उत्तर प्रदेश

Unnao: पशुचिकित्सक की व्यस्तता से कृत्रिम गर्भाधान प्रभावित

Admindelhi1
9 Jan 2026 1:03 PM IST
Unnao: पशुचिकित्सक की व्यस्तता से कृत्रिम गर्भाधान प्रभावित
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उन्नाव: पशुपालन विभाग द्वारा संचालित वीर्य कृत्रिम गर्भाधान योजना का मुख्य उद्देश्य दुधारू पशुओं-गाय, भैंस आदि-की नस्ल में सुधार कर दुग्ध उत्पादन क्षमता को बढ़ाना है। यह योजना पशुपालकों की आय बढ़ाने और प्रदेश को दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके बावजूद कुछ पशु चिकित्सकों की उदासीनता के चलते यह कार्यक्रम अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहा है।हसनगंज तहसील के नवाबगंज पशु चिकित्सालय में तैनात चिकित्सक डॉ. राजेश कुमार मौर्य का ध्यान इन दिनों वीर्य कृत्रिम गर्भाधान योजना की ओर नहीं दिख रहा है।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार यहां सेक्स्ड सॉर्टेड सीमेन की संख्या शून्य दर्ज की गई है, जो योजना के प्रति गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करती है।बताया जाता है कि डॉ. राजेश मौर्य के पास अलसुपर से जुड़े एंटीमार्टम व पोस्टमार्टम प्रमाणन का अतिरिक्त कार्यभार है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब सदर तहसील में ही सभी स्लाटर हाउस स्थित हैं और वहां 13 पशु चिकित्सकों की तैनाती है, तो फिर हसनगंज तहसील के चिकित्सक पर यह जिम्मेदारी क्यों डाली गई? स्थानीय पशुपालकों का कहना है कि चिकित्सक के अधिकतर समय स्लाटर से जुड़े कार्यों में व्यस्त रहने के कारण कृत्रिम गर्भाधान जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। इससे न केवल पशुपालकों को नुकसान हो रहा है, बल्कि सरकार की महत्वाकांक्षी नस्ल सुधार योजना भी कागजों तक सिमटती नजर आ रही है। अब यह देखना अहम होगा कि विभाग इस असंतुलित कार्य विभाजन पर क्या कदम उठाता है और क्या कृत्रिम गर्भाधान योजना को प्राथमिकता दिलाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।

सेक्स्ड सार्टेड सीमेन संख्या शून्य, तैनाती पर सवाल

मिले आंकड़ों के अनुसार दिसंबर माह में सेक्स्ड सॉर्टेड सीमेन की संख्या हसनगंज तहसील अंतर्गत नवाबगंज पशु चिकित्सालय व पशु सेवा केंद्र पर शून्य दर्ज की गई। इससे कृत्रिम गर्भाधान योजना की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, चर्चाएं यह भी हैं कि शासनादेश के विपरीत, सदर तहसील में पर्याप्त संख्या में पशु चिकित्सकों की उपलब्धता होने के बावजूद हसनगंज के चिकित्सक डॉ. राजेश मौर्या की तैनाती स्लाटर से जुड़े कार्यों में क्यों की गई। हालांकि यह मामला मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) के संज्ञान में है, लेकिन सीवीओ ने इसे शासन स्तर का विषय बताते हुए जिम्मेदारी उच्च स्तर पर होने की बात कही है।

क्या बोले उन्नाव सीवीओ?

मामले में सीवीओ डॉ विनोद कुमार ने बताया कि हम इसके चालान फॉर्म सब मंगा लेंगे। किसका कितना जमा हुआ है किसने कितना किया है। सेक्स्ड सार्टेड यूज़ हुआ है कितना लेबी जमा हुई सबका डिटेल निकला लेंगे।

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