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यूपीआईटीएस 2026 से वैश्विक बाजार में उत्तर प्रदेश की बड़ी छलांग, उद्योग जगत ने जताई उम्मीद

ग्रेटर नोएडा। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में पांच दिनों तक आयोजित उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला यानी यूपीआईटीएस 2026 संपन्न हो गया। 25 से 29 सितंबर तक चले इस आयोजन के बाद प्रदर्शनी स्टॉल समेट लिए गए हैं और देश-विदेश से पहुंचे खरीदार, उद्यमी तथा कारोबारी प्रतिनिधि अपने-अपने स्थानों के लिए लौट गए हैं। लेकिन उद्योग जगत का मानना है कि इस आयोजन का असर आने वाले दिनों में व्यापार, निवेश और निर्यात के रूप में देखने को मिलेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट की ओर से आयोजित इस मेले में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए उद्यमियों, एमएसएमई, हस्तशिल्पियों और निर्माताओं ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना था।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि यूपीआईटीएस अब केवल एक प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह कारोबार, नेटवर्किंग और वैश्विक खरीदारों से सीधे जुड़ने का बड़ा मंच बन गया है। उनका मानना है कि इस आयोजन ने उत्तर प्रदेश के उद्योगों को विश्व बाजार में अपनी पहचान मजबूत करने का अवसर दिया है।
पांच दिनों के दौरान बड़ी संख्या में कारोबारी बैठकें हुईं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यूपीआईटीएस 2026 में करीब 41,500 बी2बी बैठकें हुईं और लगभग 4,400 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों का अनुमानित मूल्य करीब 6,500 करोड़ रुपये बताया गया, जबकि संभावित कारोबार लगभग 15,500 करोड़ रुपये तक आंका गया।
मेले में करीब 5.99 लाख लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई। इसमें घरेलू कारोबारी खरीदारों के साथ विदेशी प्रतिनिधिमंडल भी शामिल रहे। इस स्तर की भागीदारी को आयोजन की बढ़ती लोकप्रियता और उत्तर प्रदेश के उत्पादों में बढ़ती कारोबारी रुचि से जोड़कर देखा जा रहा है।
यूपीआईटीएस के चौथे संस्करण में 2,400 से अधिक प्रदर्शकों ने हिस्सा लिया। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए उद्यमियों ने कपड़ा, हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, चमड़ा, फर्नीचर और अन्य औद्योगिक उत्पादों को प्रदर्शित किया।
इस बार आयोजन में छह पार्टनर देशों की भागीदारी ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहुंच बढ़ाई। विदेशी खरीदारों और व्यापारिक प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठकों से प्रदेश के उद्यमियों को निर्यात के नए अवसर तलाशने का मौका मिला।
मेले में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट और वन डिस्ट्रिक्ट वन कॉरपोरेशन से जुड़े उत्पाद भी प्रमुख आकर्षण रहे। उत्तर प्रदेश के 75 जिलों के उत्पादों को एक ही मंच पर प्रदर्शित किए जाने से स्थानीय उद्योगों और कारीगरों को सीधे खरीदारों तक पहुंचने का अवसर मिला।
उद्योग जगत का मानना है कि ऐसे आयोजनों का वास्तविक असर मेले के बाद दिखाई देता है। व्यापारिक बैठकों में बनी सहमति, शुरुआती पूछताछ और समझौते आगे जाकर वास्तविक ऑर्डर तथा निवेश में बदलते हैं। इसी वजह से अब उद्यमियों की नजर उन कारोबारी संपर्कों पर है, जो पांच दिनों के दौरान बने।
आईआईए से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में एमएसएमई की संख्या बहुत बड़ी है और इनमें से बड़ी संख्या ऐसे उद्यमों की है, जिन्हें बेहतर बाजार और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच की जरूरत है। यूपीआईटीएस ने इस अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
