उत्तर प्रदेश

970 को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ताओं को मिलेगा प्रशिक्षण

Kavita2
21 Aug 2026 11:48 AM IST
970 को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ताओं को मिलेगा प्रशिक्षण
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हरदोई। बच्चों में संभावित दिव्यांगताओं की समय रहते पहचान और शुरुआती हस्तक्षेप सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिले के 970 को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए समेकित शिक्षा के तहत मास्टर ट्रेनरों का तीन दिवसीय जनपद स्तरीय प्रशिक्षण गुरुवार से प्राथमिक विद्यालय कांशीराम कॉलोनी नगर क्षेत्र में शुरू हो गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी (समग्र शिक्षा) आशीष कुमार आनंद ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर प्रशिक्षण से जुड़े अधिकारियों और विशेषज्ञों ने बच्चों में दिव्यांगता के संभावित संकेतों की समय पर पहचान के महत्व पर जोर दिया।

21 स्पेशल एजुकेटर और सात विशेष शिक्षक होंगे प्रशिक्षित

तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनपद के 21 स्पेशल एजुकेटर और सात विशेष शिक्षक सीडब्ल्यूएसएन हिस्सा ले रहे हैं। ये मास्टर ट्रेनर 20 से 22 अगस्त तक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बच्चों में संभावित दिव्यांगताओं के शुरुआती संकेतों की पहचान, बच्चों के विकास पर नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उचित सहायता उपलब्ध कराने से संबंधित जानकारी दी जाएगी।

मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षित करने के बाद प्रशिक्षण का अगला चरण शुरू होगा। ये मास्टर ट्रेनर ब्लॉक स्तर पर स्थित ब्लॉक रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) में को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देंगे। इस तरह प्रशिक्षण को जिले के सभी 970 संबंधित आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाने की योजना है।

समय पर पहचान से बच्चों को मिलेगा लाभ

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बच्चों में किसी भी संभावित दिव्यांगता या विकास संबंधी समस्या की पहचान शुरुआती स्तर पर करना है। कम उम्र में किसी समस्या का पता चलने पर बच्चे को समय रहते विशेषज्ञों की सलाह और आवश्यक हस्तक्षेप उपलब्ध कराया जा सकता है।

कई बार बच्चों में विकास संबंधी कुछ संकेत शुरुआती उम्र में दिखाई देने लगते हैं। यदि इन संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए तो अभिभावकों को भी सही दिशा में मार्गदर्शन दिया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर बच्चे को विशेषज्ञ या संबंधित सेवा केंद्र तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का बच्चों और उनके परिवारों से नियमित संपर्क होता है। इसलिए उन्हें इस संबंध में प्रशिक्षित करना शुरुआती पहचान की व्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मास्टर ट्रेनर देंगे ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण

वर्तमान में प्रशिक्षण का पहला चरण मास्टर ट्रेनरों के लिए आयोजित किया जा रहा है। तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में स्पेशल एजुकेटर और विशेष शिक्षक आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

इसके बाद यही मास्टर ट्रेनर ब्लॉक स्तर पर जाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देंगे। बीआरसी में आयोजित होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं को बच्चों में संभावित दिव्यांगताओं के संकेतों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि जिले के सभी 970 को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यरत कर्मियों तक प्रशिक्षण पहुंच सके और वे अपने स्तर पर बच्चों की शुरुआती जरूरतों को पहचानने में सक्षम हो सकें।

आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका अहम

छोटे बच्चों के विकास, देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा में आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इन केंद्रों पर बच्चों के साथ नियमित संपर्क होने के कारण कार्यकर्ताओं को उनके व्यवहार और विकास में होने वाले बदलावों को देखने का अवसर मिलता है।

यदि कार्यकर्ताओं को संभावित दिव्यांगताओं के शुरुआती संकेतों की सही जानकारी हो, तो वे किसी बच्चे में असामान्य स्थिति नजर आने पर परिवार को इसकी जानकारी दे सकती हैं। इसके बाद बच्चे को आवश्यक जांच और विशेषज्ञ सहायता के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

इससे बच्चों को समय रहते आवश्यक सहयोग मिल सकता है और उनकी शिक्षा तथा विकास की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है।

समेकित शिक्षा के तहत पहल

यह प्रशिक्षण समेकित शिक्षा के तहत आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें उनकी जरूरत के अनुसार सहयोग उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत करना है।

दिव्यांगता की शुरुआती पहचान होने से बच्चों की शैक्षिक जरूरतों को समझने और उनके लिए उचित व्यवस्था करने में भी मदद मिलती है। स्पेशल एजुकेटर और विशेष शिक्षक आगे की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

इस पहल से अभिभावकों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। कई बार परिवारों को यह पता नहीं चल पाता कि बच्चे के विकास में दिखाई देने वाला कोई संकेत सामान्य है या किसी विशेष समस्या की ओर इशारा करता है। प्रशिक्षित कार्यकर्ता उन्हें आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में मदद कर सकती हैं।

प्रशिक्षण से मजबूत होगी शुरुआती हस्तक्षेप व्यवस्था

दिव्यांगता की पहचान जितनी जल्दी हो, उतनी जल्दी बच्चे को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की संभावना बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण में शुरुआती हस्तक्षेप पर विशेष जोर दिया जाएगा।

इसमें केवल संभावित समस्या की पहचान ही नहीं, बल्कि आगे की प्रक्रिया के बारे में भी कार्यकर्ताओं को जागरूक करना महत्वपूर्ण होगा। यदि किसी बच्चे में दिव्यांगता के संकेत दिखाई देते हैं तो उसे विशेषज्ञों तक पहुंचाना और परिवार को आवश्यक जानकारी देना इस व्यवस्था का अहम हिस्सा होगा।

22 अगस्त तक चलेगा प्रशिक्षण

मास्टर ट्रेनरों का तीन दिवसीय जनपद स्तरीय प्रशिक्षण 20 से 22 अगस्त तक चलेगा। इसके बाद ब्लॉक स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

जिले में 970 को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों तक इस प्रशिक्षण को पहुंचाने की योजना से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे बच्चों में संभावित दिव्यांगताओं की पहचान को लेकर जमीनी स्तर पर जागरूकता और क्षमता दोनों बढ़ सकती हैं।

कुल मिलाकर, समेकित शिक्षा के तहत शुरू की गई यह प्रशिक्षण पहल बच्चों में संभावित दिव्यांगताओं की समय पर पहचान, शुरुआती हस्तक्षेप और उन्हें आवश्यक सेवाओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पहले 21 स्पेशल एजुकेटर और सात विशेष शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा और इसके बाद वे ब्लॉक स्तर पर 970 को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करेंगे। इससे विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शुरुआती स्तर पर ही सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था और मजबूत होने की उम्मीद है।

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