उत्तर प्रदेश

भर्ती प्रक्रिया पर योगी ने सपा को घेरा Gen Z को दिया संदेश

Ratna Netam
19 Sept 2026 3:15 PM IST
भर्ती प्रक्रिया पर योगी ने सपा को घेरा Gen Z को दिया संदेश
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पर भर्ती प्रक्रिया को लेकर निशाना साधा। तीन विभागों के चयनित 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित करने के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 2017 से पहले प्रदेश में कई ऐसी भर्तियां हुई थीं, जिनमें जिन लोगों ने आवेदन तक नहीं किया था, उन्हें नियुक्ति पत्र दे दिए गए, जबकि आवेदन करने वाले अभ्यर्थी नौकरी का इंतजार करते रह गए। उन्होंने इसे भर्ती व्यवस्था में अराजकता की स्थिति बताते हुए युवाओं से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने का आह्वान किया।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में रोजगार और सरकारी भर्ती लगातार राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने वर्तमान सरकार की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बताते हुए पिछली सरकार के कार्यकाल पर सवाल उठाए। उन्होंने युवाओं से कहा कि जिन लोगों ने उनके भरोसे के साथ खिलवाड़ किया, उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देने की जरूरत है। यह टिप्पणी मुख्यमंत्री की ओर से राजनीतिक मंच पर की गई अपील के रूप में सामने आई है।
818 चयनित युवाओं को बांटे नियुक्ति पत्र
लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न विभागों में चयनित **818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र** दिए गए। रिपोर्ट के अनुसार इन अभ्यर्थियों का चयन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के माध्यम से विभिन्न पदों के लिए हुआ है। मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र पाने वाले युवाओं को शुभकामनाएं दीं और सरकारी सेवा में जिम्मेदारी के साथ काम करने की बात कही।मुख्यमंत्री ने भर्ती प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य युवाओं को योग्यता और पारदर्शी प्रक्रिया के आधार पर अवसर उपलब्ध कराना है। उनके अनुसार सरकारी भर्तियों में निष्पक्षता बनाए रखने से युवाओं का व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होता है।उन्होंने कहा कि आज सरकार की योजनाओं को बिना भेदभाव लागू करने और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता रखने से युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। उनके संबोधन का बड़ा हिस्सा सरकारी नौकरियों, प्रदेश की अर्थव्यवस्था और पिछली सरकार के दौरान कथित भर्ती अनियमितताओं के इर्द-गिर्द रहा।
'जिन्होंने आवेदन नहीं किया, उन्हें दे दिए नियुक्ति पत्र'
योगी आदित्यनाथ ने पिछली समाजवादी पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उस समय कई भर्तियों में ऐसे लोगों को नियुक्ति पत्र दिए गए जिन्होंने पद के लिए आवेदन ही नहीं किया था। उनका दावा था कि दूसरी ओर आवेदन करने वाले अभ्यर्थी नियुक्ति का इंतजार करते रह गए।मुख्यमंत्री ने इसे भर्ती व्यवस्था में अराजकता की स्थिति बताया। हालांकि, उनके इस राजनीतिक आरोप को वर्तमान बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी विशेष भर्ती में ऐसा हुआ था या नहीं, यह निर्धारित करने के लिए संबंधित भर्ती की आधिकारिक जांच, न्यायिक रिकॉर्ड या अन्य दस्तावेजी प्रमाण देखना जरूरी होगा। उपलब्ध ताजा रिपोर्ट में मुख्यमंत्री ने किसी एक भर्ती का विस्तृत नाम या आंकड़ा नहीं बताया है।इसलिए इस दावे को समाचार में मुख्यमंत्री के आरोप के रूप में लिखना तथ्यात्मक रूप से अधिक उचित है, न कि इसे बिना अतिरिक्त प्रमाण के स्थापित तथ्य के तौर पर प्रस्तुत करना।
Gen-Z से योगी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में युवाओं और खास तौर पर नई पीढ़ी से लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने युवाओं के भरोसे और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया, उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से जवाब देना चाहिए।योगी ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर का भी उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों के पास अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने की ताकत है। उन्होंने युवाओं से इस ताकत का इस्तेमाल करने की अपील की।यह अपील राजनीतिक संदर्भ में की गई थी। उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए रोजगार, भर्ती और युवाओं की भूमिका राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं। इसलिए मुख्यमंत्री का यह बयान रोजगार के साथ-साथ व्यापक राजनीतिक संदेश के रूप में भी सामने आया।
2017 से पहले की व्यवस्था पर सवाल
योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में किसान आत्महत्या कर रहा था, कई परियोजनाएं वर्षों से लंबित थीं और प्रदेश में विकास से जुड़े कामों को लेकर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय, अर्थव्यवस्था, महिला कार्यबल और बजट में तीन गुना से अधिक वृद्धि हुई है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के निर्यात में बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया। ये आंकड़े मुख्यमंत्री द्वारा अपने संबोधन में रखे गए दावे हैं; इनके स्वतंत्र सत्यापन के लिए आधिकारिक आर्थिक आंकड़ों से तुलना आवश्यक होगी।
'चाचा-भतीजा की टोली' वाला बयान
