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घूंघट छोड़ राइफल थाम रहीं गांव की महिलाएं, वाराणसी में 400 महिलाओं ने साधा निशाना

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में ग्रामीण महिला सशक्तीकरण की एक अनोखी तस्वीर सामने आई है। कभी घरेलू जिम्मेदारियों और सामाजिक परंपराओं तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब खेल के मैदान में अपनी प्रतिभा दिखा रही हैं। रोहनिया क्षेत्र के देउरा गांव में करीब 400 ग्रामीण महिलाएं राइफल शूटिंग का प्रशिक्षण ले रही हैं। होप वेलफेयर सोसाइटी की ओर से गठित ग्रीन आर्मी ने महिला सशक्तीकरण की अपनी मुहिम को खेलकूद से जोड़ते हुए यह पहल शुरू की है। इस अभियान का उद्देश्य महिलाओं को निशानेबाजी का प्रशिक्षण देने के साथ उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करना है। संस्था के संस्थापक रवि मिश्रा के अनुसार, आने वाले दिनों में राइफल शूटिंग और तीरंदाजी प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाएगा, जिससे महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सकेगा।
घूंघट से निकलकर शूटिंग रेंज तक पहुंचीं महिलाएं
वाराणसी के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की बदलती भूमिका का एक उदाहरण देउरा गांव में देखने को मिल रहा है।
यहां बड़ी संख्या में महिलाएं निशानेबाजी का प्रशिक्षण लेने पहुंच रही हैं। इनमें ऐसी महिलाएं भी शामिल हैं, जिनका अधिकांश समय पहले घरेलू कामकाज और पारिवारिक जिम्मेदारियों में बीतता था।
अब ये महिलाएं खेल गतिविधियों के लिए समय निकालकर अपनी क्षमताओं को पहचान रही हैं।
प्रशिक्षण के दौरान उन्हें निशाना लगाने, एकाग्रता बनाए रखने और खेल से संबंधित अनुशासन का महत्व समझने का अवसर मिल रहा है।
इस पहल से ग्रामीण महिलाओं के बीच यह संदेश पहुंच रहा है कि खेलों में भागीदारी के लिए उम्र या सामाजिक पृष्ठभूमि बाधा नहीं बननी चाहिए।
400 महिलाओं को दिया जा रहा निशानेबाजी का प्रशिक्षण
होप वेलफेयर सोसाइटी की ग्रीन आर्मी के माध्यम से रोहनिया के देउरा गांव स्थित शूटिंग रेंज में करीब 400 महिलाओं को प्रशिक्षण देने की जानकारी सामने आई है।
संस्था ने महिला सशक्तीकरण के अपने अभियान में निशानेबाजी को शामिल किया है।
राइफल शूटिंग ऐसा खेल है, जिसमें एकाग्रता, धैर्य, शारीरिक संतुलन और मानसिक अनुशासन महत्वपूर्ण होते हैं।
प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं को खेल की बुनियादी जानकारी के साथ सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से अभ्यास करने की आवश्यकता होती है।
बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी इस पहल की प्रमुख विशेषता है।
ग्रीन आर्मी ने खेलों से जोड़ी महिला सशक्तीकरण की मुहिम
ग्रीन आर्मी का गठन होप वेलफेयर सोसाइटी की ओर से किया गया है।
यह संगठन ग्रामीण महिलाओं को सामाजिक गतिविधियों और जनजागरूकता अभियानों से जोड़ने का काम करता रहा है।
वाराणसी के ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रीन आर्मी की महिलाएं नशामुक्ति और सामाजिक जागरूकता से संबंधित अभियानों में भी सक्रिय रही हैं।
हाल ही में रोहनिया क्षेत्र के बंदेपुर गांव में संगठन से जुड़ी महिलाओं ने शराब के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया था। इस दौरान उन्होंने लोगों से नशे से दूर रहने की अपील की थी।
अब संस्था ने महिलाओं की भागीदारी को खेलों तक पहुंचाने का प्रयास शुरू किया है।
इसका उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक बदलाव में सक्रिय भूमिका देने के साथ उनकी व्यक्तिगत क्षमताओं का विकास करना है।
रवि मिश्रा बोले- जल्द होगी शूटिंग और तीरंदाजी प्रतियोगिता
ग्रीन आर्मी के संस्थापक रवि मिश्रा के अनुसार, महिलाओं को केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रखा जाएगा।
संस्था जल्द ही राइफल शूटिंग और तीरंदाजी प्रतियोगिता आयोजित करने की तैयारी कर रही है।
इन प्रतियोगिताओं में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
प्रतियोगिता के माध्यम से महिलाओं में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, खेल भावना और आत्मविश्वास विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
हालांकि, प्रतियोगिता की निश्चित तारीख, आयोजन स्थल और प्रतिभागियों के चयन से संबंधित विस्तृत कार्यक्रम अभी सामने नहीं आया है।
संस्था की पहल से ग्रामीण क्षेत्र में खेल गतिविधियों के प्रति रुचि बढ़ने की उम्मीद है।
निशानेबाजी से बढ़ेगा महिलाओं का आत्मविश्वास
निशानेबाजी केवल लक्ष्य पर निशाना लगाने का खेल नहीं है। इसमें धैर्य, अनुशासन और लगातार अभ्यास की जरूरत होती है।
खेल विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित खेल प्रशिक्षण से प्रतिभागियों को अपनी क्षमताओं पर भरोसा बढ़ाने का अवसर मिलता है।
