उत्तर प्रदेश

UP's में शिक्षा व्यवस्था पर घिरी योगी सरकार, अखिलेश ने पेश किए आंकड़े

Ratna Netam
2 Aug 2026 6:22 PM IST
UPs  में शिक्षा व्यवस्था पर घिरी योगी सरकार, अखिलेश ने पेश किए आंकड़े
x

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर सरकारी प्राथमिक स्कूलों को बंद करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद अब तक 26 हजार से ज्यादा सरकारी प्राथमिक स्कूल बंद किए जा चुके हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि इस मुद्दे को समाजवादी पार्टी विधानसभा के मानसून सत्र में जोर-शोर से उठाएगी और सरकार से जवाब मांगेगी।

सोमवार से शुरू होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र से पहले अखिलेश यादव ने पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों के कारण गरीब, पिछड़े और वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समाज के बच्चों को शिक्षित नहीं होने देना चाहती।

अखिलेश यादव ने पत्रकारों के सामने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने से पहले प्रदेश में कुल एक लाख 13 हजार 938 सरकारी प्राथमिक स्कूल संचालित थे। उनके अनुसार, अब तक इनमें से करीब 26 हजार स्कूल बंद हो चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि स्कूल बंद होने का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों और गरीब परिवारों के बच्चों पर पड़ा है।

सपा अध्यक्ष ने जिलेवार आंकड़े बताते हुए कहा कि लखीमपुर खीरी में सबसे ज्यादा 758 प्राथमिक स्कूल बंद हुए हैं। इसके अलावा सीतापुर में 650, प्रयागराज में 638 और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर में करीब 500 प्राथमिक स्कूल बंद किए जाने का दावा उन्होंने किया। अखिलेश यादव ने कहा कि सरकारी स्कूलों के बंद होने से लाखों बच्चों को शिक्षा से दूर होना पड़ा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 तक प्रदेश के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में करीब एक करोड़ 17 लाख बच्चे पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर लगभग 89 लाख रह गई है। अखिलेश ने दावा किया कि इस गिरावट में पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के बच्चों की संख्या करीब 25 लाख है।

अखिलेश यादव ने शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 तक प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में करीब चार लाख शिक्षक कार्यरत थे, जबकि अब यह संख्या घटकर लगभग तीन लाख 40 हजार रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नई भर्तियां करने के बजाय खाली पदों को भरने में असफल रही है। सपा प्रमुख के मुताबिक प्रदेश में करीब 81 हजार शिक्षकों के पद खाली पड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों की स्थिति खराब होने का सीधा असर बेटियों की शिक्षा पर भी पड़ा है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि मार्च 2017 तक सरकारी प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं की संख्या 61.57 लाख थी, जो अब घटकर करीब 45 लाख रह गई है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की कमी भी बच्चों की पढ़ाई में बाधा बन रही है।

सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि प्रदेश के हजारों स्कूलों में अभी भी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि करीब सात हजार सरकारी स्कूलों में बिजली की सुविधा नहीं है, जबकि 2300 स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा 576 स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा नहीं होने और करीब 23 हजार स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा की व्यवस्था नहीं होने का भी उन्होंने दावा किया।

अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन मौजूदा सरकार इस दिशा में गंभीर नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा कि विधानसभा के मानसून सत्र में समाजवादी पार्टी के विधायक इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे और सरकार से जवाब मांगेंगे।

हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले शिक्षा, रोजगार और विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

Next Story