उत्तर प्रदेश

गंगाजल हाथ में लेकर रिश्वत बांटने की कसम का वीडियो वायरल

Kavita2
27 Aug 2026 3:12 PM IST
गंगाजल हाथ में लेकर रिश्वत बांटने की कसम का वीडियो वायरल
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उत्तर प्रदेश : शाहजहांपुर नगर निगम से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली और भ्रष्टाचार को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो में नगर निगम के कुछ पार्षद गंगाजल हाथ में लेकर कथित तौर पर रिश्वत के पैसों को आपस में ईमानदारी से बांटने की बात करते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच इसकी चर्चा तेज हो गई है।

वीडियो में कुछ लोग एक जगह बैठे दिखाई दे रहे हैं। उनके हाथ में गंगाजल की बोतल नजर आ रही है। दावा किया जा रहा है कि इसी दौरान वे किसी काम के बदले मिलने वाली रकम को आपस में बांटने की कसम खा रहे हैं। हालांकि वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें मौजूद लोगों की पहचान की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच का विषय है।

वीडियो वायरल होने के बाद मचा हड़कंप



सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही नगर निगम की राजनीति में हलचल मच गई। लोगों ने जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। जनता का कहना है कि जिन नेताओं को विकास कार्यों और लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए चुना जाता है, अगर उन्हीं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि वीडियो में दिख रहे लोग वास्तव में जनप्रतिनिधि हैं और भ्रष्टाचार से जुड़ी कोई गतिविधि में शामिल पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

गंगाजल की कसम ने बढ़ाई चर्चा

भारतीय समाज में गंगाजल को पवित्रता और सत्य का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में रिश्वत के पैसों के बंटवारे को लेकर गंगाजल हाथ में लेने का दावा सामने आने के बाद यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या भ्रष्टाचार को छिपाने या आपसी भरोसे के लिए इस तरह की कसम का इस्तेमाल किया जा रहा था।

विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले को लेकर सरकार और प्रशासन से जवाब मांगा है। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए।

जांच के बाद ही साफ होगी सच्चाई

हालांकि वायरल वीडियो को लेकर अभी कई सवाल बने हुए हैं। यह वीडियो कब का है, इसमें दिख रहे लोग कौन हैं और बातचीत का वास्तविक संदर्भ क्या है, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो पाएगी। किसी भी व्यक्ति पर आरोप साबित होने से पहले तथ्यों की जांच जरूरी है।

प्रशासन की ओर से मामले की जांच कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। जांच में वीडियो की सत्यता, उसमें मौजूद लोगों की पहचान और कथित बातचीत के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

जनता के भरोसे पर सवाल

जनप्रतिनिधियों को जनता अपने क्षेत्र के विकास और समस्याओं के समाधान के लिए चुनती है। ऐसे में अगर किसी निर्वाचित प्रतिनिधि पर भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगते हैं तो इसका सीधा असर जनता के विश्वास पर पड़ता है।

शाहजहांपुर का यह मामला भी इसी वजह से चर्चा में है। सोशल मीडिया के दौर में किसी भी घटना का वीडियो तेजी से लोगों तक पहुंच जाता है और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पहले से ज्यादा बढ़ गई है।

फिलहाल सभी की नजर प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है। अगर वीडियो में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो यह नगर निगम की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

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