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बारिश में सब्जियों के दाम ने बिगाड़ा रसोई का बजट, गोभी 120 और हरी मिर्च 100 रुपये किलो

गोपालगंज। बरसात के मौसम में सब्जियों की कीमतों में अचानक आई तेजी ने आम परिवारों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। पिछले करीब आठ दिनों में हरी सब्जियों के दाम तेजी से बढ़े हैं और कई सब्जियों की कीमत लगभग दोगुनी हो गई है। बाजार में बढ़ती महंगाई का असर अब लोगों की खरीदारी पर साफ दिखाई देने लगा है। पहले जहां परिवार रोजाना जरूरत के मुताबिक अलग-अलग हरी सब्जियां खरीद लेते थे, वहीं अब कीमतों को देखते हुए लोग मात्रा कम करने या सस्ती सब्जियों का विकल्प तलाशने को मजबूर हैं।
मंगलवार को बाजार में गोभी करीब 120 रुपये किलो, हरी मिर्च 100 रुपये किलो, बैगन 60 रुपये किलो और परवल 70 से 75 रुपये किलो तक बिकता रहा। सब्जियों के बढ़ते भाव से गृहणियों के साथ-साथ छोटे परिवारों और सीमित आय वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
आठ दिनों में तेजी से बढ़े दाम
सब्जी कारोबारियों के अनुसार पिछले करीब आठ दिनों में बाजार की स्थिति तेजी से बदली है। लगातार बारिश के कारण स्थानीय स्तर पर सब्जियों की आवक प्रभावित हुई है। खेतों में पानी भरने और फसलों को नुकसान पहुंचने के कारण मंडियों में पहले की तुलना में कम माल पहुंच रहा है।
आवक घटने के साथ ही थोक बाजार में कीमतें बढ़ने लगीं। इसका असर फुटकर बाजार तक पहुंचते-पहुंचते और अधिक दिखाई दे रहा है। कारोबारियों का कहना है कि यदि बारिश का सिलसिला आगे भी जारी रहा तो सब्जियों के दाम में और बढ़ोतरी हो सकती है।
गोभी 120 रुपये किलो
सबसे अधिक उछाल कुछ हरी सब्जियों में देखने को मिल रहा है। गोभी की कीमत बढ़कर करीब 120 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। कुछ दिन पहले तक अपेक्षाकृत कम कीमत पर मिलने वाली गोभी अब आम उपभोक्ता के लिए महंगी सब्जियों की सूची में शामिल हो गई है।
इसी तरह हरी मिर्च भी 100 रुपये किलो तक पहुंच गई है। रसोई में कम मात्रा में इस्तेमाल होने के बावजूद हरी मिर्च की बढ़ी कीमत का असर लोगों के मासिक बजट पर पड़ रहा है।
परवल और बैगन भी महंगे
परवल के भाव भी बढ़कर 70 से 75 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं। बैगन करीब 60 रुपये किलो बिक रहा है। कारोबारियों का कहना है कि बारिश के कारण खेतों से सब्जियां निकालने और उन्हें मंडी तक पहुंचाने में भी परेशानी हो रही है।
कई इलाकों में खेतों में पानी जमा होने के कारण किसान समय पर फसल नहीं निकाल पा रहे हैं। वहीं लगातार नमी के कारण सब्जियों के खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है। इससे अच्छी गुणवत्ता वाली सब्जियों की उपलब्धता कम हो रही है।
आम लोगों की थाली से कम हुई हरी सब्जियां
सब्जियों के बढ़ते दाम का सीधा असर आम लोगों की रसोई पर पड़ा है। महंगाई के कारण कई परिवारों ने सब्जियों की खरीदारी की मात्रा कम कर दी है। कुछ लोग महंगी सब्जियों के बजाय आलू, कद्दू या अन्य अपेक्षाकृत सस्ती सब्जियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
गृहणियों का कहना है कि सब्जियों के दाम अचानक बढ़ने से रोजाना का बजट बनाना मुश्किल हो गया है। एक-दो सब्जियों की कीमत बढ़ने पर किसी तरह संतुलन बनाया जा सकता है, लेकिन जब कई सब्जियां एक साथ महंगी हो जाएं तो इसका सीधा असर पूरे घरेलू खर्च पर पड़ता है।
स्थानीय आवक में कमी बनी वजह
सब्जी विक्रेताओं के मुताबिक कीमतों में तेजी का प्रमुख कारण आवक में कमी है। स्थानीय क्षेत्रों से आने वाली सब्जियों की मात्रा कम हुई है। इसके अलावा बाहर से आने वाली सब्जियों की कीमत भी परिवहन और मौसम संबंधी समस्याओं के कारण बढ़ी है।
बारिश के दौरान सड़क और परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने से मंडियों तक माल पहुंचने में अतिरिक्त समय और खर्च लग सकता है। इसका असर अंततः खुदरा बाजार की कीमतों पर पड़ता है।
आगे और महंगाई की आशंका
कारोबारियों को आशंका है कि यदि आने वाले दिनों में बारिश कम नहीं हुई तो सब्जियों की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। लगातार बारिश से फसलों को नुकसान होने पर स्थानीय आवक और घट सकती है। ऐसी स्थिति में बाहर से आने वाली सब्जियों पर निर्भरता बढ़ेगी और परिवहन लागत भी कीमतों को प्रभावित करेगी।
हालांकि यदि मौसम में सुधार होता है और खेतों से सब्जियों की आवक सामान्य हो जाती है तो कीमतों में कुछ राहत मिलने की संभावना है। फिलहाल बाजार में उपभोक्ताओं को ऐसी राहत का इंतजार है।
खरीदारी में सावधानी बरत रहे ग्राहक
बढ़ती कीमतों के बीच ग्राहक अब सब्जियों की खरीदारी करते समय दाम और गुणवत्ता दोनों देख रहे हैं। कई लोग जरूरत के हिसाब से कम मात्रा में सब्जियां खरीद रहे हैं, जबकि कुछ ग्राहक एक साथ अधिक सब्जियां खरीदने के बजाय रोजाना की जरूरत के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं।
बारिश के मौसम में सब्जियों की कीमतों में आई तेजी ने एक बार फिर आम परिवारों के सामने महंगाई की चुनौती खड़ी कर दी है। गोभी 120 रुपये, हरी मिर्च 100 रुपये, परवल 70-75 रुपये और बैगन 60 रुपये किलो तक पहुंचने से रसोई का बजट प्रभावित हुआ है। आने वाले दिनों में बारिश और सब्जियों की आवक की स्थिति ही तय करेगी कि उपभोक्ताओं को राहत मिलती है या महंगाई की मार और बढ़ती है।





