उत्तर प्रदेश

Shuktirtha में गंगा प्रदूषण पर हंगामा, फैक्ट्रियों पर उठे सवाल

Ratna Netam
16 July 2026 8:02 PM IST
Shuktirtha  में गंगा प्रदूषण पर हंगामा, फैक्ट्रियों पर उठे सवाल
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Shuktirtha शुकतीर्थ : शुकतीर्थ (मुजफ्फरनगर)। उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध पौराणिक और ऐतिहासिक तीर्थ स्थल शुकतीर्थ में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब पतित पावनी गंगा यानी बाण गंगा का पानी अचानक काला और बदबूदार हो गया। सुबह स्नान के लिए घाट पर पहुंचे श्रद्धालुओं और साधु-संतों ने जब नदी की यह स्थिति देखी तो वे हैरान रह गए।

घाट पर पानी की सतह पर लाखों की संख्या में मृत मछलियां तैरती दिखाई दीं। गंगा जल की ऐसी दुर्दशा देखकर श्रद्धालुओं और संत समाज में भारी नाराजगी फैल गई। धार्मिक भावनाएं आहत होने के कारण कई श्रद्धालु बिना स्नान किए ही वापस लौट गए। देखते ही देखते घाट पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी गई। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और नदी के पानी की जांच कराने की प्रक्रिया शुरू की। अचानक बड़ी संख्या में मछलियों की मौत से जल प्रदूषण को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

शुकतीर्थ को धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि यह स्थान महर्षि शुकदेव की तपोस्थली रहा है और यहां देशभर से श्रद्धालु गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में गंगा जल का काला और दूषित होना लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

मां पूर्णागिरि आश्रम के महंत महामंडलेश्वर स्वामी गोपाल दास महाराज भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड क्षेत्र की कुछ फैक्ट्रियों द्वारा कथित रूप से केमिकल युक्त जहरीला पानी चोरी-छिपे गंगा में छोड़ा जाता है, जिसके कारण नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है।

स्वामी गोपाल दास महाराज ने कहा कि सरकार शुकतीर्थ के विकास के लिए करोड़ों-अरबों रुपये खर्च करने की बात करती है, लेकिन यदि गंगा का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा तो तीर्थ स्थल का महत्व कैसे बच पाएगा। उन्होंने कहा कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती है।

संतों और श्रद्धालुओं ने मांग की है कि गंगा में प्रदूषण फैलाने वाले लोगों और संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि गंगा केवल नदी नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। इसे प्रदूषण से बचाना सभी की जिम्मेदारी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी में अचानक बदलाव से जलीय जीवों को भारी नुकसान पहुंचा है। लाखों मछलियों की मौत ने पर्यावरण को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पानी की वैज्ञानिक जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि मछलियों की मौत का असली कारण क्या है।

प्रशासन की ओर से अभी जांच की प्रक्रिया शुरू की गई है। अधिकारियों का कहना है कि पानी के नमूने लेकर जांच कराई जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल शुकतीर्थ में गंगा जल की स्थिति को लेकर श्रद्धालुओं और संत समाज में नाराजगी बनी हुई है। लोग जल्द से जल्द समस्या के समाधान और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि धार्मिक आस्था और पर्यावरण दोनों की रक्षा की जा सके।

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