उत्तर प्रदेश

लखनऊ के चर्चित विवेक तिवारी कांड में फैसला परिवार ने दी चुनौती की बात

Ratna Netam
17 Sept 2026 5:35 PM IST
लखनऊ के चर्चित विवेक तिवारी कांड में फैसला परिवार ने दी चुनौती की बात
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चर्चित **विवेक तिवारी हत्याकांड** मामले में अदालत के फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है। कोर्ट ने मामले में आरोपी पुलिसकर्मियों को लेकर फैसला सुनाया है। फैसले में एक सिपाही को बरी कर दिया गया, जबकि दूसरे आरोपी को हत्या की धारा 302 से राहत मिली है।अदालत के इस निर्णय के बाद विवेक तिवारी के परिवार ने असंतोष जताते हुए फैसले को चुनौती देने की बात कही है। परिवार का कहना है कि वह न्याय के लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाएगा।
क्या था विवेक तिवारी हत्याकांड?
विवेक तिवारी हत्याकांड सितंबर 2018 में सामने आया था। उस समय यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया था।आरोप के अनुसार, लखनऊ में देर रात पुलिसकर्मियों की चेकिंग के दौरान एप्पल कंपनी के कर्मचारी विवेक तिवारी की गोली लगने से मौत हो गई थी।घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और कार्रवाई को लेकर सवाल उठे थे। मामले की जांच के बाद आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई थी।
दो पुलिसकर्मियों पर लगा था आरोप
इस मामले में तत्कालीन कांस्टेबल **प्रशांत चौधरी** और **संदीप कुमार** आरोपी बनाए गए थे।जांच के बाद दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा चला। अदालत में अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की ओर से अपनी-अपनी दलीलें पेश की गईं।मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली, जिसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया।
अदालत के फैसले में क्या हुआ?
अदालत ने एक आरोपी पुलिसकर्मी को मामले से बरी कर दिया। वहीं दूसरे आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत लगाए गए हत्या के आरोप से राहत मिली।अदालत के फैसले में आरोपों, पेश किए गए सबूतों और कानूनी तथ्यों पर विचार किया गया।किसी भी आपराधिक मामले में अदालत फैसला उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर करती है।
परिवार ने जताई नाराजगी
फैसले के बाद विवेक तिवारी के परिवार ने असहमति जताई है। परिवार का कहना है कि वह अदालत के निर्णय को ऊपरी अदालत में चुनौती देगा।परिवार लंबे समय से इस मामले में न्याय की मांग करता रहा है। उनका पक्ष है कि घटना में जिम्मेदार लोगों को उचित सजा मिलनी चाहिए।
कानूनी प्रक्रिया में आगे क्या होगा?
किसी भी अदालत के फैसले के खिलाफ संबंधित पक्ष को उच्च अदालत में अपील का अधिकार होता है।परिवार की ओर से अगर फैसले को चुनौती दी जाती है तो उच्च अदालत मामले के रिकॉर्ड, साक्ष्यों और निचली अदालत के फैसले की समीक्षा कर सकती है।
मामले ने खींचा था राष्ट्रीय ध्यान
विवेक तिवारी हत्याकांड सामने आने के बाद पुलिस की कार्यशैली, कानून व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर देशभर में चर्चा हुई थी।इस घटना के बाद पुलिस सुधार, जवाबदेही और जांच प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल उठे थे।
पुलिस विभाग में भी हुई थी कार्रवाई
घटना के बाद आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई शुरू की गई थी। सरकार और पुलिस विभाग की ओर से मामले को गंभीरता से लिया गया था।ऐसे मामलों में पुलिसकर्मियों की भूमिका और अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है।
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