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Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश जल निगम में फर्जीवाड़े के जरिए करोड़ों रुपये के भुगतान घोटाले का मामला सामने आने के बाद विभागीय जांच तेज हो गई है। इस घोटाले में अधीक्षण अभियंता और सहायक अभियंता दोनों पदों पर कार्यरत रहे प्रवीण कुमार कुट्टी के साथ-साथ दो अधिशासी अभियंता संदीप मौर्या और अजित मौर्या के नाम भी जांच के दायरे में आ गए हैं।
लखनऊ स्थित विभागीय मुख्यालय से चल रही प्रारंभिक जांच में इन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इसके अलावा अब अवर अभियंताओं की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है, जिससे पूरे मामले की परतें खुलने की संभावना जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, यह मामला वर्ष 2026 के जनवरी से मार्च के बीच का है, जिसमें जल निगम में लगभग 20 करोड़ रुपये के फर्जी भुगतान किए जाने का आरोप है। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि भुगतान प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी करते हुए वित्तीय अनियमितताएं की गईं।
राज्य शासन के निर्देश पर इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू की गई है। लखनऊ मुख्यालय में तैनात मुख्य अभियंता एके सिंह को इस प्रकरण का जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि किस स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ और फर्जी भुगतान को किस प्रकार मंजूरी दी गई। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस पूरे मामले में किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका है या यह केवल कुछ अधिकारियों की मिलीभगत का परिणाम है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस घोटाले के सामने आने के बाद जल निगम की कार्यप्रणाली और वित्तीय नियंत्रण प्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आम जनता और प्रशासनिक हलकों में इस मामले को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की जा रही है।
कुल मिलाकर, जल निगम में सामने आया यह कथित करोड़ों का भुगतान घोटाला अब एक बड़े प्रशासनिक जांच प्रकरण का रूप ले चुका है, जिसमें कई वरिष्ठ अधिकारी जांच के घेरे में हैं और आगे और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।





