उत्तर प्रदेश

18 साल बाद मध्य गंगा नहर में लौटा पानी, किसानों के चेहरे खिले

Saba Naaz
17 July 2026 4:51 PM IST
18 साल बाद मध्य गंगा नहर में लौटा पानी, किसानों के चेहरे खिले
x

संभल। जिले के किसानों के लिए लंबे इंतजार के बाद बड़ी राहत की खबर सामने आई है। 18 साल से अधूरी पड़ी मध्य गंगा नहर परियोजना अब आगे बढ़ने लगी है। अमरोहा में नहर की अधूरी खुदाई पूरी होने के बाद सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने परियोजना के द्वितीय चरण के परीक्षण के लिए मुख्य नहर में पानी छोड़ दिया है। पानी पहुंचने के बाद संभल जिले की चंदौसी और बहजोई शाखाओं में भी परीक्षण संचालन शुरू कर दिया गया है।

बुधवार और गुरुवार से नहर में पानी के प्रवाह की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों के अनुसार, बिजनौर स्थित गंगा बैराज से छोड़ा गया पानी अमरोहा होते हुए आगे बढ़ रहा है। गुरुवार सुबह छह बजे चंदौसी शाखा में पहली बार और बहजोई शाखा में चौथी बार परीक्षण के तौर पर पानी छोड़ा गया। आने वाले दिनों में यह पानी बहजोई शाखा से जुड़े गांवों तक पहुंचने की उम्मीद है।

सिंचाई विभाग का कहना है कि यदि परीक्षण सफल रहता है तो नवंबर 2026 से मध्य गंगा नहर का नियमित संचालन शुरू किया जा सकता है। इसके बाद संभल समेत आसपास के जिलों के किसानों को सिंचाई के लिए स्थायी जल स्रोत उपलब्ध हो सकेगा।

मध्य गंगा नहर परियोजना की शुरुआत वर्ष 2008 में की गई थी। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य मुरादाबाद, अमरोहा और संभल जिले के किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना और लगातार गिरते भूजल स्तर को सुधारना था। लेकिन भूमि अधिग्रहण विवादों के कारण अमरोहा जिले के खूबी, रामपुर घाना और मोहनपुर गांवों में करीब 2.68 किलोमीटर लंबी नहर की खुदाई अधूरी रह गई थी। यही अधूरा कार्य वर्षों तक परियोजना की सबसे बड़ी बाधा बना रहा।

लंबे समय तक काम अटका रहने के कारण परियोजना की लागत भी काफी बढ़ गई। शुरुआत में करीब 1100 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना का खर्च बढ़कर लगभग पांच हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया। जुलाई से सितंबर 2024 के बीच बहजोई शाखा का परीक्षण किया गया था, लेकिन नियमित पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी थी।

अब अमरोहा में अधूरा काम पूरा होने के बाद परियोजना को गति मिली है। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर नहर में पानी के संचालन का निरीक्षण भी किया। मुख्य अभियंता कृष्ण मोहन असल, अधीक्षण अभियंता रामकृष्ण वर्मा और सिंचाई विभाग के अन्य अधिकारियों ने रेगुलेटर पर पहुंचकर पूरी व्यवस्था का जायजा लिया।

इस परियोजना से संभल जिले के किसानों को सबसे अधिक फायदा मिलने की उम्मीद है। जिले के सात विकासखंड डार्क जोन में शामिल हैं, जहां भूजल के अत्यधिक दोहन पर रोक है। ऐसे में नहर से मिलने वाला पानी किसानों के लिए बड़ी राहत साबित होगा। इससे खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और भूजल पर निर्भरता कम होगी।

मध्य गंगा नहर परियोजना से संभल जिले के करीब 70,917 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलेगा। वहीं पूरे प्रोजेक्ट से मुरादाबाद, अमरोहा और संभल के करीब 1850 गांवों के 4.10 लाख किसानों को फायदा पहुंचने की उम्मीद है। इनमें अकेले संभल जिले के तीन लाख से अधिक किसान शामिल हैं।

नहर की बहजोई शाखा की लंबाई करीब 50.8 किलोमीटर और चंदौसी शाखा की लंबाई लगभग 60 किलोमीटर है। इसकी क्षमता 4308 क्यूसेक पानी ले जाने की है। इससे भविष्य में किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा।

किसानों का कहना है कि वर्षों से वे इस परियोजना के पूरा होने का इंतजार कर रहे थे। नहर में पानी आने से खेती को नई उम्मीद मिली है। अब उन्हें ट्यूबवेल और भूजल पर कम निर्भर रहना पड़ेगा।

सिंचाई विभाग ने उम्मीद जताई है कि परीक्षण सफल होने के बाद निर्धारित समय पर नियमित संचालन शुरू कर दिया जाएगा। मध्य गंगा नहर परियोजना के शुरू होने से क्षेत्र की कृषि व्यवस्था मजबूत होगी और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

Next Story