छोटे उद्यमियों के लिए विदेशी बाजार तक सीधे पहुंचना आसान नहीं होता। उन्हें मार्केटिंग, नेटवर्किंग और खरीदार तलाशने में कठिनाई आती है। ऐसे में एक ही स्थान पर विदेशी खरीदारों और कारोबारियों की मौजूदगी उनके लिए बड़ा अवसर बनती है।
इस आयोजन में बी2बी बैठकों पर विशेष जोर दिया गया। उद्यमियों को अपने उत्पादों की जानकारी सीधे संभावित खरीदारों के सामने रखने का मौका मिला। इससे केवल बिक्री ही नहीं, बल्कि भविष्य के कारोबारी रिश्तों की नींव भी मजबूत हुई।
यूपीआईटीएस में केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने भी विभिन्न सत्रों में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान निर्यात, निवेश, नवाचार, एमएसएमई और वैश्विक बाजार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
मेले का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में किया था। आयोजन के दौरान राज्य सरकार ने इसे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने वाले मंच के रूप में प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार लंबे समय से उत्तर प्रदेश को औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने की रणनीति पर काम कर रही है। यूपीआईटीएस इसी रणनीति से जुड़ा एक प्रमुख आयोजन बनकर सामने आया है। यह सरकारी दृष्टिकोण है, जबकि इसके दीर्घकालिक आर्थिक प्रभाव का आकलन आगे मिलने वाले वास्तविक निवेश और कारोबार के आधार पर होगा।
उद्योग संगठनों की नजर अब समझौता ज्ञापनों को जमीन पर उतारने पर है। केवल एमओयू की संख्या बढ़ना पर्याप्त नहीं माना जा रहा, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कितने समझौते वास्तविक कारोबारी सौदों और निवेश में बदलते हैं।
उत्तर प्रदेश के उद्यमियों के लिए निर्यात बढ़ाना भी बड़ी प्राथमिकता है। यदि यूपीआईटीएस में बने विदेशी संपर्क आगे मजबूत होते हैं तो हस्तशिल्प, वस्त्र, खाद्य उत्पाद और अन्य स्थानीय वस्तुओं के लिए नए बाजार खुल सकते हैं।
आयोजन ने युवाओं और नए उद्यमियों को भी अपना कारोबार और उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर दिया। स्टार्टअप और नवाचार से जुड़े उद्यमों की मौजूदगी ने मेले को पारंपरिक व्यापार प्रदर्शनी से आगे बढ़ाकर आधुनिक कारोबारी मंच का रूप दिया।
उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का मानना है कि यूपीआईटीएस की सबसे बड़ी उपलब्धि उत्तर प्रदेश के उत्पादों को एक संयुक्त ब्रांड पहचान देना है। अलग-अलग जिलों और उद्योगों के उत्पाद जब एक ही मंच पर प्रस्तुत हुए तो खरीदारों को प्रदेश की उत्पादन क्षमता को एक साथ देखने का अवसर मिला।
पांच दिनों के आयोजन के बाद अब एक्सपो सेंटर में गतिविधियां समाप्त हो चुकी हैं, लेकिन उद्यमियों के लिए अगला चरण शुरू हो गया है। अब उन्हें मेले में मिले संपर्कों से संवाद बनाए रखना होगा और उन्हें वास्तविक कारोबार में बदलने की कोशिश करनी होगी।
आईआईए से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि यूपीआईटीएस ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक बाजार की दिशा में एक बड़ा मंच दिया है। उनके अनुसार यह एक महत्वपूर्ण आर्थिक पड़ाव है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता का आकलन आने वाले महीनों में होने वाले कारोबार और निवेश से होगा।
फिलहाल यूपीआईटीएस 2026 के समापन के बाद उद्योग जगत में उत्साह दिखाई दे रहा है। कारोबारी समझौते, विदेशी खरीदारों की भागीदारी और लाखों लोगों की मौजूदगी ने इस आयोजन को बड़े व्यापारिक मंच के रूप में स्थापित किया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि मेले में बने संपर्क और समझौते उत्तर प्रदेश के उद्योगों, एमएसएमई और निर्यात को कितनी गति दे पाते हैं।





