उत्तर प्रदेश

किसानों के लिए यूपी सरकार का नया नियम

Saba Naaz
6 July 2026 4:27 PM IST
किसानों के लिए यूपी सरकार का नया नियम
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Uttar Pradesh सरकार ने किसानों के लिए एक बड़ा बदलाव लागू किया है। अब राज्य में 12 अंकों की ‘फार्मर आईडी’ यानी किसान रजिस्ट्री को कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत खाद-बीज, पीएम किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड, कर्ज माफी और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनकी फार्मर आईडी बनी होगी।

सरकार की ओर से तैयार की जा रही यह डिजिटल आईडी एक विस्तृत डेटाबेस होगी, जिसमें किसान का नाम, जमीन का रिकॉर्ड, खतौनी, खसरा नंबर और खेती से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज होगी। अधिकारियों के अनुसार इससे योजनाओं का लाभ सीधे पात्र किसानों तक पहुंच सकेगा और फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी। साथ ही खाद और बीज वितरण में पारदर्शिता आएगी और जरूरत के अनुसार ही आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

कृषि विभाग के मुताबिक प्रदेश में करीब 2.4 करोड़ किसानों में से 1.8 करोड़ से अधिक की फार्मर आईडी तैयार की जा चुकी है। बाकी किसानों के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का कहना है कि आने वाले समय में सभी कृषि योजनाओं का लाभ इसी डिजिटल प्रणाली के आधार पर दिया जाएगा।

फार्मर आईडी लागू होने के बाद किसानों को बार-बार पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी। सरकारी खरीद केंद्रों पर फसल बेचने की प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी। किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने और लोन प्रक्रिया में भी तेजी आएगी, क्योंकि भूमि रिकॉर्ड पहले से सिस्टम में उपलब्ध रहेगा।

फिलहाल फार्मर रजिस्ट्री अभियान चरणबद्ध तरीके से चल रहा है और 1 जून 2026 से इसे कई योजनाओं के लिए अनिवार्य किया जा चुका है। पंजीकरण के लिए किसान upagripardarshi.gov.in पोर्टल, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या कृषि विभाग कार्यालय की मदद ले सकते हैं।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह रजिस्ट्रेशन पूरी तरह निःशुल्क है, हालांकि CSC पर नामांकन कराने पर मामूली सेवा शुल्क लिया जा सकता है। भूमि रिकॉर्ड में त्रुटि होने पर पहले उसे राजस्व विभाग से सही कराना जरूरी होगा।

यह व्यवस्था बटाईदार किसानों पर भी लागू होगी, जिन्हें डिजिटल सत्यापन के बाद योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। संयुक्त खातेदारी वाले मामलों में प्रत्येक किसान की अलग फार्मर आईडी बनाई जाएगी।

सरकार का दावा है कि इस प्रणाली से कृषि योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, लाभ सीधे पात्र किसानों तक पहुंचेगा और कृषि व्यवस्था अधिक डिजिटल और मजबूत बनेगी।

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