उत्तर प्रदेश

Unnao: व्यापम घोटाले के बाद उन्नाव में नई पहचान बना रहा चिकित्सक

Admindelhi1
18 Dec 2025 4:37 PM IST
Unnao: व्यापम घोटाले के बाद उन्नाव में नई पहचान बना रहा चिकित्सक
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उन्नाव: व्यापम घोटाले में जेल जा चुका पशु चिकित्सक पुष्प राज एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। वर्तमान में वह उन्नाव जिले के देवतारा, तहसील हसनगंज में तैनात है। इससे पूर्व उसकी तैनाती बिछिया में रही, जबकि उससे पहले फतेहपुर जिले के खखरेऊ पशु चिकित्सालय में कार्यरत था। जानकारी के अनुसार खखरेऊ में तैनाती के दौरान ही व्यापम घोटाले से जुड़े मामले में संबंधित पशु चिकित्सक को ग्वालियर जेल भेजा गया था। उसे 15 अप्रैल 2015 से 11 अप्रैल 2016 तक जेल में निरुद्ध रहना पड़ा।

इसी प्रकरण में तत्कालीन प्रमुख सचिव, पशुधन विभाग डॉ. सुधीर एम. बोबडे द्वारा निलंबन के आदेश भी जारी किए गए थे। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस अवधि में उक्त चिकित्सक ग्वालियर जेल में बंद रहा, वह तथ्य उसकी सेवा पुस्तिका में कैसे दर्ज नहीं हुआ। इस गंभीर चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं, इस पर अब तक कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। इतना ही नहीं, उन्नाव स्थानांतरण के बाद तैनाती के समय जिले के तत्कालीन मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सी वी ओ ) द्वारा भी इस पूरे मामले में उदासीनता बरते जाने के आरोप लग रहे हैं।

बिना किसी आपत्ति के साफ जॉइनिंग कराए जाने से विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि जेल जाने का यह मामला उस समय अखबारों की सुर्खियों में रहा था। बावजूद इसके, न तो सेवा अभिलेखों में समुचित प्रविष्टि हुई और न ही बाद की तैनातियों के दौरान इस पर गंभीरता दिखाई गई। इन दिनों जिले में इस प्रकरण को लेकर चर्चाएं तेज हैं। यह भी कहा जा रहा है कि यदि संबंधित चिकित्सक की चल-अचल संपत्तियों की जांच कराई जाए, तो कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले पर संज्ञान लेते हैं या एक बार फिर मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।

बिछिया तैनाती भी सवालों के घेरे में, स्लॉटर हाउस की जिम्मेदारियों पर उठे गंभीर प्रश्न

चर्चा का विषय यह भी है कि पशु चिकित्सक डॉ. पुष्प राज देवतारा में तैनाती से पहले लंबे समय तक बिछिया क्षेत्र में पदस्थ रहे। बिछिया को जिले में एक तरह से स्लॉटर हाउस गतिविधियों का केंद्र बिंदु माना जाता है। सूत्रों के अनुसार, बिछिया में तैनाती के दौरान इस प्रकरण की हल्की आंच तत्कालीन मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (CVO) डॉ. महावीर सिंह के कार्यकाल में भी महसूस की गई थी।

उल्लेखनीय है कि डॉ. महावीर सिंह पहले ही वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों में निलंबित हो चुके हैं। उनका निलंबन भी उस समय काफी चर्चा में रहा था। एक ओर उनके सेवानिवृत्ति पूर्व विदाई समारोह की तैयारियां चल रही थीं, तो दूसरी ओर अचानक निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया। बिछिया में तैनाती के दौरान डॉ. पुष्प राज को इंडाग्रो स्लॉटर हाउस में एंटीमार्टम, पोस्टमार्टम एवं सर्टिफिकेट प्रमाणन जैसी अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। इसी बीच व्यापम घोटाले से जुड़े मामले में उनकी अदालत में पेशियां भी चल रही थीं।

ऐसे में सवाल उठता है कि पेशी पर जाने के दौरान स्लॉटर हाउस सहित अन्य विभागीय जिम्मेदारियों का निर्वहन किस चिकित्सक द्वारा और किस प्रक्रिया के तहत किया गया। पूर्व में यह आरोप भी उठ चुके हैं कि स्लॉटर हाउस से जुड़े सर्टिफिकेट पहले ही जारी कर दिए जाते थे, जिसको लेकर कई बार आशंकाएं व्यक्त की गईं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन परिस्थितियां पूरे मामले को गंभीर जांच के दायरे में लाती हैं। फिलहाल यह पूरा प्रकरण विभागीय कार्यप्रणाली, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और निगरानी तंत्र पर सवाल खड़े कर रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन स्तर पर इस मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराई जाती है या नहीं।

क्या बोले निदेशक!

मेम पाल सिंह निदेशक प्रशासन एवं विकास से ज़ब इस गंभीर प्रकरण में बात की गयी तो उन्होंने बताया ये चीज मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ही बता सकते है वह चीज है या नही। सारे डॉक्यूमेंट सीवीओ के पास हैं, उनमें क्या दर्ज है,क्या नहीं, जब हमारे पास आते है तब हम देखकर बता सकते है

क्या बोले सीवीओ!

मामले में ज़ब सीवीओ डॉ विनोद कुमार से बात की गयी तो उन्होंने बताया की अभी हमें इसके बारे में ज्यादा जानकारी नही है। प्रकरण की सूचना पत्र के माध्यम से उच्च अधिकारी को भेजी जाएगी। जैसे उनके निर्देश होंगे आगे वैसी कार्यवाही की जाएगी।

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