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Uttar Pradesh. उत्तर प्रदेश। केंद्रीय मंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने शुक्रवार को आगरा में मीडिया से बातचीत के दौरान दर्ज की गई एफआईआर को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी एफआईआर का दर्ज होना पूरी तरह सबूतों पर आधारित प्रक्रिया है और इसे किसी भी तरह से “राजनीतिक प्रतिशोध” या “वेंडेटा” के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मंत्री बघेल ने कहा कि आर्थिक अन्वेषण विंग (Economic Wing) ने संबंधित मामले में आवश्यक जांच प्रक्रिया पूरी की है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया, “जब भी कोई मामला दर्ज होता है तो उसके पीछे विस्तृत जांच और प्रमाण होते हैं। जांच एजेंसी सबूतों का सत्यापन करने के बाद ही तय करती है कि मामला दर्ज होना चाहिए या नहीं। इसलिए एफआईआर सबूतों के आधार पर ही हुई है।”
उन्होंने आगे कहा कि कानून व्यवस्था और जांच प्रक्रिया में कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है, और देश की न्याय प्रणाली पूरी तरह स्वतंत्र और पारदर्शी है। मंत्री बघेल ने उदाहरण देते हुए कहा कि एफआईआर के बाद अगला चरण चार्जशीट तैयार होने का होता है, जिसमें एकत्रित किए गए साक्ष्यों का विश्लेषण किया जाता है। इसके बाद अदालतें स्वतंत्र रूप से सुनवाई करती हैं और अंतिम निर्णय देती हैं। केंद्रीय मंत्री ने दोहराया, “हमारी अदालतें स्वतंत्र और निष्पक्ष हैं। जांच एजेंसियां विधि सम्मत तरीके से कार्य करती हैं। ऐसे में किसी एफआईआर को प्रतिशोध की कार्रवाई बताना उचित नहीं है। इसे पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया माना जाना चाहिए।”
उन्होंने विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों को निराधार बताते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य कानून के राज को स्थापित करना है और किसी भी प्रकार के आर्थिक अपराध, भ्रष्टाचार या अवैध गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए कार्रवाई आवश्यक है। बघेल ने कहा कि जनता को न्याय देने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार और एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में अदालत का फैसला अंतिम होता है और सभी को न्यायपालिका के निर्णय पर भरोसा रखना चाहिए। आगरा में दिए गए इस बयान को वर्तमान राजनीतिक माहौल में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि विपक्ष अक्सर जांच एजेंसियों पर “दुरुपयोग” का आरोप लगाता रहा है। हालांकि, केंद्रीय मंत्री के अनुसार, सभी कदम कानूनी प्रावधानों के तहत और साक्ष्यों के आधार पर ही उठाए जाते हैं।
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