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UP : गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा, खादर क्षेत्र के गांवों में बढ़ी चिंता

Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: पहाड़ों और मैदानी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण गंगा नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि दर्ज की जा रही है। बृहस्पतिवार को गंगा के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी होने से खादर क्षेत्र में बसे गांवों में रहने वाले लोगों में चिंता का माहौल बन गया है। नदी के बढ़ते पानी को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र में गंगा के जलस्तर में हो रही वृद्धि के चलते स्थानीय प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार, पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही वर्षा के कारण हरिद्वार बैराज से 20502 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जबकि बिजनौर बैराज से 10653 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। दोनों बैराज से छोड़े गए इस अतिरिक्त पानी का असर अब मैदानी इलाकों में साफ दिखाई देने लगा है।
पिछले 24 घंटों के दौरान गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे नदी किनारे बसे गांवों में रहने वाले लोगों की चिंता और अधिक बढ़ गई है। खादर क्षेत्र के कई गांव ऐसे हैं जो हर वर्ष बाढ़ या जलभराव की स्थिति का सामना करते हैं, और इस बार भी हालात को लेकर ग्रामीणों में बेचैनी देखने को मिल रही है।
गंगा घाट और उसके आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी सतर्क हो गए हैं। घाट किनारे दुकान लगाने वाले व्यापारियों ने अपने सामान को सुरक्षित स्थानों पर हटाना शुरू कर दिया है। कई दुकानदारों ने आशंका जताई है कि अगर जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो घाट क्षेत्र में पानी घुस सकता है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के मौसम में गंगा का जलस्तर बढ़ने से उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कई गांव ऐसे हैं जो नदी के बेहद करीब बसे हुए हैं, जिसके कारण पानी का स्तर बढ़ते ही सबसे पहले इन्हीं क्षेत्रों पर असर पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से समय रहते सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय किया जाएगा। नदी के जलस्तर पर नजर रखने के लिए संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया गया है और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
सिंचाई विभाग और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी भी लगातार स्थिति का आकलन कर रहे हैं। बैराज से छोड़े जा रहे पानी के प्रवाह और मौसम की स्थिति को देखते हुए आगे की रणनीति तैयार की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि अभी हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय बनी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में भारी वर्षा होने पर नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ता है, जिसका असर कुछ घंटों या दिनों में मैदानी क्षेत्रों तक पहुंच जाता है। इसी कारण गंगा के किनारे बसे गांवों में हर साल बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
ग्रामीणों ने बताया कि कई बार अचानक पानी बढ़ने से फसलों और पशुधन को भी नुकसान होता है। खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न हो जाती हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है। इस बार भी लोग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयारी कर रहे हैं।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें। साथ ही नदी किनारे अनावश्यक रूप से न जाने की भी सलाह दी गई है।
इस प्रकार गंगा के बढ़ते जलस्तर ने जहां एक ओर प्राकृतिक स्थिति पर चिंता बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने के लिए मजबूर कर दिया है। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति और बैराज से छोड़े जाने वाले पानी पर ही हालात की दिशा निर्भर करेगी।





