- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- कानपुर नगर निगम सदन...
कानपुर नगर निगम सदन में जमकर हंगामा, गाली-गलौज के बाद पार्षदों में धक्का-मुक्की

कानपुर। कानपुर नगर निगम सदन की बैठक शनिवार को हंगामे की भेंट चढ़ गई। बैठक के दौरान पार्षदों के बीच शुरू हुई कहासुनी देखते ही देखते गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और झड़प में बदल गई। हालात इतने बिगड़ गए कि एक पार्षद मेज पर चढ़ गया और दूसरे पार्षद की तरफ लात चला दी। इस दौरान एक विधायक के नाम को लेकर भी अपशब्द बोले गए। सदन में मौजूद महापौर और कुछ पार्षदों के हस्तक्षेप के बाद किसी तरह मामला शांत कराया गया।
शनिवार को नगर निगम सदन की बैठक शुरू होने के बाद विभिन्न मुद्दों को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान पार्षदों के बीच किसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया। शुरुआत में मामला तीखी बहस तक सीमित था, लेकिन कुछ ही देर में दोनों तरफ से आवाजें तेज होने लगीं। आरोप-प्रत्यारोप के बीच माहौल तनावपूर्ण हो गया और सदन की कार्यवाही प्रभावित होने लगी।
देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि सदन में गाली-गलौज शुरू हो गई। भरे सदन में पार्षद एक-दूसरे के सामने आ गए। कहासुनी के बीच धक्का-मुक्की और झड़प होने लगी। इससे सदन में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मौजूद अन्य पार्षदों ने विवाद कर रहे सदस्यों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन कुछ समय तक स्थिति नियंत्रण से बाहर नजर आई।
हंगामे के दौरान एक पार्षद मेज पर चढ़ गया। आरोप है कि उसने वहीं से दूसरे पार्षद की तरफ लात चलाई। इस घटनाक्रम के बाद विवाद और ज्यादा बढ़ गया। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक होने लगी। कुछ पार्षद बीच-बचाव के लिए आगे आए और एक-दूसरे से उलझ रहे सदस्यों को अलग करने का प्रयास किया।
सदन में हुए विवाद के दौरान एक विधायक के नाम पर भी अपशब्द बोले जाने की बात सामने आई है। इससे माहौल और गरमा गया। पार्षदों के बीच चल रही बहस में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी जुड़ गए और सदन की मर्यादा को लेकर सवाल उठने लगे। बैठक के दौरान जिस तरह की भाषा और व्यवहार सामने आया, उससे सदन में सामान्य तरीके से चर्चा जारी रखना मुश्किल हो गया।
नगर निगम सदन शहर से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और निर्णय लेने का प्रमुख मंच होता है। यहां पार्षद अपने-अपने वार्डों की समस्याएं उठाते हैं और विकास कार्यों से जुड़े विषयों पर चर्चा करते हैं। शनिवार की बैठक में भी कई मुद्दों पर चर्चा होनी थी, लेकिन पार्षदों के बीच हुए विवाद ने पूरी बैठक का माहौल बदल दिया।
हंगामा बढ़ता देखकर महापौर ने स्थिति संभालने की कोशिश की। कुछ वरिष्ठ और अन्य पार्षद भी विवाद शांत कराने के लिए आगे आए। दोनों पक्षों को समझाने और अलग करने के बाद धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हुई। काफी प्रयास के बाद पार्षद शांत हुए और सदन में जारी तनाव कम हुआ।
हालांकि बैठक के दौरान हुई इस घटना ने नगर निगम सदन की मर्यादा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जनप्रतिनिधियों के बीच मतभेद और राजनीतिक विरोध सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन बहस का गाली-गलौज और धक्का-मुक्की तक पहुंचना चर्चा का विषय बन गया। विशेष रूप से एक पार्षद के मेज पर चढ़कर दूसरे पार्षद की तरफ लात चलाने की घटना ने विवाद को और गंभीर बना दिया।
सदन में मौजूद लोगों के सामने हुए पूरे घटनाक्रम के कारण कुछ समय तक अफरा-तफरी बनी रही। पार्षद एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे। विवाद के दौरान कई सदस्य अपनी जगह छोड़कर आगे आ गए। इससे स्थिति और बिगड़ने की आशंका पैदा हो गई थी। हालांकि समय रहते महापौर और अन्य पार्षदों के हस्तक्षेप से मामला और अधिक बढ़ने से रोक लिया गया।
नगर निगम सदन की बैठक में शहर के विकास, साफ-सफाई, सड़क, जलापूर्ति, निर्माण कार्य और नागरिक सुविधाओं जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाती है। ऐसे में बैठक के दौरान हुए हंगामे ने मूल मुद्दों से ध्यान हटाकर पार्षदों के व्यवहार को चर्चा के केंद्र में ला दिया।
घटना के बाद सदन के भीतर अनुशासन और जनप्रतिनिधियों के आचरण को लेकर भी चर्चा तेज हो गई। पार्षदों से अपेक्षा रहती है कि वे जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में मजबूती से रखें, लेकिन इसके लिए निर्धारित संसदीय और सदनीय मर्यादाओं का पालन भी किया जाए। शनिवार को हुए घटनाक्रम में बहस जिस तरह झड़प तक पहुंची, उसने इन मर्यादाओं पर सवाल खड़े कर दिए।
महापौर और पार्षदों के हस्तक्षेप के बाद विवाद शांत जरूर हो गया, लेकिन सदन में हुई गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और लात चलाने की घटना ने बैठक को सुर्खियों में ला दिया। एक विधायक के नाम पर अपशब्द बोले जाने का मामला भी विवाद का हिस्सा बन गया है।
शनिवार की इस बैठक में शहर के मुद्दों से अधिक पार्षदों के बीच हुआ टकराव चर्चा में रहा। सदन में हुई घटना के बाद अब निगाह इस बात पर रहेगी कि मामले को लेकर नगर निगम स्तर पर आगे कोई कार्रवाई होती है या नहीं। फिलहाल भरे सदन में हुए इस हंगामे ने कानपुर नगर निगम की बैठक की मर्यादा और अनुशासन को लेकर नई बहस खड़ी कर दी है।





