- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- UP News : चिता भस्म...
UP News : चिता भस्म होली का क्यों हो रहा विरोध, जरूर जानें

वाराणसी | (काशी) में चिता भस्म से होली खेलने की परंपरा को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। काशी विद्वत कर्मकांड परिषद और अन्य विद्वानों ने इसे अशास्त्रीय करार देते हुए विरोध जताया है। विद्वानों का कहना है कि श्मशान में बिना कारण जाने से धार्मिक दृष्टि से अशुद्धि मानी जाती है और इसके निवारण के लिए अनुष्ठान की आवश्यकता होती है।
विद्वानों ने जताया कड़ा विरोध
काशी विद्वत परिषद के अनुसार, चिता भस्म से होली खेलना धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है। परिषद के विद्वानों का कहना है कि श्मशान क्षेत्र में बिना किसी कारण जाने वालों पर 10 से 30 दिनों तक सूतक (अशुद्धि) लग जाता है। इस परंपरा को चिताओं का अपमान बताते हुए उन्होंने इसके प्रायश्चित के रूप में पिंडदान और शुद्धिकरण अनुष्ठान करने की बात कही है।
क्या कहते हैं धार्मिक नियम?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, अंतिम संस्कार स्थल एक शुद्ध स्थान होता है, लेकिन वहां केवल उन लोगों को जाने की अनुमति होती है जिनका संबंध दिवंगत व्यक्ति से होता है। बिना कारण श्मशान जाने या वहां की राख को लेकर किसी तरह का उत्सव मनाना अनादि काल से निषेध बताया गया है।
क्या है चिता भस्म होली की परंपरा?
मणिकर्णिका घाट पर चिता भस्म से होली खेलने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। मान्यता है कि भगवान शिव यहां तांडव करते हैं और महाश्मशान में खेली जाने वाली यह होली मोक्ष की प्रतीक मानी जाती है। हालांकि, परंपरा और धार्मिक मान्यताओं को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जिससे इसे रोकने की मांग तेज हो गई है।
क्या होगा आगे?
काशी के विद्वानों और संत समाज ने इस परंपरा पर पुनर्विचार करने की बात कही है। वे इस मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन और धर्माचार्यों से चर्चा करेंगे। साथ ही, वे चिता भस्म से होली खेलने वालों के लिए शुद्धिकरण अनुष्ठान और पिंडदान कराने की योजना बना रहे हैं।





