उत्तर प्रदेश

'संत क्यों नहीं बोले?' हनुमान डांस विवाद पर पवन पांडेय का बड़ा हमला

Ratna Netam
5 Aug 2026 8:15 PM IST
संत क्यों नहीं बोले? हनुमान डांस विवाद पर पवन पांडेय का बड़ा हमला
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अयोध्या : संसद में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर हुए राजनीतिक विवाद के बाद अयोध्या की सियासत और गर्म हो गई है। इस मुद्दे पर संतों के विरोध-प्रदर्शन के बीच समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय ‘पवन’ ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और संत समाज के एक वर्ग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में धार्मिक भावनाओं का हवाला देने वाले लोग चुनिंदा घटनाओं पर ही प्रतिक्रिया देते हैं, जबकि अन्य मामलों में चुप्पी साध लेते हैं।
पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने कहा कि हाल के दिनों में भाजपा नेताओं के कार्यक्रमों के दौरान धार्मिक प्रतीकों और पात्रों का जिस तरह उपयोग किया गया, उस समय किसी ने इसे सनातन धर्म का अपमान नहीं बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी बच्चे का हाथ पकड़ते हैं तो उसे भगवान राम या सनातन धर्म का अपमान नहीं कहा जाता। इसी तरह भाजपा के एक कार्यक्रम में हनुमान के वेशधारी कलाकार से नृत्य करवाया गया, तब भी किसी संत या धार्मिक संगठन ने विरोध नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अब वही लोग अलग-अलग घटनाओं पर चयनात्मक तरीके से प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
पवन पांडेय ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यक्रम के दौरान हनुमान के वेशधारी कलाकार से नृत्य कराया गया, लेकिन उस समय किसी ने इसे धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन नहीं माना। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ संत राजनीतिक दबाव में रहते हैं और खुलकर अपनी राय नहीं रखते। उन्होंने कहा कि यदि वे भाजपा के खिलाफ बोलेंगे तो उन्हें मिलने वाली सुविधाओं और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने सांसद पप्पू यादव द्वारा किए गए प्रदर्शन का भी जिक्र किया। पवन पांडेय ने स्वीकार किया कि प्रदर्शन के दौरान भगवान राम का चित्र अनजाने में जमीन को छू गया था, जो नहीं होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यदि इससे किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तो वे इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं और इसे जानबूझकर की गई घटना नहीं मानते। हालांकि उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसके बाद जिस तरह से सांसद के चित्र पर जूते-चप्पल चलाए गए, वह भी लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सम्मान के खिलाफ था।
समाजवादी पार्टी नेता ने भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब भाजपा से जुड़े लोगों पर धार्मिक व्यक्तियों के अपमान के आरोप लगते हैं, तब धार्मिक संगठनों की ओर से वैसी प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि यदि किसी संत या पुजारी के साथ अभद्र व्यवहार होता है, तब भी कई संगठन मौन रहते हैं। उनके अनुसार, धार्मिक आस्था के मुद्दों पर सभी के लिए समान मानदंड होने चाहिए।
इस पूरे विवाद के बीच उन्होंने संतों के प्रदर्शन के दौरान सांसद अवधेश प्रसाद के पोस्टर पर कालिख पोतने और जूते मारने की घटना की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता के जनादेश का भी अपमान है। पवन पांडेय ने कहा कि किसी भी राजनीतिक मतभेद को अभद्र प्रदर्शन का रूप देना उचित नहीं है।
इससे पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस विवाद को लेकर भाजपा पर निशाना साधा था। उन्होंने पार्टी मुख्यालय में भगवान राम और बजरंग बली का अभिनय करने वाले कलाकारों को सम्मानित करते हुए कहा था कि कलाकारों की प्रतिभा का राजनीतिक उपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने कलाकारों के सम्मान और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण की बात करते हुए भविष्य में ऐसे कलाकारों को प्रोत्साहन देने का भरोसा भी जताया था।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद और उससे जुड़े विरोध-प्रदर्शनों के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर भाजपा इस मुद्दे को धार्मिक आस्था से जोड़कर देख रही है, वहीं समाजवादी पार्टी इसे राजनीतिक और सामाजिक दोहरे मानदंडों का मामला बता रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।
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