उत्तर प्रदेश

UP : नालों पर अतिक्रमण हटाने की तैयारी में नगर निगम

Kavita2
29 Jun 2026 10:47 AM IST
UP : नालों पर अतिक्रमण हटाने की तैयारी में नगर निगम
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Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: नगर निगम ने शहर में नालों पर किए गए अतिक्रमण को लेकर सख्त रुख अपनाने की तैयारी शुरू कर दी है। निगम अब उन सभी मकान मालिकों, दुकानदारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी करेगा जिन्होंने नालों के ऊपर अवैध रूप से निर्माण या कब्जा कर रखा है। नोटिस जारी होने के बाद संबंधित लोगों को एक सप्ताह के भीतर स्वयं अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया जाएगा।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, यदि तय समय सीमा के भीतर लोग खुद अतिक्रमण नहीं हटाते हैं, तो उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। इसमें जुर्माना, तोड़फोड़ की कार्रवाई और अन्य कानूनी कदम शामिल हो सकते हैं। प्रशासन का कहना है कि शहर में जलभराव की समस्या को रोकने के लिए यह कदम बेहद जरूरी हो गया है।

हालांकि निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती हजारों लोगों को नोटिस भेजना और उन पर कार्रवाई करना है। शहर में कई इलाकों में बड़े पैमाने पर नालों पर कब्जा किया गया है, जिससे न केवल जल निकासी बाधित हो रही है, बल्कि मानसून के दौरान जलभराव की स्थिति भी गंभीर रूप ले लेती है।

स्थानीय स्तर पर स्थिति यह है कि कई लोगों ने अपने घरों और दुकानों के सामने गुजरने वाले नालों पर पक्के स्लैब डाल दिए हैं। कुछ जगहों पर नालों के ऊपर लिंटर डालकर उसे पार्किंग स्थल के रूप में उपयोग किया जा रहा है। यहां तक कि कई स्थानों पर नालों के ऊपर वाहनों की पार्किंग की जा रही है, जिससे पानी का प्राकृतिक बहाव पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में नालों के ऊपर पशुपालन तक किया जा रहा है, जिससे गंदगी और कचरा लगातार नालों में जमा हो रहा है। इस कारण नालों की नियमित सफाई भी प्रभावी नहीं हो पा रही है। सफाई के बाद भी अतिक्रमण के कारण कचरा फिर से वहीं फंस जाता है और जल निकासी बाधित रहती है।

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि नालों पर किए गए अतिक्रमण के कारण शहर में जलभराव की समस्या लगातार बढ़ रही है। बारिश के मौसम में पानी की निकासी न होने से कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो जाती हैं और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

अधिकारियों के अनुसार, नालों की सफाई पर हर साल काफी बजट खर्च किया जाता है, लेकिन अतिक्रमण के कारण यह प्रयास पूरी तरह सफल नहीं हो पाता। नालों के ऊपर बने स्लैब और संरचनाओं के नीचे जमा कचरा मशीनों और कर्मचारियों की पहुंच से बाहर हो जाता है, जिससे सफाई अधूरी रह जाती है।

नगर निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी एक वर्ग या क्षेत्र के खिलाफ नहीं है, बल्कि शहर की जल निकासी व्यवस्था को सुधारने के लिए की जा रही है। निगम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बारिश के दौरान शहर में जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो और नालों का प्राकृतिक प्रवाह बाधित न हो।

स्थानीय लोगों के बीच इस कार्रवाई को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे जरूरी कदम मान रहे हैं और कह रहे हैं कि शहर में लंबे समय से बढ़ रही जलभराव की समस्या का समाधान तभी संभव है जब नालों को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि वर्षों से बने निर्माण को हटाना आसान नहीं होगा और इससे विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।

नगर निगम का कहना है कि नोटिस जारी करने के बाद भी यदि अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर बलपूर्वक अतिक्रमण हटाने की भी तैयारी है।

प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे स्वेच्छा से नालों पर किए गए अवैध निर्माण हटा लें ताकि किसी प्रकार की कठोर कार्रवाई की आवश्यकता न पड़े। साथ ही लोगों से यह भी कहा गया है कि वे शहर की जल निकासी व्यवस्था को सुधारने में सहयोग करें।

विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में नालों पर अतिक्रमण एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जिसका सीधा असर मानसून के दौरान देखने को मिलता है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में जलभराव और अधिक गंभीर रूप ले सकता है।

फिलहाल नगर निगम ने इस दिशा में कार्रवाई शुरू करने का संकेत दे दिया है और आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर नोटिस और निरीक्षण अभियान चलाए जाने की संभावना है। शहर में इस कदम को लेकर चर्चा तेज हो गई है और सभी की नजर अब निगम की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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