उत्तर प्रदेश

सरकारी मदद मांगी तो लेखपाल ने रख दी शर्मनाक शर्त

Kavita2
11 Sept 2026 9:13 AM IST
सरकारी मदद मांगी तो लेखपाल ने रख दी शर्मनाक शर्त
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रायबरेली। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले से एक गरीब परिवार की मजबूरी का फायदा उठाने का गंभीर मामला सामने आया है। लालगंज तहसील क्षेत्र में रहने वाले परिवार ने एक लेखपाल पर सरकारी सहायता दिलाने के बदले रिश्वत मांगने और पैसे देने में असमर्थता जताने पर परिवार की बेटी को अपने पास भेजने की आपत्तिजनक मांग करने का आरोप लगाया है। परिवार का दावा है कि जब वह इसकी शिकायत लेकर उपजिलाधिकारी के पास पहुंचा तो वहां भी उसकी बात को गंभीरता से नहीं सुना गया। मामले ने राजनीतिक रंग पकड़ लिया है और प्रकरण की जांच क्षेत्राधिकारी लालगंज को सौंप दी गई है।

पीड़ित परिवार आर्थिक रूप से कमजोर बताया जा रहा है। परिवार का कहना है कि उसे सरकारी योजना के तहत सहायता की आवश्यकता थी। इसी सिलसिले में उसने संबंधित लेखपाल से संपर्क किया। आरोप है कि लेखपाल ने सरकारी काम कराने के बदले पहले रिश्वत की मांग की। परिवार ने अपनी गरीबी का हवाला देते हुए रकम देने में असमर्थता जताई और काम नियमानुसार कराने की गुहार लगाई।

आरोप है कि परिवार की मजबूरी जानने के बाद लेखपाल ने बेहद आपत्तिजनक बात कही। परिवार के मुताबिक लेखपाल ने कहा कि यदि सरकारी मदद से जुड़ा काम कराना है तो अपनी जवान बेटी को उसके पास भेजना होगा। यह बात सुनकर परिवार के सदस्य स्तब्ध रह गए। उन्होंने इस कथित मांग को अपनी बेटी के सम्मान और परिवार की गरिमा पर हमला बताया। परिवार का कहना है कि आर्थिक तंगी का फायदा उठाकर उससे इस तरह की मांग की गई।

लेखपाल के कथित व्यवहार से परेशान परिवार ने मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से करने का फैसला किया। परिजन लालगंज तहसील पहुंचे और उपजिलाधिकारी को पूरी घटना बताने का प्रयास किया। परिवार का आरोप है कि वहां भी उसके साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया। शिकायतकर्ताओं के अनुसार एसडीएम ने उनकी गंभीर शिकायत को संवेदनशीलता से सुनने के बजाय अभद्रता की और बातचीत के दौरान हंसने लगे।

परिवार का कहना है कि वह न्याय मिलने की उम्मीद लेकर प्रशासनिक अधिकारी के पास गया था, लेकिन वहां हुए व्यवहार ने उसकी पीड़ा और बढ़ा दी। परिजनों ने सवाल उठाया कि यदि किसी गरीब परिवार की बेटी के सम्मान से जुड़ी शिकायत भी गंभीरता से नहीं सुनी जाएगी तो वह न्याय के लिए कहां जाएगा। हालांकि लेखपाल और एसडीएम पर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

घटना से जुड़ी जानकारी कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किए जाने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। पोस्ट में परिवार की आर्थिक स्थिति और उसके द्वारा लगाए गए आरोपों का उल्लेख किया गया। मामला सोशल मीडिया पर सामने आते ही प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ गई। लोगों ने आरोपों की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।

कांग्रेस ने मामले को लेकर प्रदेश सरकार और प्रशासन को घेरते हुए सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि गरीब परिवार को सरकारी सहायता दिलाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि मदद के बदले रिश्वत या किसी महिला को लेकर आपत्तिजनक मांग की जाती है तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। पार्टी ने परिवार को सुरक्षा और न्याय देने की मांग भी उठाई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच क्षेत्राधिकारी लालगंज को सौंप दी गई है। जांच के दौरान परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज किए जाने की संभावना है। इसके साथ ही संबंधित लेखपाल और शिकायत के समय कार्यालय में मौजूद अधिकारियों एवं कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा सकती है। शिकायत से जुड़े किसी ऑडियो, वीडियो, दस्तावेज या अन्य साक्ष्य के उपलब्ध होने पर उनकी भी जांच की जाएगी।

जांच अधिकारी के सामने यह पता लगाने की चुनौती होगी कि परिवार किस सरकारी सहायता के लिए आवेदन कर रहा था और उसका काम किस स्तर पर लंबित था। यह भी देखा जाएगा कि लेखपाल ने परिवार से किसी रकम की मांग की थी या नहीं। परिवार की बेटी को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के संबंध में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयान महत्वपूर्ण होंगे।

एसडीएम पर लगाए गए अभद्रता के आरोप की भी अलग से जांच आवश्यक मानी जा रही है। शिकायत सुनते समय कार्यालय में कौन-कौन मौजूद था और वहां क्या बातचीत हुई, इसकी जानकारी जुटाई जा सकती है। यदि कार्यालय में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं तो उनकी रिकॉर्डिंग भी जांच में सहायक साबित हो सकती है। अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।

यह प्रकरण प्रशासनिक व्यवस्था में गरीब और असहाय लोगों के प्रति संवेदनशीलता की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक बिना किसी रिश्वत और दबाव के पहुंचना चाहिए। अधिकारी और कर्मचारी जनता की सहायता के लिए नियुक्त होते हैं। किसी परिवार की आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाने का आरोप सामने आना व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

परिवार अब जांच पूरी होने और न्याय मिलने का इंतजार कर रहा है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने अपनी बेटी के सम्मान के लिए आवाज उठाई है और वे चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल सभी आरोप जांच के दायरे में हैं और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना बाकी है।

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