ग्रामीण महिलाओं के लिए यह अनुभव विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि उन्हें घर से बाहर निकलकर सामूहिक गतिविधियों में भाग लेने और नई चीजें सीखने का अवसर मिलता है।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाएं अपनी झिझक दूर करने और सार्वजनिक गतिविधियों में अधिक सक्रिय होने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।
इसके साथ ही वे परिवार और समाज में अन्य महिलाओं को खेलों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं।
गांव की बेटियों के लिए बनेंगी प्रेरणा
देउरा गांव में चल रही इस पहल का असर केवल प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं तक सीमित नहीं रह सकता।
गांव की बेटियों के लिए भी यह एक सकारात्मक उदाहरण बन सकता है।
जब वे अपने आसपास की महिलाओं को खेल गतिविधियों में भाग लेते हुए देखेंगी, तो उनमें भी खेलों के प्रति रुचि विकसित हो सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा की कमी नहीं होती, लेकिन कई बार सुविधाओं और अवसरों के अभाव में खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ पाते।
ऐसे में स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं का आयोजन खेल प्रतिभाओं को सामने लाने में सहायक हो सकता है।
हालांकि, प्रतिभागियों को पेशेवर प्रतियोगिताओं तक पहुंचाने के लिए आगे प्रशिक्षित कोच, नियमित अभ्यास और मान्यता प्राप्त प्रतियोगिताओं की आवश्यकता होगी।
खेल के साथ अनुशासन और सुरक्षा का महत्व
राइफल शूटिंग एक प्रतिस्पर्धी खेल है, लेकिन इसमें सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है।
किसी भी शूटिंग रेंज में प्रशिक्षण के दौरान योग्य प्रशिक्षकों की निगरानी, निर्धारित सुरक्षा नियमों और उपयुक्त खेल उपकरणों का उपयोग किया जाना चाहिए।
विशेष रूप से शुरुआती प्रतिभागियों को सुरक्षित वातावरण में प्रशिक्षण उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।
खेल के नियमों की समझ और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन से प्रतिभागियों में अनुशासन विकसित होता है।
राइफल शूटिंग को आत्मरक्षा के प्रशिक्षण से अलग समझना भी आवश्यक है। इसका प्रमुख उद्देश्य खेल कौशल, सटीकता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता विकसित करना होता है।
ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा नया मंच
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं होते। उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए अवसर और मंच उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
ग्रीन आर्मी की यह पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न परिवारों और सामाजिक पृष्ठभूमियों की महिलाएं एक साथ गतिविधियों में हिस्सा ले रही हैं।
इससे सामूहिक भागीदारी और आपसी सहयोग की भावना को बढ़ावा मिल सकता है।
यदि भविष्य में नियमित प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं, तो महिलाओं के बीच खेलों को लेकर उत्साह और बढ़ने की संभावना है।
महिला सशक्तीकरण को मिलेगी नई दिशा
ग्रामीण महिला सशक्तीकरण का अर्थ केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना नहीं, बल्कि महिलाओं को निर्णय लेने, अपनी प्रतिभा पहचानने और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होने का अवसर देना भी है।
वाराणसी के देउरा गांव में चल रहा निशानेबाजी प्रशिक्षण इसी सोच से जुड़ा प्रयास है।
इस पहल में भाग लेने वाली महिलाएं अपने परिवार और गांव में खेलों के महत्व को लेकर सकारात्मक संदेश पहुंचा सकती हैं।
आने वाले समय में यदि प्रशिक्षण की निरंतरता बनी रहती है और प्रतिभागियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर मिलते हैं, तो उनमें से कुछ महिलाएं निशानेबाजी को गंभीर खेल गतिविधि के रूप में भी अपना सकती हैं।
अब प्रतियोगिता में दिखेगा महिलाओं का हुनर
देउरा गांव की शूटिंग रेंज में करीब 400 महिलाओं के प्रशिक्षण के बाद अब प्रस्तावित राइफल शूटिंग और तीरंदाजी प्रतियोगिता पर नजरें टिकी हैं।
ग्रीन आर्मी की इस पहल ने ग्रामीण महिलाओं को अपनी क्षमता पहचानने और खेलों से जुड़ने का अवसर दिया है।
कभी घर की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब आत्मविश्वास के साथ खेल मैदान में कदम रख रही हैं।
इस प्रयास की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि महिलाओं को आगे भी सुरक्षित प्रशिक्षण, पर्याप्त संसाधन और प्रतियोगिताओं में भागीदारी के अवसर कितने नियमित रूप से उपलब्ध होते हैं।
फिलहाल वाराणसी की इन ग्रामीण महिलाओं ने यह संदेश दिया है कि सही अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर वे खेल सहित हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।





