उत्तर प्रदेश

ऐतिहासिक मेले में कुश्ती का आगाज, अखाड़े में भिड़े दिग्गज पहलवान

Ratna Netam
28 July 2026 8:10 PM IST
ऐतिहासिक मेले में कुश्ती का आगाज, अखाड़े में भिड़े दिग्गज पहलवान
x

मीरापुर (मुजफ्फरनगर) : क्षेत्र के ग्राम कासमपुर खोला में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक मेले के अंतर्गत दो दिवसीय दंगल प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ हुआ। आषाढ़ मास की चतुर्दशी एवं पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित होने वाला यह दंगल क्षेत्र की 65 वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। पहले दिन उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से पहुंचे सैकड़ों पहलवानों ने अखाड़े में उतरकर अपनी कुश्ती कला, ताकत और साहस का शानदार प्रदर्शन किया।

दंगल प्रतियोगिता को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और खेल प्रेमी पहुंचे। हजारों की भीड़ ने पहलवानों के रोमांचक मुकाबलों का आनंद लिया और शानदार प्रदर्शन करने वाले पहलवानों का तालियों की गड़गड़ाहट से उत्साहवर्धन किया। अखाड़े में पहलवानों के दांव-पेंच और दमखम ने दर्शकों को काफी आकर्षित किया।

दंगल का शुभारंभ जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों की मौजूदगी में किया गया। भाजपा जिलाध्यक्ष सुधीर सैनी, वरिष्ठ भाजपा नेता अभिषेक चौधरी, विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) वंदना वर्मा, गुर्जर सद्भावना सभा के जिलाध्यक्ष ओ.पी. चौहान, मीरापुर विधायक मिथलेश पाल की सुपुत्री सुप्रिया पाल तथा पूर्व जिला पंचायत सदस्य पद प्रत्याशी पुष्पेंद्र ने संयुक्त रूप से फीता काटकर प्रतियोगिता का उद्घाटन किया।

उद्घाटन के दौरान अतिथियों ने अखाड़े में पहुंचकर पहलवानों का हाथ मिलवाया और उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि दंगल जैसे पारंपरिक आयोजन भारतीय संस्कृति और ग्रामीण खेल परंपरा की पहचान हैं। यह केवल खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि समाज को जोड़ने और युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने का माध्यम भी हैं।

भाजपा जिलाध्यक्ष सुधीर सैनी ने कहा कि कुश्ती भारत की प्राचीन खेल परंपराओं में शामिल रही है। ऐसे आयोजनों से युवाओं में खेल भावना का विकास होता है और वे शारीरिक रूप से मजबूत बनने के साथ अनुशासन भी सीखते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को नशे जैसी बुराइयों से दूर रखकर खेलों की ओर प्रेरित करना बेहद जरूरी है।

अन्य अतिथियों ने भी दंगल आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि कासमपुर खोला का यह आयोजन क्षेत्र की पहचान बन चुका है। 65 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को आगे बढ़ाना समाज के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित होने वाले ऐसे कार्यक्रम प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करते हैं।

दंगल के पहले दिन कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। अलग-अलग जिलों से आए पहलवानों ने अपने-अपने वर्ग में शानदार प्रदर्शन किया। कई मुकाबले काफी संघर्षपूर्ण रहे, जिन्हें देखने के लिए दर्शक अंत तक मैदान में डटे रहे। विजेता पहलवानों का उत्साह बढ़ाया गया और उन्हें सम्मानित भी किया गया।

आयोजकों ने बताया कि दंगल प्रतियोगिता के दूसरे दिन भी कई बड़े मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहलवानों के पहुंचने की संभावना है। आयोजन समिति ने बताया कि प्रतियोगिता को सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि कासमपुर खोला का यह दंगल केवल खेल आयोजन नहीं बल्कि क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन में शामिल होते हैं और पहलवानों का उत्साह बढ़ाते हैं।

दंगल के शुभारंभ अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, खेल प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता और आयोजन समिति के सदस्य मौजूद रहे। सभी ने मिलकर इस ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाने और युवाओं को खेलों से जोड़ने का संकल्प लिया।

Next Story