उत्तर प्रदेश

अबान के जनाजे में शामिल होंगे उमर और अली जेल से आने की मिली अनुमति

nidhi
8 Aug 2026 8:09 AM IST
अबान के जनाजे में शामिल होंगे उमर और अली जेल से आने की मिली अनुमति
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अतीक के बेटे अबान का जनाजा जेल से आएंगे भाई उमर और अली फिर होगा सुपुर्द-ए-खाक

प्रयागराज: पूर्व सांसद और माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की मौत के बाद परिवार में मातम पसरा है। सड़क हादसे में अबान की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अबान के बड़े भाई और जेल में बंद मोहम्मद उमर और अली अहमद भी अपने छोटे भाई के जनाजे में शामिल हो सकेंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों को सीमित अवधि के लिए पैरोल मंजूर कर दी है।

अबान का शव झांसी से प्रयागराज लाया गया है। परिवार की ओर से अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक अबान को प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अंतिम संस्कार को देखते हुए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है।
अबान की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यह था कि जेल में बंद उसके भाई उमर और अली क्या अंतिम बार अपने छोटे भाई को देख पाएंगे। परिवार ने अदालत से दोनों को पैरोल देने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने मानवीय आधार पर दोनों को जनाजे में शामिल होने की अनुमति दे दी।
सड़क हादसे में हुई अबान की मौत
अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की मौत सड़क हादसे में हुई। हादसे के बाद परिवार को इसकी सूचना दी गई और शव को झांसी से प्रयागराज लाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
अबान की मौत की खबर सामने आते ही परिवार और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के सदस्य अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुट गए।
रिपोर्टों के अनुसार अबान का शव प्रयागराज पहुंचने के बाद परिवार के लोगों और करीबियों की आवाजाही बढ़ गई। उसके जनाजे को लेकर चकिया और कसारी-मसारी इलाके में भी लोगों की मौजूदगी देखी गई।
उमर और अली के सामने थी बड़ी मुश्किल
अबान के दो बड़े भाई उमर अहमद और अली अहमद अलग-अलग जेलों में बंद हैं। छोटे भाई की मौत की खबर मिलने के बाद उनके परिवार की ओर से मांग की गई कि दोनों को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी जाए।
परिवार का कहना था कि अंतिम संस्कार जैसे मौके पर भाइयों को अपने छोटे भाई को आखिरी बार विदाई देने का अवसर मिलना चाहिए।
इसी मांग को लेकर अदालत का रुख किया गया।
जेल में बंद किसी व्यक्ति को इस तरह के पारिवारिक अवसर पर बाहर आने की अनुमति सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होती। इसके लिए अदालत से विशेष अनुमति की जरूरत पड़ती है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी पैरोल
परिवार की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई की और उमर तथा अली को अबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल मंजूर कर दी।
रिपोर्टों के अनुसार हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मानवीय आधार पर दोनों भाइयों को यह राहत दी। अदालत ने उनके छोटे भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी है।
यह अनुमति सामान्य रिहाई नहीं है। दोनों को अदालत द्वारा तय शर्तों और सुरक्षा व्यवस्था के तहत ही अंतिम संस्कार में शामिल होना होगा।
कड़ी सुरक्षा के बीच आएंगे दोनों भाई
उमर और अली के पैरोल पर बाहर आने के कारण सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन सतर्क है।
दोनों भाइयों को जेल से निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के तहत प्रयागराज लाया जाएगा। अंतिम संस्कार के बाद उन्हें वापस संबंधित जेल में भेजा जाना है।
अतीक अहमद के परिवार से जुड़ा मामला पहले भी सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस के लिए बेहद संवेदनशील रहा है। ऐसे में अबान के अंतिम संस्कार के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की जा रही है।
मीडिया से बातचीत पर भी रोक
अदालत द्वारा दी गई पैरोल के दौरान दोनों भाइयों के लिए शर्तें तय की गई हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक उन्हें मीडिया से बातचीत करने की अनुमति नहीं होगी। उनका उद्देश्य केवल अपने भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होना है।
इस तरह प्रशासन का ध्यान इस बात पर है कि अंतिम संस्कार शांतिपूर्ण तरीके से पूरा हो और वहां किसी प्रकार का राजनीतिक या सार्वजनिक जमावड़ा स्थिति को प्रभावित न करे।
अबान के शव को झांसी से प्रयागराज लाया गया
अबान की मौत झांसी में हुई थी। हादसे के बाद उसके शव को प्रयागराज लाया गया।
परिवार के सदस्य शव को लेकर प्रयागराज पहुंचे, जहां अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हुईं।
परिवार के लिए यह समय बेहद भावुक है। अबान के अंतिम संस्कार में उसके परिवार और करीबी लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
कसारी-मसारी में होगा अंतिम संस्कार
अबान को प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किए जाने की तैयारी है।
