन की गरिमा बनाए रखते हुए जनहित के मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा करे, न कि धार्मिक आस्था और संवेदनशील विषयों पर राजनीति करने का प्रयास करे।
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