उत्तर प्रदेश

स्लीपर बसों में यात्रियों संग ढोया जा रहा बिना बिल का माल, हादसे का खतरा बढ़ा

nidhi
7 Oct 2026 6:56 AM IST
स्लीपर बसों में यात्रियों संग ढोया जा रहा बिना बिल का माल, हादसे का खतरा बढ़ा
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ग्रेटर नोएडा में टैक्स चोरी का खेल

ग्रेटर नोएडा: दिल्ली-एनसीआर से पूर्वांचल और बिहार की ओर जाने वाली स्लीपर बसों में यात्रियों के साथ बड़े पैमाने पर कमर्शियल सामान ढोए जाने का मामला सामने आया है। कई बसों में ऐसा सामान भी मिल रहा है, जिसके साथ जरूरी बिल या दस्तावेज मौजूद नहीं होते। इससे न केवल टैक्स चोरी की आशंका बढ़ रही है, बल्कि भारी सामान के कारण ओवरलोडिंग और यात्रियों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्लीपर बसों के लगेज कंपार्टमेंट से लेकर छत तक सामान भरकर ले जाया जा रहा है। यात्रियों के व्यक्तिगत सामान के अलावा व्यापारिक माल भी बसों में लादा जा रहा है। हाल ही में ग्रेटर नोएडा में आग लगने वाली एक बस की जांच में शादी के कार्ड के बंडल, तार, लोहे के छल्ले और अन्य कमर्शियल सामान मिला था। पुलिस यह जांच कर रही है कि अतिरिक्त भार से बस ओवरलोड तो नहीं थी और क्या इसने हादसे को गंभीर बनाने में भूमिका निभाई।
यमुना एक्सप्रेसवे पर 23 सितंबर को एक स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत के बाद बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल और गहरे हो गए थे। इसके बावजूद ग्राउंड रिपोर्ट में कई बस संचालकों द्वारा यात्रियों के साथ बड़ी मात्रा में सामान ढोने की बात सामने आई। यात्रियों का दावा है कि कुछ बसों में क्षमता से ज्यादा सवारी और सामान तक लिया जा रहा है।
मामला केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। राज्य कर विभाग की जांच में स्लीपर बसों के जरिए बिना बिल के माल की ढुलाई के मामले भी पकड़े गए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 98 बसों की जांच के दौरान करीब 1.67 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाई गई। वहीं अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच 21 स्लीपर बसों की जांच में अनियमितताएं मिलने पर करीब 26.42 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई। बसों में मनमाने बदलाव भी यात्रियों के लिए खतरा बन रहे हैं। ग्रेटर नोएडा में कुछ बस संचालकों पर स्वीकृत लेआउट में बदलाव कर छह से दस अतिरिक्त सीटें लगाने और इमरजेंसी एग्जिट तक बाधित करने के आरोप सामने आए हैं। इससे आपात स्थिति में यात्रियों को बाहर निकालना मुश्किल हो सकता है।
हाल के हादसों के बाद परिवहन विभाग ने स्लीपर और निजी बसों के खिलाफ जांच अभियान भी तेज किया है। नोएडा और गाजियाबाद में एक अभियान के दौरान 115 निजी बसें जब्त की गईं और 156 बसों के चालान किए गए। अधिकारियों ने नियम उल्लंघन के मामलों में लाखों रुपये का शुल्क और टैक्स भी वसूला।
6 अक्टूबर को भी नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर करीब 32 यात्रियों को लेकर जा रही एक स्लीपर बस में आग लग गई थी। सभी यात्री समय रहते सुरक्षित बाहर निकल गए, लेकिन लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने बस संचालन के तरीकों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों के लिए बनी बसों में कमर्शियल माल की ढुलाई, ओवरलोडिंग, अतिरिक्त सीटें और आपातकालीन निकास में रुकावट जैसे मामले गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकते हैं। ऐसे में परिवहन और कर विभाग के सामने चुनौती है कि टैक्स चोरी रोकने के साथ-साथ बसों में यात्रियों की सुरक्षा के नियमों का भी सख्ती से पालन कराया जाए।
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