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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र 3 अगस्त 2026 से शुरू होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में सत्र बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। यह वर्ष 2026 का तीसरा विधानमंडल सत्र होगा। इस सत्र में वित्तीय वर्ष 2026-27 का अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को भी सदन में मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए इस मानसून सत्र को काफी अहम माना जा रहा है। सरकार इस सत्र के दौरान अनुपूरक बजट के माध्यम से विकास योजनाओं, नई परियोजनाओं और विभिन्न विभागों की अतिरिक्त जरूरतों के लिए धनराशि का प्रावधान कर सकती है। वित्तीय मामलों के साथ-साथ प्रदेश सरकार की ओर से जारी किए गए कुछ अध्यादेशों को विधेयक के रूप में सदन में प्रस्तुत कर पारित कराने की तैयारी भी है।
कैबिनेट बैठक के बाद लोक भवन स्थित मीडिया सेंटर में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने जानकारी दी कि मानसून सत्र में वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक अनुदानों की मांगें विधानमंडल के समक्ष रखी जाएंगी। उन्होंने बताया कि सत्र के दौरान विगत सत्रावसान के बाद सरकार की ओर से जारी किए गए महत्वपूर्ण अध्यादेशों के प्रतिस्थानी विधेयक भी प्रस्तुत किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा अन्य आवश्यक विधायी कार्य भी सदन की कार्यवाही के दौरान पूरे किए जाएंगे। सरकार की कोशिश होगी कि सभी जरूरी विधेयकों और वित्तीय प्रस्तावों को चर्चा के बाद पारित कराया जाए।
संवैधानिक व्यवस्था के तहत बुलाया गया सत्र
उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र संविधान के अनुच्छेद-174 और उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली के प्रावधानों के तहत बुलाया जा रहा है। संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार विधानसभा के दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए आगामी सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
बता दें कि राज्य विधानमंडल का पिछला यानी द्वितीय सत्र 30 अप्रैल 2026 को आयोजित हुआ था। उसी दिन विधानसभा और विधान परिषद की बैठक समाप्त होने के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। इसके बाद 7 मई को सत्रावसान की प्रक्रिया पूरी की गई थी।
अनुपूरक बजट पर रहेगी सभी की नजर
मानसून सत्र में पेश होने वाले अनुपूरक बजट पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर रहेगी। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सरकार के लिए यह बजट काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें प्रदेश के विकास कार्यों, बुनियादी सुविधाओं, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य योजनाओं के लिए अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किया जा सकता है।
विपक्ष भी इस सत्र में सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की तैयारी कर सकता है। कानून व्यवस्था, महंगाई, रोजगार, किसानों से जुड़े विषय और जनहित के मुद्दों को लेकर सदन में चर्चा होने की संभावना है।
सरकार की ओर से जहां विकास योजनाओं और उपलब्धियों को सामने रखने की तैयारी है, वहीं विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग सकता है। ऐसे में 3 अगस्त से शुरू होने वाला मानसून सत्र राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण रहने की उम्मीद है।
सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच बहस और चर्चा के साथ कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। अनुपूरक बजट और विधायी कार्यों के कारण इस बार का मानसून सत्र प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक दिशा के लिहाज से अहम माना जा रहा है।





