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UP : लंच ब्रेक की चर्चा से शुरू हुआ स्टार्टअप, चार छात्राएं बना रही हैं प्लास्टिक-मुक्त समाधान

Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: लंच ब्रेक के दौरान पर्यावरण प्रदूषण पर हुई एक साधारण बातचीत ने चार छात्राओं के लिए एक प्रेरणादायक स्टार्टअप की नींव रख दी। गुरुकुल द स्कूल की 12वीं कक्षा की छात्राएं अर्शिया सिंह, सिमरन अरोड़ा, अक्षिता जोशी और मान्या त्यागी ने प्लास्टिक के विकल्प और कचरा प्रबंधन पर काम शुरू किया है।
इन छात्राओं ने मिलकर प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और इसके इको-फ्रेंडली विकल्प तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। उन्होंने कपड़े के थैले यानी कॉटन टोट बैग जैसे उत्पाद पेश किए हैं, जो प्लास्टिक बैग का बेहतर विकल्प बन रहे हैं।
छात्राओं ने सबसे पहले अपने ही स्कूल की कैंटीन को प्लास्टिक-मुक्त बनाने की पहल की। इसके लिए उन्होंने जागरूकता अभियान चलाया और लोगों को प्लास्टिक के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी।
उनका कहना है कि छोटे स्तर पर शुरू की गई यह कोशिश अब धीरे-धीरे एक बड़े बदलाव की दिशा में बढ़ रही है। वे स्कूल के अन्य छात्रों और स्टाफ को भी प्लास्टिक के विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
इन छात्राओं ने बताया कि प्लास्टिक कचरा पर्यावरण के लिए गंभीर समस्या बन चुका है और अगर समय रहते इसके विकल्प नहीं अपनाए गए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए यह और बड़ा खतरा बन सकता है।
स्टार्टअप के जरिए वे न केवल इको-फ्रेंडली उत्पाद बना रही हैं, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने का काम भी कर रही हैं। उनके प्रयासों को स्कूल प्रशासन और शिक्षकों का भी समर्थन मिल रहा है।
धीरे-धीरे उनका यह प्रोजेक्ट स्थानीय स्तर पर पहचान बनाने लगा है और लोग उनके बनाए गए कपड़े के थैलों को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
छात्राओं का लक्ष्य है कि वे इस पहल को आगे बढ़ाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और प्लास्टिक के उपयोग को कम करने में योगदान दें।





