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उत्तर प्रदेश : गोरखपुर में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। यहां एक महिला से सहायक अध्यापिका की नौकरी लगवाने का झांसा देकर चार लाख रुपये ठग लिए गए। आरोप है कि शिक्षा विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने प्रबंधकीय कोटे से नियुक्ति कराने का भरोसा दिलाकर महिला से नकद और ऑनलाइन माध्यम से रकम ली।
ठगी का खुलासा तब हुआ जब महिला को दिए गए नियुक्ति पत्र और अन्य दस्तावेज फर्जी निकले। इसके बाद पीड़िता ने अपने पैसे वापस मांगे तो आरोपी ने कथित तौर पर गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता की शिकायत पर गोरखनाथ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
नौकरी का झांसा देकर लिए रुपये
जानकारी के अनुसार, पीड़ित महिला को सहायक अध्यापिका की नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था। आरोप है कि शिक्षा विभाग में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने उसे जवाहर इंटर कॉलेज, पादरी बाजार में प्रबंधकीय कोटे से नियुक्ति कराने की बात कही।
आरोपी ने महिला को विश्वास दिलाया कि वह विभागीय स्तर पर उसकी नौकरी लगवा सकता है। इसके बाद अलग-अलग समय पर उससे चार लाख रुपये ले लिए गए।
बताया जा रहा है कि रकम का कुछ हिस्सा नकद और कुछ ऑनलाइन माध्यम से लिया गया।
फर्जी नियुक्ति पत्र थमाया
महिला का आरोप है कि रुपये लेने के बाद आरोपी ने उसे सहायक अध्यापिका पद पर नियुक्ति का कथित पत्र दिया। इसके अलावा जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) के हस्ताक्षर वाला एक कथित कार्यमुक्त आदेश भी सौंपा गया।
जब महिला ने इन दस्तावेजों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की तो उसे दस्तावेजों के फर्जी होने की जानकारी मिली।
इसके बाद महिला को अपने साथ धोखाधड़ी का एहसास हुआ।
रुपये वापस मांगने पर धमकी का आरोप
पीड़िता ने बताया कि जब उसने आरोपी से अपने चार लाख रुपये वापस मांगे तो उसने कथित तौर पर टालमटोल शुरू कर दी।
आरोप है कि बाद में आरोपी ने महिला के साथ गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद पीड़िता ने पुलिस से शिकायत की।
गोरखनाथ पुलिस ने दर्ज किया केस
पीड़िता की तहरीर के आधार पर शनिवार को गोरखनाथ थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच में आरोपी और पीड़िता के बीच हुए लेनदेन, दस्तावेजों की सत्यता और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों को खंगाला जा रहा है।
दस्तावेजों की होगी जांच
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में दिए गए नियुक्ति पत्र और कथित कार्यमुक्त आदेश की जांच कराई जाएगी। यह पता लगाया जाएगा कि दस्तावेज कहां तैयार किए गए और उनमें किस तरह की जालसाजी की गई।
इसके अलावा पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस ठगी में कोई और व्यक्ति शामिल है या नहीं।
शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारी पर आरोप
मामले में जिस व्यक्ति पर आरोप लगाया गया है, वह शिक्षा विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बताया जा रहा है। ऐसे में पुलिस विभागीय स्तर पर भी जानकारी जुटा सकती है।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है।
नौकरी के नाम पर ठगी से सावधान रहने की अपील
इस घटना के बाद एक बार फिर नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली ठगी के मामलों को लेकर सवाल उठे हैं। पुलिस लगातार लोगों से अपील करती रही है कि किसी भी सरकारी नौकरी के लिए किसी व्यक्ति को पैसे न दें और नियुक्ति प्रक्रिया की आधिकारिक पुष्टि जरूर करें।
फिलहाल गोरखनाथ पुलिस मामले की जांच में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस ठगी में कितने लोग शामिल हैं और फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार किए गए।





