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UP : पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या से बढ़ा मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ीं

Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बिग कैट प्रजातियों की बढ़ती संख्या ने जंगल के पारिस्थितिक संतुलन पर असर डालना शुरू कर दिया है। जंगल के प्राकृतिक नियमों के अनुसार, ताकतवर शिकारी का दबदबा रहता है और कमजोर जीवों को या तो अपना इलाका बदलना पड़ता है या फिर वे संघर्ष में पीछे रह जाते हैं।
इसी स्थिति का असर अब पीलीभीत के जंगलों में साफ तौर पर देखा जा रहा है। बाघों की संख्या में बढ़ोतरी के चलते तेंदुओं पर दबाव बढ़ा है, जिससे वे अपने पारंपरिक आवास क्षेत्र से बाहर निकलने लगे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव भोजन और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा के कारण हो रहा है।
तेंदुओं के जंगल से बाहर आने की घटनाएं अब आसपास के गांवों तक पहुंच रही हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति पैदा हो रही है। कई मामलों में तेंदुए मवेशियों पर हमला करते हुए देखे गए हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाघों की बढ़ती संख्या जंगल के भीतर दबाव को बढ़ा रही है, जिससे अन्य मांसाहारी जीवों को नए ठिकाने तलाशने पड़ रहे हैं। तेंदुए अपेक्षाकृत अधिक अनुकूलनशील होते हैं, इसलिए वे आबादी वाले इलाकों के पास भी पहुंच रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति जैव विविधता के संतुलन से जुड़ी हुई है और इसे नियंत्रित करने के लिए निरंतर निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता है। जंगल में प्रत्येक शिकारी की एक भूमिका होती है, और जब संतुलन बिगड़ता है तो उसका असर पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता है।
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और किसी भी वन्यजीव के दिखाई देने पर तुरंत सूचना दें, ताकि समय रहते उचित कदम उठाए जा सकें।
फिलहाल पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बढ़ते बाघ और जंगल से बाहर आते तेंदुए वन्यजीव प्रबंधन के लिए एक नई चुनौती बनकर सामने आए हैं।