भर्ती के मुद्दे पर विपक्ष को घेरते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले नौकरियों पर कथित तौर पर 'डाका डालने' के लिए चाचा-भतीजा की टोली निकलती थी। उन्होंने यह टिप्पणी समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर राजनीतिक हमला करते हुए की।योगी ने आगे दावा किया कि जो लोग आज युवाओं को उपदेश दे रहे हैं, उनकी राजनीतिक स्थिति आगे बदल जाएगी। यह उनके भाषण का राजनीतिक हिस्सा था और इसे मुख्यमंत्री की टिप्पणी के तौर पर ही रिपोर्ट किया जाना चाहिए।वहीं समाजवादी पार्टी की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी गई है, इसे अलग से देखना जरूरी होगा। किसी भी राजनीतिक आरोप को पूर्ण तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय संबंधित पक्षों के बयानों को स्पष्ट रूप से अलग-अलग दर्ज करना समाचार की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है।
रोजगार को लेकर सरकार का दावा
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने वर्तमान सरकार के दौरान रोजगार उपलब्ध कराने के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि अब तक करीब **साढ़े नौ लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र** दिए जा चुके हैं और आने वाले समय में भी हजारों युवाओं को रोजगार दिया जाएगा।सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि योग्यता के आधार पर चयन होने से युवाओं के सपने पूरे हो रहे हैं।हालांकि सरकारी नियुक्ति पत्रों की कुल संख्या और रोजगार की प्रकृति को समझते समय यह अंतर करना जरूरी है कि आंकड़े किन विभागों, पदों और समयावधि से संबंधित हैं। सरकारी नौकरी, संविदा नियुक्ति, निजी रोजगार और स्वरोजगार के आंकड़े अलग-अलग श्रेणियां हैं।
युवाओं और भर्ती का मुद्दा
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में सरकारी नौकरी की मांग लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़ी संख्या में उम्मीदवार शामिल होते हैं और भर्ती प्रक्रिया में देरी या अनियमितता के आरोप युवाओं के बीच महत्वपूर्ण मुद्दा बन जाते हैं।योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में इसी मुद्दे को केंद्र में रखते हुए वर्तमान सरकार की भर्ती प्रक्रिया को पिछली व्यवस्था से अलग बताया। उन्होंने कहा कि आज योग्य उम्मीदवारों को बिना भेदभाव अवसर देने की कोशिश की जा रही है।दूसरी ओर, रोजगार की उपलब्धता का आकलन केवल नियुक्ति पत्रों की संख्या से नहीं किया जा सकता। सरकारी पदों पर नियुक्ति के अलावा निजी क्षेत्र में रोजगार, बेरोजगारी दर, श्रम बल भागीदारी और रोजगार की गुणवत्ता जैसे कई संकेतक भी महत्वपूर्ण होते हैं।
आयुष क्षेत्र में भी अवसरों का जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आयुष क्षेत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले आयुष क्षेत्र की राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान नहीं थी, जबकि केंद्र सरकार द्वारा आयुष मंत्रालय बनाए जाने के बाद आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी और होम्योपैथी को एक मंच मिला।उन्होंने युवाओं को इस क्षेत्र में शिक्षा और करियर के नए अवसरों के बारे में भी बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार पहले इन विषयों में डिग्री या डिप्लोमा को लेकर उतनी संभावनाएं नहीं दिखाई देती थीं, लेकिन अब इन क्षेत्रों में अवसर बढ़े हैं।
राजनीतिक संदेश के बीच रोजगार का मुद्दा
शनिवार का कार्यक्रम मूल रूप से चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने से जुड़ा था, लेकिन मुख्यमंत्री के भाषण में रोजगार के साथ-साथ विपक्ष पर राजनीतिक हमला भी प्रमुख रहा। उन्होंने पिछली सरकार के दौरान भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए और वर्तमान सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख किया।उनके भाषण से यह भी स्पष्ट है कि युवाओं और रोजगार का मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण बना हुआ है। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच सरकारी नौकरियों के आंकड़ों को लेकर भी बयानबाजी हुई है।ऐसे में 818 युवाओं को नियुक्ति पत्र देने का कार्यक्रम प्रशासनिक उपलब्धि के साथ राजनीतिक संदेश का मंच भी बना। मुख्यमंत्री ने युवाओं को नई पीढ़ी की ताकत बताते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों के इस्तेमाल की अपील की।
आगे क्या है चुनौती?
सरकारी भर्ती में नियुक्ति पत्र मिलने के बाद भी प्रक्रिया का अंतिम उद्देश्य युवाओं को स्थायी और पारदर्शी रोजगार उपलब्ध कराना होता है। इसके लिए रिक्त पदों की समय पर पहचान, भर्ती कैलेंडर, परीक्षा आयोजन, परिणाम और नियुक्ति प्रक्रिया को समयबद्ध रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में देरी या किसी भी तरह की अनियमितता का असर बड़ी संख्या में उम्मीदवारों पर पड़ सकता है। सरकार के लिए पारदर्शिता के साथ-साथ समयबद्ध भर्ती और शिकायतों के प्रभावी निस्तारण पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण रहेगा।फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शनिवार के बयान में दो प्रमुख बातें सामने आईं—पहली, उन्होंने 2017 से पहले की भर्ती व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए और दूसरी, उन्होंने नई पीढ़ी के युवाओं से लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने की अपील की। वहीं, कार्यक्रम में 818 चयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए।
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