उत्तर प्रदेश

Yogi सरकार का निर्णय, प्रदेश के सभी जिला पंचायत अध्यक्ष बने प्रशासक

Ratna Netam
10 July 2026 9:03 PM IST
Yogi   सरकार का निर्णय, प्रदेश के सभी जिला पंचायत अध्यक्ष बने प्रशासक
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Lucknow लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने जिला पंचायतों को लेकर बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। पंचायती राज विभाग की ओर से जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, प्रदेश के सभी जिला पंचायत अध्यक्षों को उनके वर्तमान कार्यकाल की समाप्ति के बाद प्रशासक नियुक्त किया गया है। यह व्यवस्था 12 जुलाई 2026 से प्रभावी होगी और नई जिला पंचायतों के गठन तक या अधिकतम 12 जनवरी 2027 तक जारी रहेगी।

शासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि वर्ष 2021 में गठित जिला पंचायतों का कार्यकाल 11 जुलाई 2026 को समाप्त हो रहा है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद जिला पंचायतों के कामकाज को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए राज्य सरकार ने यह अंतरिम व्यवस्था लागू की है।

पंचायती राज विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 की धारा-20 की उपधारा (3-क) के तहत राज्य सरकार को यह अधिकार प्राप्त है कि वह जिला पंचायतों के संचालन के लिए आवश्यक व्यवस्था कर सके। इसी कानूनी प्रावधान के तहत निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्षों को ही प्रशासक के रूप में कार्य करने की जिम्मेदारी दी गई है।

सरकार के इस फैसले के बाद अब जिला पंचायत अध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्रों में प्रशासक के रूप में जिला पंचायतों के कार्यों का संचालन करेंगे। हालांकि यह व्यवस्था स्थायी नहीं होगी, बल्कि नई जिला पंचायतों के गठन तक एक अस्थायी प्रबंध के रूप में लागू रहेगी।

शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रशासक के रूप में कार्य करते हुए जिला पंचायत अध्यक्षों को निर्धारित नियमों और अधिकारों के अनुसार ही कार्य करना होगा। जिला पंचायतों से जुड़े विकास कार्य, प्रशासनिक निर्णय और आवश्यक व्यवस्थाएं पहले की तरह जारी रहेंगी, ताकि स्थानीय स्तर पर किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो।

प्रदेश सरकार ने यह कदम जिला पंचायतों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया है। आमतौर पर निर्वाचित पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई पंचायतों के गठन तक प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए अंतरिम व्यवस्था की जाती है।

राज्य में नई जिला पंचायतों के गठन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासकों की व्यवस्था स्वत: समाप्त हो जाएगी और नवनिर्वाचित जिला पंचायतें अपने कार्यों का संचालन शुरू करेंगी। वहीं, यदि किसी कारणवश नई जिला पंचायतों का गठन निर्धारित समय में नहीं हो पाता है तो यह व्यवस्था अधिकतम 12 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेगी।

पंचायती राज विभाग के इस आदेश के बाद प्रदेश की सभी जिला पंचायतों में प्रशासनिक कार्यों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि विकास कार्यों की गति बनाए रखने और जनता से जुड़े कार्यों में किसी तरह की रुकावट न आए, इसके लिए यह निर्णय लिया गया है।

सरकार के इस फैसले से जिला पंचायतों में नेतृत्व की निरंतरता बनी रहेगी और स्थानीय स्तर पर चल रहे विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी। अब जिला पंचायत अध्यक्ष प्रशासक के रूप में नई जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे।

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