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लखनऊ: प्यार की कोई उम्र नहीं होती, और यह साबित किया उत्तर प्रदेश के एक अनोखे जोड़े ने। 66 वर्षीय रामस्वरूप और 57 वर्षीय सरिता की शादी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। यह शादी खास इसलिए भी थी क्योंकि यह एक वृद्धाश्रम में संपन्न हुई, जहां बरसों से अकेलेपन का दर्द झेल रहे बुजुर्गों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
मां की अंतिम ख्वाहिश बनी शादी की वजह
रामस्वरूप पिछले कई सालों से वृद्धाश्रम में रह रहे थे, और उनके साथ उनकी 90 वर्षीय मां भी थीं। मां की बस एक ख्वाहिश थी – अपने बेटे को शादीशुदा देखना। जब यह बात वृद्धाश्रम की देखभाल करने वालों को पता चली तो उन्होंने रामस्वरूप की शादी के लिए सरिता को चुना, जो खुद भी अपने जीवन में अकेली थीं।
वृद्धाश्रम में पहली बार गूंजे शहनाई के सुर
शादी की तैयारियां पूरे उत्साह के साथ की गईं। वरमाला से लेकर सात फेरे तक, हर रस्म को धूमधाम से निभाया गया। वृद्धाश्रम के बाकी बुजुर्गों ने भी इस शादी को परिवार की तरह एंजॉय किया। बैंड-बाजे के साथ रामस्वरूप बारात में आए और सरिता ने पूरे रीति-रिवाजों के साथ उनका साथ निभाया।
'खुश हूं कि मेरी मां के आशीर्वाद से यह हुआ'
शादी के बाद रामस्वरूप ने कहा, "मैंने कभी नहीं सोचा था कि इस उम्र में शादी करूंगा, लेकिन यह मेरी मां की अंतिम इच्छा थी। आज मैं बहुत खुश हूं कि उनकी ख्वाहिश पूरी हो गई।" वहीं, सरिता ने कहा, "यह सिर्फ एक शादी नहीं, बल्कि जिंदगी में नए सिरे से जीने की शुरुआत है।"
समाज के लिए मिसाल बनी यह शादी
वृद्धाश्रम में हुई यह अनोखी शादी सिर्फ रामस्वरूप और सरिता के लिए ही नहीं, बल्कि उन तमाम बुजुर्गों के लिए उम्मीद की किरण है, जो अकेलेपन में जीवन गुजार रहे हैं। इस शादी ने यह साबित कर दिया कि साथ निभाने और खुश रहने के लिए उम्र कोई बंधन नहीं होती।





