- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- प्रयागराज में...
प्रयागराज में गंगा-यमुना का जलस्तर लगातार तीसरे दिन घटा, फाफामऊ में स्थिरता से बढ़ी चिंता

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों के जलस्तर में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि नदियों का पानी कम होने से प्रशासन और लोगों को कुछ राहत मिली है, लेकिन गंगा के फाफामऊ क्षेत्र में जलस्तर स्थिर होने और नैनी में यमुना के घटने की रफ्तार धीमी पड़ने से चिंता भी बढ़ गई है।
मंगलवार रात आठ बजे तक जारी आंकड़ों के अनुसार, यमुना नदी का जलस्तर नैनी में 79.56 मीटर दर्ज किया गया। वहीं गंगा नदी का जलस्तर फाफामऊ में 80.67 मीटर पर स्थिर रहा। इसके अलावा छतनाग में गंगा का जलस्तर 79.10 मीटर रिकॉर्ड किया गया।
इससे पहले मंगलवार शाम चार बजे फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 80.68 मीटर, छतनाग में 79.18 मीटर और नैनी में यमुना का जलस्तर 79.60 मीटर दर्ज किया गया था। आंकड़ों के मुताबिक, कुछ स्थानों पर जलस्तर में कमी तो आई, लेकिन फाफामऊ में गंगा के स्थिर रहने और नैनी में यमुना की गिरावट धीमी होने से हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अधिकारियों के अनुसार, फाफामऊ में गंगा का जलस्तर स्थिर होने और नैनी में यमुना के घटने की गति कम होने के पीछे स्पष्ट कारणों की जानकारी फिलहाल नहीं मिल पाई है। विभाग लगातार दोनों नदियों के जलस्तर की निगरानी कर रहा है और किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी के दौरान शहर के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ जाती है। कई बार नदी का पानी किनारे के इलाकों तक पहुंच जाता है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जलस्तर में गिरावट लोगों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है।
हालांकि प्रशासन अभी भी सतर्क है। बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीमें लगातार जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। नदी किनारे बसे इलाकों में भी निगरानी बढ़ाई गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कदम उठाया जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव कई कारणों से होता है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश, बांधों से छोड़ा गया पानी और स्थानीय वर्षा की स्थिति का असर गंगा और यमुना के प्रवाह पर पड़ता है। यही वजह है कि जलस्तर में गिरावट के बाद भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहता है।
प्रयागराज में मानसून के दौरान गंगा और यमुना का जलस्तर प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण निगरानी बिंदु रहता है। दोनों नदियों के किनारे बड़ी आबादी रहती है, इसलिए जलस्तर में मामूली बदलाव भी स्थानीय लोगों के लिए अहम होता है।
फिलहाल राहत की बात यह है कि दोनों प्रमुख नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ नहीं रहा है और तीसरे दिन भी गिरावट का सिलसिला जारी है। लेकिन फाफामऊ में गंगा का स्थिर होना और नैनी में यमुना की धीमी गिरावट को देखते हुए अधिकारियों की नजर स्थिति पर बनी हुई है।
प्रशासन का कहना है कि नदी के जलस्तर में किसी भी बदलाव की जानकारी समय-समय पर साझा की जाएगी। लोगों से भी अपील की गई है कि वे नदी के किनारे जाने से बचें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति और नदियों के प्रवाह के आधार पर जलस्तर में और बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल प्रयागराज में बाढ़ की स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन निगरानी लगातार जारी है।





