- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- यूपी विधानसभा चुनाव:...
यूपी विधानसभा चुनाव: सपा-कांग्रेस जल्द शुरू कर सकते हैं सीट बंटवारे पर बातचीत

उत्तर प्रदेश : विधानसभा चुनाव में अभी समय बाकी है, लेकिन राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। विपक्षी गठबंधन के प्रमुख घटक समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर जल्द बातचीत शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि सीटों के बंटवारे की तस्वीर जितनी जल्दी साफ होगी, उतना ही बेहतर तरीके से दोनों दल जमीनी स्तर पर चुनावी तैयारी कर सकेंगे। इसके साथ ही कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बनाने और संभावित उम्मीदवारों को लेकर तैयारी शुरू करने में भी आसानी होगी।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों ने उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों को लेकर अपने-अपने स्तर पर सर्वे कराया है। इन सर्वे के जरिए दोनों दलों ने सीटवार राजनीतिक समीकरण, संभावित उम्मीदवारों, संगठन की स्थिति और चुनावी संभावनाओं का आकलन करने की कोशिश की है। माना जा रहा है कि सीट बंटवारे को लेकर बातचीत में इन सर्वे के निष्कर्ष महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि गठबंधन में रहते हुए पार्टी को अपनी राजनीतिक स्थिति के अनुरूप सम्मानजनक संख्या में सीटें मिलनी चाहिए। ऐसे में सपा के साथ बातचीत के दौरान कांग्रेस की ओर से ‘सम्मानजनक सीट’ की मांग दोहराई जा सकती है। पार्टी के भीतर यह विचार है कि पिछली चुनावी परिस्थितियों और मौजूदा संगठनात्मक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सीटों का ऐसा बंटवारा होना चाहिए, जिससे दोनों दलों को अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में मजबूती से चुनाव लड़ने का अवसर मिले।
कांग्रेस के लिए सीट बंटवारा केवल सीटों की संख्या का सवाल नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय करने से भी जुड़ा हुआ है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि यदि चुनाव से काफी पहले यह स्पष्ट हो जाए कि कौन सा दल किन सीटों पर चुनाव लड़ेगा, तो कार्यकर्ताओं को उसी हिसाब से तैयारी करने का पर्याप्त समय मिलेगा। इससे गठबंधन के दोनों घटकों के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने में भी मदद मिल सकती है।
वहीं, समाजवादी पार्टी भी प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों को लेकर अपने स्तर पर राजनीतिक आकलन कर रही है। पार्टी की ओर से कराए गए सर्वे में स्थानीय समीकरणों के साथ-साथ संभावित प्रत्याशियों और सीट पर संगठन की स्थिति को भी देखा गया है। ऐसे में सीट बंटवारे के दौरान दोनों दल अपने-अपने सर्वे के आधार पर मजबूत दावेदारी वाली सीटों को लेकर तर्क पेश कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं और राज्य की राजनीति में गठबंधन की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। पिछले विधानसभा चुनावों के अनुभवों के बाद विपक्षी दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर समय रहते सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस के भीतर माना जा रहा है कि सीटों के बंटवारे में देरी होने से संभावित उम्मीदवारों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए पार्टी चाहती है कि बातचीत का सिलसिला समय रहते शुरू हो और सीटों को लेकर एक स्पष्ट रोडमैप तैयार हो।
कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन की राजनीति का असर केवल सीटों तक सीमित नहीं रहेगा। दोनों दलों के सामने अपने-अपने संगठन को एक साथ चुनावी अभियान में उतारने की चुनौती भी होगी। जिन सीटों पर एक दल चुनाव नहीं लड़ेगा, वहां दूसरे दल के उम्मीदवार के पक्ष में स्थानीय संगठन और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना होगा। इसके लिए सीट बंटवारे का फैसला जल्द होना जरूरी माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस की रणनीति में यह भी शामिल है कि बातचीत के दौरान पार्टी अपने सर्वे और जमीनी फीडबैक के आधार पर मजबूत सीटों पर दावेदारी पेश करे। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि केवल सीटों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि ऐसी सीटें हासिल करना जरूरी है जहां कांग्रेस संगठन और उम्मीदवार के पास जीत की वास्तविक संभावना हो।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के लिए भी सीटों का बंटवारा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होगा। पार्टी अपने मजबूत क्षेत्रों और सामाजिक समीकरणों वाली सीटों पर पकड़ बनाए रखना चाहेगी। ऐसे में दोनों दलों के बीच बातचीत में कई सीटों पर सहमति बनाने में समय लग सकता है। हालांकि, दोनों दलों की प्राथमिकता गठबंधन को बनाए रखते हुए भाजपा के खिलाफ संयुक्त चुनावी रणनीति तैयार करना हो सकती है।
कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि गठबंधन की सफलता के लिए सीटों का बंटवारा जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी दोनों दलों के बीच जमीनी समन्वय भी है। उम्मीदवारों की घोषणा के बाद यदि स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच मतभेद बने रहे तो गठबंधन को नुकसान हो सकता है। इसलिए पार्टी चाहती है कि सीटों को लेकर फैसला समय रहते हो और उसके बाद संयुक्त रूप से संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाए।
फिलहाल दोनों दलों ने औपचारिक रूप से सीट बंटवारे की बातचीत की समयसीमा या फार्मूले का ऐलान नहीं किया है। लेकिन दोनों ओर से सभी 403 विधानसभा सीटों पर सर्वे कराए जाने से साफ है कि चुनावी तैयारियां अंदरखाने शुरू हो चुकी हैं। आने वाले समय में सपा और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर बातचीत शुरू होती है तो दोनों दलों के सर्वे, स्थानीय समीकरण और जीत की संभावना प्रमुख आधार बन सकते हैं।
ऐसे में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन की अगली बड़ी परीक्षा सीट बंटवारे को लेकर होगी। कांग्रेस जहां सम्मानजनक हिस्सेदारी पर जोर देने की तैयारी में है, वहीं सपा अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में मजबूत पकड़ बनाए रखना चाहेगी। अब देखना होगा कि दोनों दल बातचीत के जरिए कितनी जल्दी सीटों पर सहमति बनाते हैं और गठबंधन को चुनावी मैदान में किस रूप में उतारते हैं।





