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UP : दाल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की थाली को किया महंगा

Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: आम आदमी की रसोई एक बार फिर महंगाई की मार झेल रही है। पेट्रोल, डीज़ल और गैस की बढ़ती कीमतों के साथ अब दाल की कीमतों में भी लगातार इजाफा हो रहा है, जिससे घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ रहा है। प्रोटीन का प्रमुख स्रोत मानी जाने वाली दाल, जो थाली में पोषण का अहम हिस्सा है, अब आम लोगों के लिए महंगी होती जा रही है।
स्थानीय थोक मंडी और फुटकर बाजारों में चना, अरहर, मूंग, मसूर और उड़द दाल की कीमतों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। मई के मुकाबले इन दालों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। थोक बाजारों में दाल की बढ़ती कीमतों का असर सीधे फुटकर बाजार पर पड़ रहा है, जिससे आम जनता को खरीदारी में अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के कमजोर रहने के अनुमान और दाल की आपूर्ति में अनिश्चितता ने कीमतों को और ऊपर धकेला है। इन कारकों ने रसोई में महंगाई को बढ़ावा दिया है और आम परिवारों की थाली पर असर डाला है। अब लोग गाढ़ी दाल की जगह पानी वाली दाल पर निर्भर होने लगे हैं, जिससे पोषण और खाने की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, अरहर और मूंग दाल की कीमतों में पिछले महीने 5 से 7 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है, जबकि उड़द और मसूर दाल भी महंगी हुई हैं। थोक मंडी के संचालक ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू उत्पादन में कमी के कारण थोक स्तर पर कीमतें बढ़ रही हैं।
आम उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले ही रोजमर्रा की खरीदारी महंगी हो चुकी है, अब दाल की बढ़ती कीमतों ने घरेलू खर्चों को और भारी कर दिया है। कई परिवारों ने गाढ़ी दाल कम खाने और पानी वाली दाल या अन्य सस्ती विकल्प अपनाने की आदत डाल ली है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि दाल और अन्य आवश्यक वस्तुओं के मूल्य नियंत्रण के लिए बाजार निगरानी जारी है, लेकिन मानसून और उत्पादन की असमानता जैसी बाहरी परिस्थितियों के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जरूरतमंदों के लिए उचित वितरण प्रणाली और सब्सिडी योजनाओं के माध्यम से राहत पहुंचाई जाए।
इस बढ़ती महंगाई के बीच आम जनता को घरेलू बजट में समायोजन करना पड़ रहा है। थोक और फुटकर बाजारों में लगातार नजर रखकर ही लोग अपनी खरीदारी कर पा रहे हैं। दाल के महंगे होने से आम परिवारों की थाली में पोषण और खाने की गुणवत्ता पर भी असर पड़ा है, और आने वाले महीनों में कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।





