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उत्तर प्रदेश
ई-रिक्शा की बेलगाम संख्या पर लगेगी लगाम यूपी ने केंद्र से मांगा बड़ा अधिकार
nidhi
10 Sept 2026 9:37 AM IST

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यूपी सरकार का बड़ा कदम
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के शहरों में तेजी से बढ़ रही ई-रिक्शा की संख्या को नियंत्रित करने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। सरकार ने केंद्र से ई-रिक्शा की बिक्री और रजिस्ट्रेशन को नियंत्रित करने का अधिकार मांगा है। अगर केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो प्रदेश सरकार स्थानीय जरूरत यातायात व्यवस्था और सड़कों की क्षमता के आधार पर ई-रिक्शा की संख्या को नियंत्रित करने के लिए नए नियम बना सकेगी।
प्रदेश के बड़े शहरों में ई-रिक्शा की लगातार बढ़ती संख्या यातायात व्यवस्था के लिए चुनौती बनती जा रही है। प्रमुख बाजारों रेलवे स्टेशनों बस अड्डों अस्पतालों और व्यस्त चौराहों के आसपास बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चलने के कारण जाम की समस्या सामने आती है। सरकार का मानना है कि केवल रूट निर्धारित करने या यातायात नियम लागू करने से समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं हो पा रहा है। इसी वजह से अब ई-रिक्शा की संख्या को शुरुआत से ही नियंत्रित करने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।
बिक्री और रजिस्ट्रेशन पर नियंत्रण की तैयारी
मौजूदा व्यवस्था में निर्धारित तकनीकी मानकों को पूरा करने वाले ई-रिक्शा की बिक्री और रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। राज्य सरकार चाहती है कि उसे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार नए ई-रिक्शा के पंजीकरण को सीमित करने का अधिकार मिले। इससे किसी शहर या क्षेत्र में जरूरत से ज्यादा ई-रिक्शा होने की स्थिति में नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर नियंत्रण लगाया जा सकेगा। इसके लिए शहर की आबादी सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता सड़क नेटवर्क और यातायात दबाव जैसे पहलुओं को आधार बनाया जा सकता है।
जाम की समस्या बड़ी वजह
लखनऊ कानपुर वाराणसी प्रयागराज गोरखपुर आगरा और अन्य प्रमुख शहरों में ई-रिक्शा बड़ी संख्या में यात्रियों के लिए सस्ता और सुविधाजनक परिवहन साधन बन चुके हैं। खास तौर पर छोटी दूरी के सफर और मुख्य सड़क से कॉलोनियों तक पहुंचने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके साथ ही अनियोजित संचालन बड़ी समस्या बन गया है। कई स्थानों पर ई-रिक्शा चालक सड़क और चौराहों पर वाहन खड़े कर यात्रियों का इंतजार करते हैं। इससे यातायात प्रभावित होता है। तय रूट और पार्किंग व्यवस्था नहीं होने से कई व्यस्त इलाकों में जाम की स्थिति और गंभीर हो जाती है।
रोजगार पर भी रखना होगा ध्यान
ई-रिक्शा हजारों परिवारों की आजीविका से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में सरकार के सामने यातायात नियंत्रण के साथ रोजगार के हितों की रक्षा करने की भी चुनौती होगी। यदि नए रजिस्ट्रेशन सीमित किए जाते हैं तो इसका असर नए ई-रिक्शा खरीदकर रोजगार शुरू करने की योजना बना रहे लोगों पर पड़ सकता है। इसी कारण किसी भी नई व्यवस्था में मौजूदा ई-रिक्शा चालकों नए आवेदकों और यात्रियों की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल मामला केंद्र सरकार के स्तर पर निर्णय से जुड़ा है। अनुमति मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार ई-रिक्शा की बिक्री और रजिस्ट्रेशन नियंत्रित करने के लिए किस तरह की व्यवस्था लागू करती है।
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