इसी इलाके में अतीक अहमद और उसके परिवार से जुड़े कई सदस्य पहले भी दफन किए जा चुके हैं। अबान के अंतिम संस्कार को लेकर भी परिवार की ओर से इसी कब्रिस्तान को चुना गया है।
कौन था अबान अहमद?
अबान अहमद अतीक अहमद और शाइस्ता परवीन के पांच बेटों में सबसे छोटा था।
अतीक के बेटों में उमर सबसे बड़ा है। इसके बाद अली, असद, अहजम और अबान का नाम आता है।
अबान अपेक्षाकृत कम उम्र का था और लंबे समय तक सार्वजनिक चर्चा से दूर रहा।
हालांकि 2025 में उसका एक वीडियो सामने आने के बाद वह फिर खबरों में आया था। उस समय वह जेल में बंद अपने भाई अली से मिलने पहुंचा था।
जेल में बंद भाइयों से मुलाकात का मामला
अबान इससे पहले अपने भाई अली से मिलने नैनी सेंट्रल जेल पहुंचा था। उस दौरान उसका वीडियो भी सामने आया था। इससे पहले अतीक परिवार के सदस्यों की जेल में मुलाकातें भी जांच और प्रशासनिक निगरानी के दायरे में रही हैं। अब अबान के निधन के बाद वही भाई अली उसके जनाजे में शामिल होने के लिए जेल से बाहर आएगा। परिवार के लिए यह भावनात्मक क्षण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जेल में बंद दोनों भाई लंबे समय से अपने परिवार के कई सदस्यों से सामान्य परिस्थितियों में नहीं मिल पाए हैं।
पैरोल का मतलब क्या है?
पैरोल का अर्थ यह नहीं है कि उमर और अली को उनके मामलों से स्थायी राहत मिल गई है। यह केवल सीमित अवधि के लिए दी गई अनुमति है, जिसका उद्देश्य उन्हें छोटे भाई के अंतिम संस्कार जैसे महत्वपूर्ण पारिवारिक अवसर में शामिल होने देना है। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद दोनों को वापस जेल लौटना होगा। अदालत की ओर से तय शर्तों का पालन करना भी उनके लिए अनिवार्य होगा।
मानवीय आधार पर अदालत का फैसला
ऐसे मामलों में अदालतें पारिवारिक और मानवीय परिस्थितियों को भी ध्यान में रख सकती हैं। किसी करीबी रिश्तेदार की मृत्यु ऐसा अवसर है जहां कैदी को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति देने की मांग की जाती है। इस मामले में भी अदालत ने इसी मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए दोनों भाइयों को पैरोल दी।
अंतिम संस्कार को लेकर प्रशासन सतर्क
प्रयागराज पुलिस और प्रशासन के लिए अबान का अंतिम संस्कार सामान्य पारिवारिक कार्यक्रम नहीं है। अतीक अहमद का नाम लंबे समय तक प्रयागराज की अपराध और राजनीति से जुड़ा रहा है। उसके परिवार से जुड़े किसी भी कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना रहती है।
इसी वजह से प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाई है।
चकिया में जुटी भीड़
अबान के जनाजे में शामिल होने के लिए अतीक के पुराने चकिया आवास के आसपास भी लोगों की भीड़ जुटने की खबर सामने आई है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार चकिया इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
प्रशासन की कोशिश है कि भीड़ नियंत्रित रहे और जनाजे की प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हो।
अंतिम संस्कार में कौन-कौन होगा?
अबान के अंतिम संस्कार में परिवार के सदस्यों के साथ रिश्तेदार और करीबी लोग शामिल हो सकते हैं। उमर और अली को अदालत से विशेष अनुमति मिलने के बाद उनकी मौजूदगी भी तय हो गई है। परिवार के चौथे बेटे अहजम ने भी अबान के शव को झांसी से प्रयागराज लाने की प्रक्रिया में भूमिका निभाई। परिवार की ओर से जेल में बंद भाइयों को जनाजे में शामिल कराने के लिए पैरोल की मांग भी की गई थी।
अहजम ने की थी पैरोल की मांग
रिपोर्टों के अनुसार अहजम अहमद अबान का शव लेने झांसी पहुंचा था। इसके बाद परिवार की ओर से अदालत में अपील की गई कि उमर और अली को अंतिम संस्कार में शामिल होने दिया जाए। परिवार की यह मांग भावनात्मक आधार पर रखी गई थी। अदालत ने सुनवाई के बाद दोनों को पैरोल देने का आदेश दिया।
अबान की मौत कैसे हुई?
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अबान की मौत सड़क हादसे में हुई। हादसा झांसी में हुआ, जिसके बाद शव को प्रयागराज लाया गया। हादसे की परिस्थितियों को लेकर स्थानीय स्तर पर जांच और कानूनी प्रक्रिया हो सकती है। हालांकि फिलहाल अंतिम संस्कार से जुड़ी तैयारियां प्राथमिकता में हैं।
परिवार पर लगातार संकट
अतीक अहमद के परिवार का पिछले कुछ वर्षों का इतिहास लगातार कानूनी और हिंसक घटनाओं से जुड़ा रहा है। अतीक और अशरफ की हत्या, असद की मुठभेड़ में मौत और अबान की सड़क दुर्घटना में मौत—इन घटनाओं ने परिवार को लगातार झकझोरा है।
अतीक के परिवार के कई सदस्य अलग-अलग कानूनी मामलों में भी रहे हैं।
अतीक अहमद की मौत
अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में पुलिस सुरक्षा के बीच गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दोनों को मेडिकल जांच के लिए ले जाया जा रहा था। उसी दौरान तीन हमलावरों ने गोलीबारी की।
इस घटना ने पूरे देश का ध्यान प्रयागराज की ओर खींचा था।
असद की मौत
अतीक के बेटे असद की मौत 13 अप्रैल 2023 को झांसी में उत्तर प्रदेश STF के साथ मुठभेड़ में हुई थी। उस पर उमेश पाल हत्याकांड में शामिल होने का आरोप था। असद की मौत अतीक और अशरफ की हत्या से केवल दो दिन पहले हुई थी।
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